मंथन

समुद्र-मंथन : भारत का पहला श्रमिक विद्रोह !

ऐसा नहीं है कि हमारे देश में इतिहास लेखन की परंपरा नहीं रही है। हुआ यह है कि घटनाओं को चमत्कारिक रूप देने, अपने आश्रयदाता राजाओं या सामंतों को अतिमानव सिद्ध करने और शत्रुओं को निकृष्ट तथा अमानवीय दिखाने की कोशिश में इतिहास को तोड़ मरोड़कर ऐसे प्रस्तुत किया गया कि तर्क और विवेक की कसौटी पर वह कपोल कल्पनासे ज्यादा कुछ नहीं लगता। हमारे पुराण वस्तुतः इतिहास ही हैं।…

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सतबहना ।

satbahnaसत बहना नाम तो इन्हें अंग्रेजी में दिया गया है, क्योंकि ग्रे रंग की ये चिड़िया हमेशा छः से ज्यादा के झुण्ड में रहती है । चंबल में इन्हें सतबहना के नाम से ही जाना जाता है। जबकि इनका जूलॉजिकल नाम ग्रे बेबलर है। इनकी चहचहाहट से चंबल की घाटी गूंजती है। इन सात चिड़ियों के झुंड चंबल के किनारे जल-किलोल भी करते देखे जाते हैं। जबकि देवरी के डॉल्फिन-घड़ियाल…

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महिला बैंक लोन वसूली गैंग ।

जी हाँ , पुरुषों द्वारा किये जाने वाला यह काम महिलाएं अब बेहतर ढंग से कर रहीं हैं । रिकवरी एजेंट हट्टे कट्ठे लोग हुआ करते थे । लेकिन एक रिकवरी एजेंसी ने एजेंट के रूप में चन्द्र बदना मृगलोचना जैसी हसीन लड़कियों का एक ग्रुप तैयार किया है । इन नाजुक और खूबसूरत हसीनों के इरादे काफी सख्त होते हैं । सिर्फ बैंकों के लिए रिकवरी का काम करने…

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रूखा-सूखा, फिर भी वसंत !

वसंत प्रेम और रूमान का मौसम है। यह वह मौसम है जब प्रकृति का सौन्दर्य अपने शबाब पर होता है। प्रकृति में जब नवयौवन उतर आए तो प्रकृति की संतानें वसंत के राग से कैसे बची रह सकती है ? मान्यता है कि वसंत में लगभग सभी जीवित प्राणियों में कुछ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं। यह परिवर्तन सबसे ज्यादा पक्षियों और मनुष्यों में होता है। शुरुआत करते…

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बिरसा मुंडा : आदिवासियों और स्वतंत्रता के महानायक

‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’ यानि ‘हमारा देश, हमारा राज’ “मैं तुम्हें अपने शब्द दिये जा रहा हूं, उसे फेंक मत देना, अपने घर या आंगन में उसे संजोकर रखना। मेरा कहा कभी नहीं मरेगा। उलगुलान! उलगुलान! और ये शब्द मिटाए न जा सकेंगे। ये बढ़ते जाएंगे। बरसात में बढ़ने वाले घास की तरह बढ़ेंगे। तुम सब कभी हिम्मत मत हारना। उलगुलान जारी है।” ये पंक्तियां जेल जाते समय बिरसा ने…

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फितूर होता है हर उम्र में जुदा जुदा ।

फितूर अरबी का शब्द है । फितूर का शाब्दिक मतलब तो पागलपन होता है , पर फितूर रखने वाले को हम पागल नहीं कह सकते । वैसे फितूर रखने वाले लोग जुनूनी होते हैं । वे अपने फितूर के लिए पागलपन की हद तक जा सकते हैं , लेकिन वे पागलपन की हद को पार नहीं करते । वे अपनी हद में रहते हैं । पूरे होशो हवाश में रहते…

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लोग क्या कहेंगे ?

आजकल की सबसे बड़ी बीमारी है – लोग क्या कहेंगे ? यह वाक्य हमारे जेहन में इस तरह रच बस गया है कि इसे निकालना नितांत हीं मुश्किल है । आपने वह मशहूर कहानी जरुर सुनी होगी जिसमें बाप बेटे एक गधे के साथ सफर कर रहे होते हैं । लोगों के कहने पर कभी बाप गधे पर बैठा तो कभी बेटा । कभी दोनों एक साथ बैठे । फिर…

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गाँव उजड़ा – इज़्ज़त व सम्मान के वास्ते

बात सन् 1825 की है । जैसलमेर से 18 km दूर एक गाँव होता था । गाँव का नाम कुलधारा था । इस गाँव में पालीवाल ब्राह्मणों का निवास था । ये किसानी के साथ साथ भवन निर्माण की कला में भी पारंगत थे । जैसलमेर राजघराने को सबसे ज्यादा राजस्व इसी गाँव से मिलता था ।सब कुछ शांति से गुजर रहा था कि अचानक इस गाँव की शांति को…

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द्वितीय विश्व युद्ध की भारतीय मूल की महिला जासूस – नूर इनायत खान

नूर इनायत खान का जन्म 1 जनवरी सन् 1914 को मास्को में हुआ था । उनके पिता हज़रत इनायत खान टीपू सुल्तान के पड़पोते और माँ एक अमरीकी महिला थीं । पिता सूफी परम्परा के फ़क़ीर थे और विदेशों में सूफी सम्प्रदाय के प्रचार प्रसार के लिए गए थे । नूर इनायत खान का परिवार बाद में रूस छोड़ इग्लैंड होता हुआ फ़्रांस में जाकर बस गया था । नूर…

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घूम रहे विषधर बस्ती में , देखो कहीं सपेरा है क्या ?

श्याम सखा के इस शेर में सपेरे की ढूंढ तो आस्तीन के साँप को पकड़ने के लिए की जा रही है । आज तक आस्तीन के साँप को कोई सपेरा नहीं पकड़ सका है ।आस्तीन के साँप का काटा आदमी तो पानी भी नहीं माँगता । इसलिए हम न तो इस साँप की बात करेंगे और इनको न पकड़ पाने वाले सपेरों की बात करेंगें । आज हम उन सपेरों…

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