हरिहर क्षेत्र का मेला

बिहार के सोनपुर का हरिहर क्षेत्र मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन आरंभ होने वाले इस मेले में बिहार के कोने-कोने से आए लाखों लोग पवित्र गंडक और गंगा नदियों के संगम में स्नान कर स्थानीय हरिहर नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। इस मेले की पृष्ठभूमि में पौराणिक कथा है कि प्राचीन काल में यहां गज और ग्राह के बीच लंबी…

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टीन के बाक्स के साथ सफर (3)

रात को दो/तीन बजे ट्रेन अम्बाला कैण्ट पहुँची। अब तक बाक्स की कोई खोज खबर नहीं ली गयी थी। यहां तो उतरना था। अब तो बाॅक्स की खैर खबर लेना जरुरी हो गया था। इलेक्ट्रीशियन भीड़ में घुसा। फर्श पर बैठे लोगों ने कह दिया कि बाॅक्स यहां नहीं है। लोड करते समय मैंने खुद ही देखा था। कुली उसे सीट के नीचे रख मुझे ताकीद भी कर गया था।…

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लंबी प्रतीक्षा का अंत

खुश होइये कि चार सौ सत्तासी वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा का अंत हुआ। यह हमारी या आपकी विजय नहीं, यह भारत की विजय है। राम तो यहाँ के कण-कण में हैं, आज भारत का स्वाभिमान लौटा है। यहाँ न कोई पक्ष हारा है न कोई पक्ष जीता है, आज भारतीय स्वाभिमान की गर्दन पर रखी गयी समरकन्द की तलवार टूटी है। गर्व कीजिये कि आपने आज का दिन देखा है।…

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पर्यावरण का लोकपर्व : सामा चकेवा

​हमारे देश में शास्त्रीय पर्वों और उत्सवों के अतिरिक्त रंग-विरंगे लोक पर्वों की एक लंबी श्रृंखला है। लोक आस्था के कुछ सबसे खूबसूरत त्योहारों में छठ के अलावा बिहार के मिथिला क्षेत्र में हर साल मनाए जाने वाले सामा चकेवा की गिनती होती है। भाई-बहन के कोमल और प्रगाढ़ रिश्ते के बहाने प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को बेहद मासूम अभिव्यक्ति देने वाला यह लोकपर्व समृद्ध मिथिला संस्कृति की पहचान…

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टीन के बाक्स के साथ सफर (2)

श्रीनगर से हमने जम्मू की बस पकड़ी। होल्डाल और टीन का बक्सा बस की छत पर रखे गये। मुझे टीन के बक्स की हर पल चिंता रहती। बनिहाल के आगे चेकिंग चल रही थी। हमारे बस की भी चेकिंग हुई। एक सिपाही बस की छत पर चढ़ा। उसने वहीं से आवाज दी। लोहे का ट्रंक किसका है? मैंने जिंदगी में पहली बार ट्रंक शब्द सुना। मैं चुप रहा। जब नीचे…

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वो अंदाज़ हमें दे दे, ठाकुर

हिन्दी सिनेमा के सौ साल से ज्यादा लम्बे इतिहास में जिन अभिनेताओं ने अभिनय की नई-नई परिभाषाएं गढ़ी, उनमें स्वर्गीय संजीव कुमार उर्फ़ हरिभाई जरीवाला एक प्रमुख नाम है। अपने भावप्रवण चेहरे, विलक्षण संवाद-शैली और अभिनय में विविधता के लिए विख्यात संजीव कुमार एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, अभिनय के एक स्कूल माने जाते हैं। जब भी हिंदी फिल्मों में उत्कृष्ट अभिनय के कुछ मीलस्तंभ गिने जाएंगे, ‘कोशिश’ का गूंगा-बहरा…

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त्योहारी गुलाब

नवम्बर का महीना उदासियों का महीना रहा है। मन नहीं लगता। गाँव उस घर की तरह लगता है, जिस घर से बेटी विदा हुई हो। आदमी उदास, पेड़ उदास, हवा-पानी उदास… पता नहीं कौन और क्यों घनानंद की कविता गा जाता है। हालाँकि गाँवों के लिए नवम्बर अब बेटियों से अधिक बेटों के विदा होने का महीना हो गया है। नवम्बर के महीने में गाँव की सड़कें शहर की ओर…

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टीन के बाक्स के साथ सफर

आजकल मैं साहित्यकार प्रमोद कुमार की कहानी संग्रह “वो मेरी मोनिका” पढ़ रहा हूँ। इस वजह से मेरी फेसबुक पर सक्रियता पहले के मुकाबले काफी कम रह गयी है। इस कहानी संग्रह की एक कहानी “विदाई का बक्सा” पढ़ा, जिसमें दुल्हा दुल्हन को लेकर ट्रेन में सफर कर रहा है। विदाई का बक्सा उसी डिब्बे में थोड़ी दूरी पर रखा गया है। भीड़ कयामत की बढ़ती जा रही है। दुल्हा…

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उठु भारत हो….

जाने कितने युगों पुरानी घटना है, जब एकाएक अयोध्या की सभी वाटिकाओं के समस्त वृक्षों पर बिना ऋतु आये ही पुष्प खिलने लगे थे। कोयल कूकने लगी थी, सूर्य ने अपना तेज मद्धिम कर लिया था, सारे पक्षी गाने लगे थे, खेतों में फसलें लहलहाने लगी थीं। एकाएक नगर के समस्त पुरुषों की भुजाएं फड़कने लगी थीं। सभी स्त्रियों की आंखों में प्रेम के डोरे उभर आए थे। वनों में…

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जाऊंगा खाली हाथ मगर…

काकोरी के शहीद अशफाकुल्लाह खां भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी सेनानी और ‘हसरत’ उपनाम से उर्दू के एक अज़ीम शायर थे। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक ने किशोरावस्था में अपने ही शहर के क्रांतिकारी शायर राम प्रसाद बिस्मिल के व्यक्तित्व और विचारों से प्रभावित होकर अपना जीवन वतन की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया था। वे क्रांतिकारियों के उस जत्थे के सदस्य बने…

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