युवा अभिव्यक्ति

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा

यह बात पापा ने नहीं, चाचा ने कही थी। चाचा थे नासिर हुसैन। हुआ यह कि जावेद अख्तर नासिर हुसैन से मिलने उनके सेट पर पहुँचे थे। उन्होंने देखा कि एक लाल गालों वाला लड़का सेट पर काफी एक्टिव हो इधर—उधर निर्देश देता फिर रहा है। पता चला कि इस लड़के का नाम आमिर खान है। यह नासिर का भतीजा और उनका इस फिल्म में सहायक है। जावेद ने छूटते…

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घर के बुजुर्ग जैसे अमिताभ

जिसके लिए बचपन से सिनेमा का मतलब ही ‘अमता बचन’ हो उसके लिए अमिताभ बच्चन को दादा साहेब फाल्के अवार्ड मिलना व्यतिगत उपलब्धि जैसी है। हाँ! अमिताभ को दादा साहेब फाल्के अवार्ड मिलना मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि है। अमिताभ मुझे अपने घर के बुजुर्ग जैसे लगते हैं। सिनेमा जगत से हमें असंख्य शिकायतें हो सकती हैं, पर हम इस सत्य से असहमत नहीं हो सकते कि आज के समय में देश…

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खूबसूरत लोकतंत्र बनाम अज्ञानता…

देश मे मंदी आ रही है, फेसबुक पर लोग बेचैन है। धड़ाधड़ लेख लिखे जा रहे हैं। सरकार की गलत नीतियों की आलोचना हो रही है। लोग सजग हैं। कुछ दिनों पूर्व मुझे एक कार्यक्रम में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। विषय था, “गरीबी कैसे मिटायें।” दुर्भाग्य से उस दिन मेरी साइकिल पंचर हो गयी और मेरे पास उसे ठीक कराने के पैसे नहीं थे। हम नहीं जा…

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नवम्बर में होगा पहले चम्पारण शार्ट फ़िल्म फेस्टिवल का आयोजन

फिल्मेनिया एंटरटेनमेंट के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में फिल्मेनिया टीम व दिल्ली की मीडिया कंपनी हर्फ़ मीडिया और कंसेंट एलिवेटर्स के संयुक्त रूप से पहले चम्पारण शार्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करने जा रही है।ज्ञात हो कि फिल्मेनिया एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी शार्ट फिल्म्स पिछले चार सालों से नेशनल और अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में धूम मचा रही है. बैनर की पिछली शार्ट फिल्म ककक-किरण नाइजीरिया और लॉस…

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नाथूराम गोडसे और हिन्दू आतंकवादी!!

हाँ तो पहले यह बता दूँ कि अपने असंख्य मित्रों से असहमति के बाद भी महात्मा गाँधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे को अपराधी मानता हूँ। यह मेरा व्यक्तिगत विचार है, और इसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा। पर रुकिये। आप जो नाथूराम गोडसे को पहला आतंकवादी कह रहे हैं न, तो आपकी औकात नहीं है यह कहने की… महात्मा गाँधी की हत्या के साल भर पहले भारत का विभाजन…

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आखिर क्यों देखे फिल्म “मणिकर्णिका”……

कंगना राणावत की फ़िल्म “मणिकर्णिका”!  सच कहें तो ‘महारानी झाँसी’ जैसे चरित्र को परदे पर उतारना बड़ा कठिन कार्य है। धन्यवाद के पात्र हैं वे लोग जिन्होंने यह फ़िल्म बनाने की सोची। देखी जानी चाहिए यह फ़िल्म, ताकि समझ सकें हम अपने इतिहास को… मणिकर्णिका देखिये, ताकि आप जान सकें कि भारत की पवित्र भूमि ने कैसी-कैसी बेटियों को जन्म दिया है। मणिकर्णिका देखिये, ताकि भविष्य में जब कोई मूर्ख…

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सर्व भाषा ट्रस्ट का प्रथम वार्षिकोत्सव सम्पन्न

भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए समर्पित संस्था सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में प्रथम वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया।अपने स्वागत भाषण में सर्व भाषा ट्रस्ट की परिकल्पना और उसकी योजनाओं पर अध्यक्ष अशोक लव ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आगामी योजनाओं की भी चर्चा की। सचिव रीता मिश्रा व समन्वयक केशव मोहन पाण्डेय ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि…

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फाहित्य…

राहुल जी ने सदन में आँख मार कर भारतीय लोकतंत्र को एक नई दिशा दी है। वैसे यह भी एक सच्चाई है कि भारत की संसद में मारने के लिए केवल यही एक “आँख’ ही बची थी, सदन ने देश का शेष सब कुछ तो बहुत पहले ही मार दिया था। कुछ दिन पूर्व एक नवोदित अभिनेत्री ने आँख मार कर देश का दिल लूटा था, आज राहुल जी ने आँख…

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फिर एक कहानी और श्रीमुख “रहस्य”

27 जनवरी सन 1556 ई. लगभग एक तिहाई भारत पर शासन कर रहा हुमायूँ अपने सबसे विश्वासपात्र सेवक बैरम खाँ की बलिष्ठ जंघा पर सर रखे अंतिम साँसे गिन रहा था। हुमायूँ और बैरम दोनों की आँखों में जल भर आया था। अपनी अनियंत्रित उल्टी साँसों से लड़ते हुए हुमायूँ ने बैरम खाँ की ओर एक निरीह दृष्टि डाल कर कहा- कुछ कहूँ तो मानोगे बैरम? बैरम खाँ ने रोते…

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गरीब लोगों का अमीर देश बनता भारत

कहा यह जाता है कि इंग्लैंड में शुरू हुई पहली औद्योगिक क्रांति के दौरान कोयले और स्टीम की शक्ति का इस्तेमाल किया गया और इस क्रांति के कारण शक्ति का केंद्र यूरोप की तरफ झुक रहा| इतिहास से यह भी ज्ञात होता है कि इससे पहले 17वीं शताब्दी तक भारत और चीन को सबसे धनी देशों में गिना जाता था| दूसरी औद्योगिक क्रांति के दौरान बिजली और ईंधन का इस्तेमाल…

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