सबके मालिक शिव

“नइहर के यज्ञ में पति का अपमान हो तो पत्नी उसी यज्ञ के हवन-कुण्ड में कूद कर आत्मदाह कर ले… और सम्बन्धों में समर्पण ऐसा कि पुनर्जन्म ले और तमाम सामाजिक अवरोधों को पार करते हुए पुनः उसी पति का वरण करे!” सोच कर देखिये, दाम्पत्य जीवन के आदर्श निर्वहन, पति-पत्नी के सम्बन्धों में समर्पण का ऐसा उदाहरण पूरे विश्व के इतिहास में दूसरा कोई नहीं। लगता है जैसे “पति…

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महाशिवरात्रि : योग—गार्हस्थ्य में विरोधाभास नहीं

आज महाशिवरात्रि है। योगियों और सन्यासियों के लिए यह वह रात्रि है जब लंबी साधना के बाद आदियोगी शिव को योग की उच्चतम उपलब्धियां हासिल हुई थीं। जब उनके भीतर की तमाम हलचलें थम गई थीं और वे स्वयं कैलाश पर्वत की तरह स्थिर और निर्विकार हो गए थे। एक पौराणिक कथा के अनुसार यह वह रात्रि है जब समुद्र-मंथन से प्राप्त हलाहल विष के दुष्प्रभाव से दुनिया को बचाने…

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बचानी होगी मातृभाषा

दूध बोली आजकल अतीत की बात होती जा रही है। कारण, कोई भी दूध बोली बोलने में अब शर्म महसूस करता है। यही हाल रहा तो एक दिन आपकी मातृभाषा मर जाएगी। हर घर में लोग हिंदी बोलने लगे हैं। कुछ लोग तो हिंदी को ही मातृ भाषा कहने लगे हैं। अगर हिंदी मातृभाषा है तो सम्पर्क भाषा कौन होगी? बच्चे कहते हैं हम अपनी मातृभाषा समझ लेते हैं, पर…

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मातृ सदन की गंगा

गंगा की निर्मलता, अविरलता और खनन माफिया से उसकी मुक्ति के लिए स्वामी शिवानंद के नेतृत्व में हरिद्वार का मातृ सदन पिछले कई दशकों से संघर्षरत रहा है। इस सिलसिले में आश्रम ने कई कुर्बानियां दी हैं। गंगा को खनन माफियाओं से बचा लेने और उसकी सफाई के लिए एक कारगर नीति और क़ानून बनाने की मांग लेकर कुछ सालों पहले लगातार 114 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे आश्रम…

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गुरुजी! जो अकेला लड़ता रहा भारत में…

सन सैंतालीस, भारत विभाजन! तब संघचालक थे गुरुजी! जिन्ना के डायरेक्ट एक्शन के बाद से शुरू हुआ हिन्दुओं का कत्लेआम भारत विभाजन की घोषणा के बाद भी नहीं थम रहा था। गाँधी की कोई सुन नहीं रहा था और नेहरू सत्ता हस्तानांतरण की तैयारियों में व्यस्त थे। पाकिस्तान में हिन्दू भेड़-बकरियों की तरह काटे जा रहे थे। कठोर किन्तु सत्य है, तब पाकिस्तान के हिन्दुओं की सहायता के लिए केवल…

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तंजानिया की डाडा

तंजानिया 1964 में अस्तित्व में आया था। यह तंगानयिका व जंजीवार दो देशों को मिलाकर बना है। इसे संयुक्त गणराज्य कहते हैं। 1996 से इस गणराज्य की राजधानी देदोम है। यूं तो विदेशों में नौकरानी मिलना बहुत मुश्किल है, पर तंजानिया में यह सर्व सुलभ है। ये नौकरानियां सामान्य दरों पर काम करतीं हैं। इन्हें डाडा कहा जाता है। डाडा बहन को कहते हैं। डाडा बर्तन धोने से लेकर झाड़ू…

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ऐ मुहब्बत तेरे अंज़ाम पे रोना आया

डेढ़ दशक पहले प्रो. मटुकनाथ चौधरी और उनकी छात्रा जूली की प्रेमकथा देश की सर्वाधिक चर्चित प्रेमकथाओं में एक रही थी। तमाम सामाजिक, पारिवारिक और नैतिक विरोध झेलते हुए दोनों ने साथ रहना स्वीकार किया था। वह भी एक ऐसे वक्त में जब लिव इन रिलेशन प्रचलित नहीं हुआ था। हम सबने मीडिया में उदात्त प्रेम पर उनके सैकड़ों प्रवचन पढ़े-सुने थे। कुछ ही सालों में जाने क्या हुआ कि…

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सावधान! टिड्डी दल आन लाग रिया

ग्रीस की कहानी है ये। जरा ध्यान से सुनिए। बसंत का मौसम था। बहुत प्यारी गुनगुनी धूप खिली थी। टिड्डी आराम से धूप में पसरी थी। वह अपना कोई विशेष राग अलाप रही थी। चींटी काम कर रही थी। वह बुरे दिनों के वास्ते भोजन जुटा रही थी। टिड्डी ने उस पर फब्ती कसा था- “मौसी! तुम दिन भर केवल खाने की सोचती रहती हो! दुनिया में खाने के अलावा…

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जीवन और प्रेम का कवि

स्व. जीवनानंद दास (1899-1954) रवीन्द्रनाथ टैगोर के बाद बांग्ला के सबसे जनप्रिय कवियों में एक हैं। बांग्ला के वे पहले कवि हैं जिन्होंने टैगोर की कविता के रूमान और रहस्यवाद को अस्वीकार करने का साहस दिखाया और कविता की एक सर्वथा अलग शैली और काव्यभाषा को जन्म दिया। टैगोर की आलोचना के कारण उनकी कुछ कृतियों – झरा पालक, धूसर पांडुलिपि, बनलता सेन, महापृथिबी, रूपसी बांगला आदि को उनके जीवनकाल…

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बिल्लौरी आंखों वाली लड़की

उसकी आंखें बिल्लौरी थीं। मेरे क्लिनिक में उसके माता पिता लाए थे। उसके पिता ने बताया था कि उस लड़की ने एम बी ए किया है। एक मल्टी नेशनल कम्पनी में काम करती है। अच्छी खासी तनख्वाह है। इसके लिए बहुत से रिश्ते आ रहे हैं लेकिन यह हर रिश्ते को नकार रही है। हमने यहां तक पूछा कि इसकी नजर में कोई लड़का हो तो बताए। हम उसी से…

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