युवा अभिव्यक्ति

गरीब लोगों का अमीर देश बनता भारत

कहा यह जाता है कि इंग्लैंड में शुरू हुई पहली औद्योगिक क्रांति के दौरान कोयले और स्टीम की शक्ति का इस्तेमाल किया गया और इस क्रांति के कारण शक्ति का केंद्र यूरोप की तरफ झुक रहा| इतिहास से यह भी ज्ञात होता है कि इससे पहले 17वीं शताब्दी तक भारत और चीन को सबसे धनी देशों में गिना जाता था| दूसरी औद्योगिक क्रांति के दौरान बिजली और ईंधन का इस्तेमाल…

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अश्लीलता के खिलाफ हो रहे विरोध ब्राम्हणवादी एप्रोच नहीं बल्कि एक संघर्ष है

वैसे तो भोजपुरी में फ़ैल रहे अश्लीलता के विरोध में काफी लम्बे समय से संघर्ष चल रहा है| लेकिन हाल के दिनों में यह मामला काफी जोर पकड़ चुका है| तमाम लोग खुल के सामने आ रहे है और अपने-अपने पक्ष को लिख रहे है| इसका एक माध्यम लल्लनटॉप बना है| लेख और विडियो के माध्यम से पक्ष और विपक्ष काफी जोरों पर है| इस बार केंद्र में भोजपुरी गायिका…

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भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का भविष्य

भारत सरकार द्वारा एक दिशा-निर्देश दिया गया है जिसमे यह कहा गया है कि 2030 के बाद सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ ही बेचीं जाएंगी| ऑटोमोटिव इंडस्ट्रीज में एकदम से खलबली मची है| सब अपने अपने रास्ते अख्तियार कर रहे है जिससे वो आगे की रोड मैप तैयार कर सके| ऑटोमोटिव इंडस्ट्रीज का ध्यान सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जा टिका है| ऐसे में बहुत सारे सवाल खड़े हो…

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हिन्दी साहित्य और गधावाद

देश के घोषित और पोषित साहित्यकारों ने एक बार फिर गधे को विमर्श के केंद्र में ला दिया है। अब इसे स्वनामधन्य साहित्यकारों की बौद्धिकता समझें या गदहपन, पर विमर्श को ऊंची अट्टालिकाओं से खींच कर गधे के पांव में लाना उन्हें नमन के योग्य बनाता है। बहुत पहले हिन्दी के जनवादी शायर अदम गोंडवी ने कहा था- जो ग़ज़ल मासूक के जलवों से वाकिफ हो गयी, उसको अब बेवा…

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अजी छोड़िए वामपंथ-दक्षिणपंथ, आइए एक ‘देवता’ से मिलते हैं

जिस दौर में लाशों को भी वेंटीलेटर पर रखकर बिल भुनाने से कई डॉक्टर नहीं चूकते, उस दौर में इस देवतुल्य चिकित्सक की कहानी दिल को गदगद कर देती है। जब तमाम डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ प्राइवेट प्रैक्टिस से करोड़ों का अस्पताल खोलना फायदेमंद समझते हैं, तब बीएचयू के प्रख्यात कार्डियोलाजिस्ट पद्मश्री प्रो. डॉ. टी के लहरी साहब अद्भुत हैं। आप हैरत में पड़ेंगे। मेडिकल कॉलेज में तीन दशक की…

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कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना

तब सरकार राजीव गांधी की थी। रेल मंत्री थे ग्वालियर के महाराजा माधवराव सिंधिया। 1986 से 1989 के बीच गजब का काम किया रेलवे में। हुलिया बदलकर रख दिया। उस समय भारतीय रेल का आधुनिकीकरण और कम्प्यूटराइजेशन संभव हुआ तो वह सिंधिया के विजन की बदौलत। सिंधिया सपने देखते थे। उसे धरातल पर उतारने के लिए बेचैन हो उठते थे। एक तो राजा थे, दूसरे रेल मंत्री। मगर, सफर करना…

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म्यांमार में “मुस्लिम” बनाम “बौध” की लड़ाई में भारत का हस्तक्षेप बेहद जरूरी

अभी दो दिन पहले मैंने रोहिंग्या मुस्लिम की समस्याओं को लेकर एक छोटा सा लेख लिखा था| मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मेराकिसी वैचारिक असहमति का सामना होता है| मुझे थोड़े थ्रस्ट मिले जरूर थे लेकिन मैंने यह समझा कि शायद अपनी पूरी बात नहीं कह पा रहा हूँ| उसी लेख पर अपनी पूरी बातें कहूँगा|सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि म्यांमार किस प्रकार का देश है| यह…

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ब्रिक्स सम्मेलन-मोदी ने अलग से उठाया आतंकवाद का मुद्दा, बोले – शांति के लिए सहयोग जरूरी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीन में हैं। पीएम ने ब्रिक्स बैठक में बोलते हुए कहा कि सभी देशों में शांति के लिए ब्रिक्स देशों का एकजुट रहना जरूरी है। इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम मोदी का औपचारिक स्वागत किया। ये जान ले कि ये ब्रिक्स का 9वां सम्मेलन है। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका देश शामिल हैं।…

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दशकों से उपेक्षित रहे ‘चकमा’आदिवासीयों के साथ हो रहे जातिगत भेदभाव

टीआरपी की चकाचौंध में बहुत सी ऐसी जरूरी ख़बरें और मुद्दे चर्चा से अछूते रह जाते है| पिछले महीने उत्तरपूर्व के मिजोरम में वहाँ की सरकार ने ‘चकमा छात्रों’ की मेडिकल की सीटें रद्द कर दी|AICSU(आल इंडिया चकमा स्टूडेंट यूनियन) ने मिजोरम के मुख्यमंत्री लाल थान्हावाले से आग्रह किया कि उन्हें शोषित न किया जाए और नाही उनके साथ जातिगत भेदभाव किया जाए| 38 छात्रों में से चारचकमा छात्रों ने…

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यातायात की रीढ़ की हड्डी कहलाने वाली रेलवे का यह कैसा मजाक है ?

भारतीय रेल के बारें में बहुत सारी बातें होती रही है|नए ट्रेन के लांच होने पर उसके इंटीरियर का फोटो अक्सर इन्टरनेट पर दिखता ही रहता है|साधारणतः रेलवे स्टेशन पर वैसा ट्रेन देखने को नहीं मिलता है|हमारे रेलवे मंत्री श्री सुरेश प्रभु के कागजी प्लान हमें बहुत चमकता सा दिखता है, लेकिन वास्तविकता बहुत अलग है|अखबारी अनुभव, सरकारी रिपोर्ट्स के साथ साथ व्यक्तिगत अनुभव भी है जिसे साझा करना जरूरी…

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