रचना क्रम में

आज ख़ुद को गुलाब करते हैं !

वसंत की आहट के साथ अभी पश्चिम से आयातित ‘वैलेंटाइन सप्ताह’ की शुरुआत हो रही है ! हमारे देश में इस सप्ताह का विरोध इस आधार पर होता रहा है कि प्रेम की यह अभिव्यक्ति हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। ऐसा तर्क प्रेम से वंचित अभागे लोग ही दे सकते हैं। जिस संस्कृति में प्रेम नहीं उसे अपसंस्कृति कहा जाना चाहिए। प्रेम का कोई मौका विदेशी ही सही, नफ़रतों…

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अगला लोसर मनाएं ल्हासा में ।

वह मुझे श्रीनगर में मिली थी । फुटपाथ पर तिब्बती सामान बेच रही थी । मैंने मजाक में पूछा – “तिब्बत कब जा रही हो ?” उसके चेहरे पर सख्त भाव आ गये थे । मुंह लाल हो गया था । उसने बात को चबाते हुए कहा था – “हम अगला लोसर ल्हासा में मनाएंगे ।” उस दिन के बाद से हमारी उसकी कई बार मुलाकात हुई , पर मैंने…

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ततैया बैरी खा गयी रे !

कल रात की सुबह मैंने सपना देखा । ततैया मेरे सपने में आई । सुबह के वक्त नींद नहीं तंद्रा होती है । इसलिए मैं जान गया कि यह सपना है । सपने में ततैया का आना अशुभ माना जाता है । सपना देखने वाले के दुर्दिन आ जाते हैं । मैंने ततैया को डपटते हुए कहा – “तुम्हें मेरे सपने में नहीं आना चाहिए । तुम अशुभ हो “।…

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कोई सूरत नजर नहीं आती ।

जब गाड़ियों का हुजुम एक साथ खड़ा हो जाता है जो हरकत करने में असमर्थ होता है या मंथर गति से रेंगता है तो इस क्रिया को जाम लगना कहा जाता है । जाम दिन प्रतिदिन लगता है । आज की तारीख में कोई भी शहर इससे अछूता नहीं है । किसी भी शहर में अब कोई ऐसी सड़क नहीं बची है जिस पर गाड़ियां फर्राटे से दौड़ सकें ।…

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प्रथमे ग्रासे मक्षिका पातः ।

चांद सी महबूबा हो …. सबका एक सपना होता था । जब मानव चांद पर पहुंचा तो उसे पता चला कि चांद तो केवल पत्थरों पहाड़ों से बना है । वहां हरियाली तो रंच मात्र भी नहीं है । उससे लाख गुना तो अच्छी हमारी पृथ्वी है , जो हरी भरी तो है । लाखों लोगों का चांद को लेकर सोचा सपना चूर चूर हो गया । बहुत शोर सुनते…

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यूं भी तो आराम बहुत है ।

श्लोथ एक आराम तलब जानवर है । दिन भर पेड़ पर टंगा रहता है । बहुत कम नीचे उतरता है । जब जमीन पर उतरता है तो इसकी शामत आ जाती है । एक घंटे में मात्र साढ़े छः फीट हीं चल पाता है । इसी आलसीपने की वजह से यह मांसाहारी जानवरों का आसानी से ग्रास बन जाता है । अगर आप सोचते होंगे कि श्लोथ को आलसीपने की…

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अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का ।

प्रमिला से मेरी मुलाकात फिल्मी स्टाइल में हुई थी । वह घग्घर नदी के किनारे पैरापेट पर अपनी सहेलियों के साथ बैठी हुई थी । अचानक सब ने धींगा मुश्ती शुरू कर दी । एक दूसरे को छेड़ने के उपक्रम में प्रमिला सीधे घग्घर नदी में जा गिरी । सहेलियां कुछ कर नहीं सकीं । वे ” बचाओ बचाओ ” की आवाजें लगाने लगीं थीं । मैंने आव ताव नहीं…

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तमिल भाषी रांगेय राघव बने हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार

रांगेय राघव का पूरा नाम तिरू मल्लई नम्बकम बीर राघव आचार्य था । इनके पूर्वज तिरुपति बाला जी मन्दिर में पुजारी थे , जिनकी विद्वता से प्रभावित हो राजस्थान राजघराने द्वारा इन्हें राजस्थान के मन्दिरों में पूजा के लिए आमन्त्रित किया गया था । कालांतर में रांगेय राघव के पिता आगरा चले गए थे । यहीं पर रांगेय राघव का जन्म 17 जनवरी सन् 1923 को हुआ । हिंदी साहित्य…

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मकर संक्रांति – स्नान और दान का पर्व .

मकर संक्रांति के दिन हीं सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और दक्षिणायन से यह उत्तरायण में होता है । सूर्य का उत्तरायण होना मोक्ष प्रदान करने वाला होता है । आज के दिन के इंतज़ार में हीं भीष्म छः माह तक शर सैय्या पर पड़े रहे और सूर्य के उत्तरायण होते हीं अपने प्राण त्याग दिए थे । कहा जाता है कि मकर संक्रांति के…

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दे माई लोहड़ी , तेरी जीवे जोड़ी

लोहड़ी रिश्तों की मधुरता , भाई चारे , प्रेम और सौहार्द का प्रतीकात्मक त्यौहार है । यह मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है।आज के बाद सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध से उत्तरी गोलार्द्ध में प्रवेश कर जाता है । ठण्ड कड़ाके की होती है । आग जलाकर लोग उस ठण्ड को दूर करते हैं । किसी जनहित वाले जगह पर लोहड़ी के वास्ते लकड़ियाँ , उपले एकत्र किये जाते…

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