प्लास्टिक का नर्क !

देश के कई राज्यों में प्लास्टिक या पोलीथिन कैरी बैग पर प्रतिबंध तो है, लेकिन जनजागृति के अभाव में जमीन पर इसका असर कम ही देखा जा रहा है। पृथ्वी के पर्यावरण को बिगाड़ने में इनकी बहुत बड़ी भूमिका है। एक पोलिथिन बैग तैयार करने के लिए सिर्फ चौदह सेकंड ही चाहिए, लेकिन इसे नष्ट होने में चौदह हजार साल तक लग सकते है। एक बार प्रयोग कर फेंके गए…

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तमिल भाषी रांगेय राघव बने हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार

रांगेय राघव का पूरा नाम तिरू मल्लई नम्बकम बीर राघव आचार्य था । इनके पूर्वज तिरुपति बाला जी मन्दिर में पुजारी थे , जिनकी विद्वता से प्रभावित हो राजस्थान राजघराने द्वारा इन्हें राजस्थान के मन्दिरों में पूजा के लिए आमन्त्रित किया गया था । कालांतर में रांगेय राघव के पिता आगरा चले गए थे । यहीं पर रांगेय राघव का जन्म 17 जनवरी सन् 1923 को हुआ । हिंदी साहित्य…

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मकर संक्रांति – स्नान और दान का पर्व .

मकर संक्रांति के दिन हीं सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और दक्षिणायन से यह उत्तरायण में होता है । सूर्य का उत्तरायण होना मोक्ष प्रदान करने वाला होता है । आज के दिन के इंतज़ार में हीं भीष्म छः माह तक शर सैय्या पर पड़े रहे और सूर्य के उत्तरायण होते हीं अपने प्राण त्याग दिए थे । कहा जाता है कि मकर संक्रांति के…

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जापान में “सुपर डैड ” की खेती होने लगी है ।

जापान में 1992 तक यह मानकर चला जाता था कि घर का काम औरतों का होता है । पुरुष का काम बाहर से कमा के लाना होता है । शेष घर परिवार की जिम्मेदारी औरत को निभानी होती है । ऐसा मानने वाले 60% से ज्यादा पुरुष स्त्री थे । समय का चक्र चलता रहा । अब 45% पुरुष मान रहे हैं कि पुरुष को बाहर की जिम्मेदारी के साथ…

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दे माई लोहड़ी , तेरी जीवे जोड़ी

लोहड़ी रिश्तों की मधुरता , भाई चारे , प्रेम और सौहार्द का प्रतीकात्मक त्यौहार है । यह मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है।आज के बाद सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध से उत्तरी गोलार्द्ध में प्रवेश कर जाता है । ठण्ड कड़ाके की होती है । आग जलाकर लोग उस ठण्ड को दूर करते हैं । किसी जनहित वाले जगह पर लोहड़ी के वास्ते लकड़ियाँ , उपले एकत्र किये जाते…

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‘लाइन ऑफ कंट्रोल’

बात बहुत मामूली थी।सबेरे नौ बजे शहर के अहीर टोले का एक लड़का गोपीचंद यादव हमेशा की तरह साइकिल से कॉलेज जा रहा था। बी.ए फाइनल ईयर का छात्र था। रास्ते में मुसलमानों का एक मुहल्ला था दिलावरपुर। दिलावरपुर की एक गली से हाथों में किताबें लिए मलिक सईद नाम की एक लड़की उसी कॉलेज में पैदल जा रही थी। गोपीचंद के ही क्लास की छात्रा थी। गोपीचंद ने आगे-पीछे…

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फितूर होता है हर उम्र में जुदा जुदा (2 )

फिल्म अभिनेत्री तब्बू ने कहा था – ” मेरी जिंदगी में अगर प्यार एक फितूर होता तो चीजें आगे बढ़तीं और मैं अभी तक अकेली नहीं होती ” । प्यार फितूर की तरह लैला मजनूं का था । लैला मजनूं मर गये , मिट गये , पर उनका प्यार अमर हो गया । इश्क इंसान को क्या से क्या बना देता है । इश्क की आग लगाए नहीं लगती और…

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बिरसा मुंडा : आदिवासियों और स्वतंत्रता के महानायक

‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’ यानि ‘हमारा देश, हमारा राज’ “मैं तुम्हें अपने शब्द दिये जा रहा हूं, उसे फेंक मत देना, अपने घर या आंगन में उसे संजोकर रखना। मेरा कहा कभी नहीं मरेगा। उलगुलान! उलगुलान! और ये शब्द मिटाए न जा सकेंगे। ये बढ़ते जाएंगे। बरसात में बढ़ने वाले घास की तरह बढ़ेंगे। तुम सब कभी हिम्मत मत हारना। उलगुलान जारी है।” ये पंक्तियां जेल जाते समय बिरसा ने…

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फितूर होता है हर उम्र में जुदा जुदा ।

फितूर अरबी का शब्द है । फितूर का शाब्दिक मतलब तो पागलपन होता है , पर फितूर रखने वाले को हम पागल नहीं कह सकते । वैसे फितूर रखने वाले लोग जुनूनी होते हैं । वे अपने फितूर के लिए पागलपन की हद तक जा सकते हैं , लेकिन वे पागलपन की हद को पार नहीं करते । वे अपनी हद में रहते हैं । पूरे होशो हवाश में रहते…

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10 जनवरी – आज विश्व हिंदी दिवस

प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी सन् 1975 को नाग पुर में सम्पन्न हुआ था ।यह तारीख महत्वपूर्ण माना गया और 10 जनवरी सन् 2006 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि साल के हर 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाएगा।विश्व हिंदी दिवस दुनियाँ के हर मुल्क में भारतीय दूतावासों में मनाया जाता है । इसका उद्देश्य हिंदी को उसकी अंतराष्ट्रीय पहचान दिलाना है…

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