ये जिंदगी है कौम की…

‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा’ के उद्घोषक, अंग्रेजी शासन के खिलाफ गठित आज़ाद हिन्द फ़ौज के संस्थापक और सर्वोच्च कमांडर, देश को ‘जय हिन्द’ का नारा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सीमित साधनों से जिस तरह ताक़तवर ब्रिटिश साम्राज्यवाद का मुकाबला किया, वह विश्व इतिहास की कुछ दुर्लभ घटनाओं में एक थी। आजाद हिन्द फौज को छोड़ विश्व-इतिहास में ऐसा कोई…

Read More >>

इंडोनेशिया का द्वीप प्रांत बाली

मछली के आकार के इंडोनेशिया देश के इस द्विपीय प्रांत का प्राचीन नाम वेणु बन था जो अपने शांत, धर्म निरपेक्ष व मन्दिरों के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि आज से 2000 वर्ष पहले मार्कण्डेय ऋषि ने यहाँ आकर भारतीय धर्म व संस्कृति का प्रचार प्रसार किया था। पांचवीं शताब्दी के अंत तक यहाँ गुप्त वंश के राजाओं का अधिपत्य था। 1500 ई. के लगभग जब अरब आक्रांताओं…

Read More >>

जब औरत के जीवन में कोई दूसरा आ जाए

समाचार पत्रों में अक्सर खबरें छपती रहतीं हैं दो बच्चों की मां एक युवक के साथ फरार। ऐसा कई कारणों से होता है। बहुधा इस तरह के मामलों में जिस्मानी ताल्लुक हाॅवी रहता है। कलकत्ता में हमारे पड़ोस में एक औरत अपने बच्चों के साथ किसी नशेड़ी युवक के साथ भाग गयी। बात जब जिस्म से पेट पर आई तो आटे—दाल का भाव मालूम हुआ और उस औरत को अपने…

Read More >>

दिल की सुनो दुनिया वालों!

बीसवी शताब्दी के महानतम शायरों में एक मरहूम कैफ़ी आज़मी अपने आप में एक व्यक्ति न होकर एक संस्था, एक युग थे जिनकी रचनाओं में हमारा समय और समाज अपनी तमाम खूबसूरती, दर्द और कुरूपताओं के साथ बोलता नज़र आता है। एक तरफ उन्होंने आम आदमी के दुख-दर्द को शब्दों में जीवंत कर अपने हक के लिए लड़ने का हौसला दिया तो दूसरी तरफ सौंदर्य और प्रेम की नाज़ुक संवेदनाओं…

Read More >>

बदहाल मिर्ज़ापुर का किला चुनार

56 साल ईसा पूर्व उज्जैन के शासक विक्रमादित्य ने अपने बैरागी बड़े भाई भर्तृहरि के लिए यह एकांत तपस्थली बनवाई थी। इस किले में आज भी भर्तृहरि की समाधि मौजूद है। यहाँ एक गुफ़ा है जो भर्तृहरि की गुफा के नाम से मशहूर है। पहले इस किले का नाम चरणादृगढ़ था, जो कालांतर में अपभ्रंशित हो चुनार हो गया। 18 अप्रैल सन् 1924 को चुनार के किले में एक शिलालेख…

Read More >>

मरे हुए लोग भी होंगे जिंदा!

आए दिन ऐसा सुनने को मिलता है कि मरा हुआ व्यक्ति जिंदा हो गया। इसे ईश्वर का चमत्कार कहेंगे। इन मरे हुए लोगों ने जिंदा होकर अपना अनुभव भी साझा किया है। मृत शरीर को छोड़ रही आत्मा बहुत सुकून महसूस कर रही होती है। परिवार के लोग रो रहे होते हैं। आत्मा शरीर छोड़कर किसी अंधेरे संकरे मार्ग से प्रकाश की ओर बढ़ रही होती है। तभी उस आत्मा…

Read More >>

आओ तुम्हें मैं प्यार सिखा दूं

बसंत और वैलेंटाइन डे की आहट के साथ फेसबुक के कुछ कमउम्र लड़के इन दिनों मुझसे प्रेम में सफलता के टिप्स मांगने लगे हैं। पता नहीं किस वजह या एंगल से युवा दोस्तों को मुझमें अपना लव गुरु नज़र आता है। हमारे ज़माने में प्रेम ज्यादातर एकतरफ़ा ही हुआ करता था। किसी को मन ही मन चाहो, उसके सपने देखो, उसकी गलियों के चक्कर मारो, उसकी याद में फिल्मी गाने…

Read More >>

चींटी चढ़ी पहाड़ पर

बचपन में मैंने एक बड़े कीड़े को खेल—खेल में मार दिया था। उसके मृत शरीर के पास एक चींटी आयी। उसे सूंघा और एक दिशा में चल पड़ी। मैंने उसका पीछा किया। वह एक बिल में जा घुसी। एक सेकण्ड बाद ही वह फिर बाहर निकली। उसके पीछे चींटियों का काफिला आ रहा था। चींटियां कतार में चल रहीं थीं। आगे चलने वाली चींटी एक तरह का रसायन छोड़ती है,…

Read More >>

चाह बर्बाद करेगी, हमें मालूम न था !

स्व. कुंदन लाल सहगल हिंदी ही नहीं, भारतीय सिनेमा के पहले महानायक रहे हैं जिनसे आधुनिक हिन्दी सिनेमा की यात्रा शुरू हुई थी। सिनेमा की अति नाटकीयता के उस दौर में वे पहले अभिनेता थे जिन्होंने स्वाभाविक अभिनय के नए-नए मुहाबरे गढ़े, जिसका अनुकरण उनके बाद के अभिनेताओं ने किया। बोलते सिनेमा की शुरुआत के बाद पिछली सदी के तीसरे और चौथे दशक में दिलीप कुमार और राज कपूर के…

Read More >>

बनारस की कचौड़ी गली

विश्वनाथ मंदिर की गली विश्वनाथ गली कहलाती है। विश्वनाथ गली चलते—चलते अचानक कचौड़ी गली में बदल जाती है। कचौड़ी गली विश्वनाथ मंदिर और मणिकर्णिका घाट के बीच पड़ती है। विश्वनाथ बाबा के दर्शन करने वाले और मणिकर्णिका घाट से आने वाले हर आदमी इस कचौड़ी गली में आता है नाश्ता करने के लिए। कचौड़ी गली कभी अजायब गली (कूचा ए अजायब) के नाम से मशहूर थी। अजायब मुगलकालीन एक सरकारी…

Read More >>
error: Content is protected !!