चिंतन

जीवन रूपी नदी सी लगती है किताब

देश और विदेश के कई फिल्म‌ समारोहों मे अवार्ड लेकर धमाल मचा चुकी फिल्म‌ किताब की स्क्रीनिंग दिल्ली मे 15 मई को फिल्म डिविजन आॅडिटोरियम ,महादेव रोड ,दिल्ली में हुआ । इस मौके पर “गैजेट VS किताब” पर एक परिचर्या भी हुुई जिसमे मुख्य रुप से पद्मभूषण डाॅ. बिन्देश्वर पाठक और मैत्रेयी पुष्पा, उपाध्यक्षा – हिन्दी अकादमी ,दिल्ली सरकार शामिल थी।   इस मौके पर हिन्दी अकादमी कि उपाध्यक्षा मैत्रेयी…

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भोजपुरी के प्रथम आचार्य कवि : पण्डित धरीक्षण मिश्र

साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित विनिबंध ‘भारतीय इतिहास के निर्माता धरीक्षण मिश्र’ में डॉ वेदप्रकाश पाण्डेय जी ‘अपने ‘आचार्यत्व’ खंड में लिखते हैं कि धरीक्षण मिश्र भोजपुरी भाषा और साहित्य के पहले ऐसे समर्थ कवि हैं, जिन्होंने कवि-कर्म के साथ-साथ अलंकार-शास्त्र का प्रणयन किया है। अनेक यशस्वी लेखक और कवि हुए हैं, किन्तु केशवदास जैसा कोई आचार्य कवि नहीं हुआ। इस भाषा में इस आभाव की पूर्ति हुई धरीक्षण मिश्र से। धरीक्षण…

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पथलगड़ी के नाम पर गांव बचाइयेगा या झारखंड को सुलगाइयेगा

नया विवाद पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की के उकसाने वाले बयान के बाद उठ खड़ा हुआ है। बंधु वैसे तो पथलगड़ी की परंपरा को सही साबित करने और इसके खिलाफ मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा जगह-जगह पोस्टर लगाने और विज्ञापन जारी करने के खिलाफ अपना बयान दे रहे थे। मगर बोलते-बोलते या तो बहक गये, या उन्होंने जानबूझकर कह दिया कि काली गाय की बली देना भी हमारी पंरपरा है और…

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उजड़ने की कगार पर तो नहीं पहुंच गया है हजारों साल पुराना सोनपुर मेला?

पिछले तीन-चार साल से मैं लगातार सोनपुर मेला जाता रहा हूं। यह सच है कि इस मेले में भीड़ हमेशा से दो-तीन वजहों से आती रही है। पहला पालतू पशुओं और पक्षियों की खरीद-बिक्री की वजह से, दूसरा इन डांस थियेटरों की वजह से। इन तमाम चीजों में कानून का लोचा रहता है, और इन्हीं कानूनी सख्तियों की वजह से मौर्यकालीन कहा जाने वाला एशिया का यह सबसे बड़ा पशुमेला…

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नज़र उनपर भी कुछ डालो

हमारे पूर्वजों ने दीवाली सहित किसी धार्मिक या लोकपर्व की परिकल्पना करते वक़्त अपने गांवों के कारीगरों, शिल्पियों और कृषकों की रोज़ी-रोटी और सम्मान का पूरा-पूरा ख्याल रखा था। उनके उत्पादों के बिना कोई भी पूजा सफल नहीं मानी जाती थी। औद्योगीकरण के आज के दौर ने बहुत कुछ बदल दिया है। हम भूलते जा रहे हैं कि उजालों के पर्व दीवाली में अपने देश के लाखों लोग ऐसे हैं…

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ज़िंदगी जश्न के सिवा क्या है

किसी हिन्दू या बौद्ध तीर्थ-स्थल पर या हिमालय के किसी एकांत में मोक्ष या निर्वाण के लिए भटकते लोगों की भारी भीड़ क्या आपको हैरान नहीं करती ? ये लोग आवागमन से मुक्त जिस मोक्ष या निर्वाण की खोज में लगे हैं, क्या उसकी कहीं कोई संभावना है भी ? तमाम अस्तित्व, मोह-माया, इच्छाओं और गति से परे अगर कोई मोक्ष है तो वह शून्य की कोई स्थिति ही हो…

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आर्सेनिक क्षेत्रे भृगु क्षेत्रे

बलिया जनपद को भृगु क्षेत्र कहा जाता है , क्योंकि यह जगह कभी भृगु मुनि की तपस्थली थी । आज यह क्षेत्र पूर्ण रुपेण आर्सेनिक क्षेत्र हो गया है । उत्तर प्रदेश जल निगम के सर्वे के अनुसार इस क्षेत्र के बहुत से गांव आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्र में आ गये हैं । यहां कुछ गांवों के नाम दिये जा रहे हैं – क्रम संख्या गांव का नाम पी पी एम…

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अब भी याद आता है वो पंगत में बैठकर भोजन करना ।

पंगत में बैठकर भोजन करने का एक अलग सुख होता है । आप खाते जाइए । परोसने वाले आपको खिलाते जाएंगे । बेशक आप खाते खाते थक जाएंगे , पर खिलाने वाले कत्तई नहीं थकेंगे । हां , अगर आपको किसी विशेष डिश की जरूरत है और वह आपके पास नहीं आ रही है या आप शर्मो हया के चलते मांग नहीं पा रहे हों तो ऐसे में सिर्फ आपको…

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राजनीति तो होती रहेगी सरकार

मध्य प्रदेश के मंदसौर में अपने हक़ की आवाज़ लिए सड़कों पर उतरे किसानों पर गोली चलवाने का आधार ये था कि ये विपक्ष की चाल है। महाराष्ट्र के किसानों की मांग भी तब तक खारिज की गई, जब तक उन्होंने सरकार को बातचीत के लिए मजबूर नहीं कर दिया। हाल के सीकर आंदोलन को भी सरकार इस मुद्दे पर 12 दिनों तक नजरअंदाज करती रही कि इसका नेतृत्व दो…

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पत्थर से दिल लगाया और दिल पे चोट खाई

यह संवेदनहीनता की इन्तेहा ही थी।बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में छेड़खानी की लगातार बढती घटनाओं और इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन की मूढ़ता और उदासीनता से परेशान विश्वविद्यालय की सैकड़ों लडकियां अपनी फ़रियाद सुनाने के लिए विश्वविद्यालय के गेट पर खड़ी दो दिनों के बनारस दौरे पर गए अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री मोदी की बाट जोहती रही। अपने साथ हुए अपमानजनक सलूक के विरोध में कुछ लड़कियों ने अपने…

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