जन सरोकार

हरिहर क्षेत्र का मेला

बिहार के सोनपुर का हरिहर क्षेत्र मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन आरंभ होने वाले इस मेले में बिहार के कोने-कोने से आए लाखों लोग पवित्र गंडक और गंगा नदियों के संगम में स्नान कर स्थानीय हरिहर नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। इस मेले की पृष्ठभूमि में पौराणिक कथा है कि प्राचीन काल में यहां गज और ग्राह के बीच लंबी…

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त्योहारी गुलाब

नवम्बर का महीना उदासियों का महीना रहा है। मन नहीं लगता। गाँव उस घर की तरह लगता है, जिस घर से बेटी विदा हुई हो। आदमी उदास, पेड़ उदास, हवा-पानी उदास… पता नहीं कौन और क्यों घनानंद की कविता गा जाता है। हालाँकि गाँवों के लिए नवम्बर अब बेटियों से अधिक बेटों के विदा होने का महीना हो गया है। नवम्बर के महीने में गाँव की सड़कें शहर की ओर…

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छेना के रसगुल्ले..

दुनियाँ में मधुमेह एक महामारी की तरह फ़ैल रही है. अब तो चित्र में ही रसगुल्ले को देख कर मुँह में पानी लाना है. किसी कवि ने भी खूब कहा है- “उस रसगुल्ले की देहगन्ध इस कायनात में कहीं नहीं.” यह सोचकर बड़ी हैरानी होती है कि क्या रसगुल्ले की वजह से भी कोई नेता अलोकप्रिय हो सकता है? जी हाँ, बात सन् 1965 की है. पश्चिम बंगाल के मुख्य…

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एक था सुल्ताना डाकू !

बचपन में देखी नौटंकियों, नाटकों और फिल्मों के एक बेहद मकबूल क़िरदार सुल्ताना डाकू की याद है आपको ? वह सुल्ताना डाकू जो रॉबिनहुड की तरह अमीरों को लूटता था और गरीबों में लुटाया करता था। नौटंकी की मलिका गुलाब बाई ने उसके नाम पर एक नौटंकी खेलकर पूरे उत्तर भारत में उसे लोकप्रियता दिलाई थी। बचपन में मैं उसपर आधारित नौटंकी का कोई भी शो नहीं छोड़ता था। उसके…

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यात्री गण कृपया ध्यान दें…

सरला चौधरी के पिता रेलवे कर्मचारी थे। सभी रेलवे स्टेशनों को एक सर्कुलर जारी किया गया था कि हर स्टेशन पर एक उद्घघोषक की अस्थाई (तीन माह) नियुक्ति की जाएगी। यह नियुक्ति केवल रेलवे कर्मियों के बच्चों के लिए थी। सरला चौधरी ने अपने पिता के कहने पर फार्म भर दिया। उन्होंने सोचा कि कुछ न होगा तो तजुरबा ही होगा। आवाज की जांच में सरला चौधरी पास कर गयीं।…

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पानी रे पानी !

पटना का जलप्रलय प्राकृतिक या दैवी नहीं, मानव-निर्मित आपदा है। यह समस्या कमोबेश हर साल सामने आती है। शहरीकरण की आपाधापी में हम सबने प्रकृति के साथ सामंजस्य की अपनी प्राचीन कला भुला दी है। ऋतुचक्र है तो बारिश होगी ही। कभी कम और कभी ज्यादा। अतिवृष्टि की समस्या से निबटने के लिए पहले हर शहर और गांव में जलाशय और कुएं हुआ करते थे। बारिश के अतिरिक्त पानी को…

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न जाने यह चाइनीज अफीम का नशा कब उतरेगा ?

हमारा चन्द्रयान मिशन अपने लक्ष्य से भटक गया है, तो हमारे ही देश के कुछ रहमान, फारुख, खान और बनर्जी इस बात का जश्न मना रहे हैं। हमारे देश के भीतर ही अघोषित रूप से एक दूसरा देश रहता है जो हमारी असफलताओं पर जश्न मनाता है, खुश होता है। ये वही लोग हैं जो देश के पूर्व प्रधानमंत्री की मृत्यु पर उन्हें गाली देते हैं, प्रधानमंत्री की मृत्यु के…

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अपनी पृथ्वी की चिंता करें और चांद को उसके हाल पर छोड़ दें: ध्रुव गुप्त

चंद्रयान-दो की चांद की सतह के बिल्कुल पास पहुंचकर आख़िरी पलों में उसे छू न पाने की असफलता कोई बड़ा मसला नहीं है।इश्क़ की तरह विज्ञान भी ऐसी कई असफल कोशिशों से ही मंज़िल तक पहुंचता है। हमारे वैज्ञानिक सक्षम हैं और भविष्य में वे चांद ही नहीं, और कई-कई ग्रहों-उपग्रहों तक पहुंच सकते हैं। सवाल इतना भर है कि चांद पर पहुंचकर हम हासिल क्या करेंगे ? यह संतोष…

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क्या अब फेसबुक फ्री नहीं रहेगा ?

        सोशल मिडिया Facebook ने होम पेज पर एक बदलाव किया है। फेसबुक के होम पर Create Account के नीचे एक टैगलाइन लिखी होती है। अब से पहले ये टैगलाइन थी – It’s free and always will be। मतलब ये कि फेसबुक फ्री है और हमेशा रहेगा, लेकिन अब इसे हटा लिया गया है। तो अब क्या माना जाय की फेसबुक फ्री नहीं रहेगा? Facebook ने पुराने…

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40 में 39 फिर भी बदहाल बिहार

मित्रों, अगर हम २००५ से २०१० के कालखंड को अलग कर दें तो बिहार में २०१० से ही जंगलराज पार्ट २ चल रहा है. बीच में जब २०१४ का लोकसभा चुनाव आया तब बिहारियों के मन में जरूर लड्डू फूटने लगे. खुद प्रधानमंत्री के उम्मीदवार ने वादा किया था कि अब बिहारियों को बिहार से बाहर जाकर काम करने की जरुरत नहीं होगी क्योंकि वे चाहते हैं कि भारत का…

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