समय सरोकार

आओ तुम्हें मैं प्यार सिखा दूं

बसंत और वैलेंटाइन डे की आहट के साथ फेसबुक के कुछ कमउम्र लड़के इन दिनों मुझसे प्रेम में सफलता के टिप्स मांगने लगे हैं। पता नहीं किस वजह या एंगल से युवा दोस्तों को मुझमें अपना लव गुरु नज़र आता है। हमारे ज़माने में प्रेम ज्यादातर एकतरफ़ा ही हुआ करता था। किसी को मन ही मन चाहो, उसके सपने देखो, उसकी गलियों के चक्कर मारो, उसकी याद में फिल्मी गाने…

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बनारस की कचौड़ी गली

विश्वनाथ मंदिर की गली विश्वनाथ गली कहलाती है। विश्वनाथ गली चलते—चलते अचानक कचौड़ी गली में बदल जाती है। कचौड़ी गली विश्वनाथ मंदिर और मणिकर्णिका घाट के बीच पड़ती है। विश्वनाथ बाबा के दर्शन करने वाले और मणिकर्णिका घाट से आने वाले हर आदमी इस कचौड़ी गली में आता है नाश्ता करने के लिए। कचौड़ी गली कभी अजायब गली (कूचा ए अजायब) के नाम से मशहूर थी। अजायब मुगलकालीन एक सरकारी…

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गढ़ तो आया, पर सिंह चला गया…

चौड़ी छाती, शेर की तरह मजबूत भुजाएँ, हवा की तरह लहराती चौड़ी तलवार, आसमान में उड़ता लाल रक्त और नभ में लहराता भगवा… फिल्में जब अपनी मिट्टी के योद्धाओं की अतुल्य वीरता पर बनती हैं तो दर्शक केवल देखता ही नहीं, उस शौर्य को जीता है। तान्हाजी ऐसी ही फ़िल्म है, जिसमें हम मराठों के शौर्य को जीते हैं, ‘जय भवानी’ के उद्घोष को महसूस करते हैं। भारत के इतिहास…

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नागरिकता संशोधन कानून का विरोध क्यों ?

नागरिकता संशोधन कानून के देशव्यापी विरोध के बीच सरकार के समर्थक मित्र निरंतर यह सवाल कर रहे हैं कि जब देश के प्रधानमंत्री ने साफ़ कर दिया है कि सरकार की देश में एन.आर.सी लाने की कोई योजना नहीं है तो मानवीयता के हित में संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन कानून के विरोध का क्या औचित्य है ? उनकी सोच है कि इसके विरोध में खड़े लोगों ने इसे समझा…

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नये साल पर धर्मयोद्धाओं को नमन

नए वर्ष का स्वागत करने के साथ नमन उन योद्धाओं को, जिनकी कठिन तपस्या के फलस्वरूप पिछले वर्ष लगभग पाँच सौ वर्षों के बाद हमारी धर्मभूमि अयोध्या को मुस्कुराने का अवसर मिला था। मन्दिर के भव्य शिखर पर चमकते स्वर्ण कलश की आभा में खो जाने वाले श्रद्धालु सदैव भूल जाते हैं उन महान हाथों को, जिनके द्वारा नींव के पत्थर जोड़े गए थे। आज उन्ही महान हाथ वाले धर्मयोद्धाओं…

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यशस्वी वर्ष रहा 2019

स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे यशस्वी वर्ष 2019 विदा हो रहा है। भारतीय स्वाभिमान के पुनरुत्थान का वर्ष, जिसमें भारत के माथे पर लगे ‘धारा तीन सौ सत्तर’ जैसे कोढ़ के दाग पोंछ दिए गए, और वर्ष के अंत में पाकिस्तान और बंग्लादेश के उन असँख्य हिन्दुओं को उनका वह अधिकार देने का प्रयास किया गया जो लापरवाह भारतीय राजनीतिज्ञों की अकर्मण्यता के कारण उन्हें अबतक नहीं मिल पाया…

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एक विरोध ऐसा भी!

ज़रूरी नहीं कि किसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए कानून को धत्ता बताकर पथराव और आगजनी का ही सहारा लिया जाय। अपना प्रतिरोध दर्ज़ कराने के बहुत सारे खूबसूरत और ज्यादा कारगर तरीके भी हैं। ऐसा ही एक तरीका परसो आई.आई.एम, बेंगलुरू में देखने को मिला। वहां के अध्यापक और छात्र नागरिकता संशोधन कानून और एन.आर.सी के विरोध में एकत्र थे। पुलिस उनके सामने थी। पुलिस ने उन्हें…

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एनकाउंटर के बाद?

हैदराबाद में एक महिला चिकित्सक के साथ सामूहिक बलात्कार कर उसे जिन्दा जला देने वाले चारों आरोपियों के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने की खबर से देश में संतोष और उत्साह की लहर है। पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश में आरोपियों के साथ हुई यह मुठभेड़ कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार सही है या पुलिस द्वारा भावावेश में लिया गया कोई फैसला, इसपर बहस होगी और जांच दल भी…

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कैसे बचेंगी हमारी बेटियां ?

अभी तेलंगाना में जिस तरह डॉ. प्रियंका रेड्डी के साथ कुछ अपराधियों ने सामूहिक दुष्कर्म कर उसे जिंदा जला दिया, उससे पूरा देश सदमे में है। हाल के वर्षों में ऐसी असंख्य लोमहर्षक ख़बरों के साथ जीने को हम अभिशप्त रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम यौन मनोरोगियों के देश में हैं जिसमें रहने वाली समूची स्त्री जाति के अस्तित्व और अस्मिता पर घोर संकट उपस्थित है। आज…

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बीएचयू का विवाद सांस्कृतिक आक्रमण

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय को लेकर छिड़े विवाद में यह समझना सबसे आवश्यक है कि प्रो. खान की नियुक्ति केवल संस्कृत पढ़ाने के लिए नहीं हुई है। उनकी नियुक्ति ‘संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय’ में हुई है। वह संकाय जिसमें धर्म पढ़ाया जाता है। हिन्दू विश्वविद्यालय में संस्कृत के दो संकाय हैं। एक वह जिसमें संस्कृत भाषा पढ़ाई जाती है, दूसरा संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, जिसमें वैदिक संस्कार सिखाये जाते…

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