सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगी ऐतिहासिक कावेरी जल विवाद पर फैसला

दशकों से चले आ रहे कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को फैसला सुनाएगा। कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर मुख्य तौर पर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद है। कावेरी नदी कर्नाटक के कोडागु जिले से निकलती हैं और तमिलनाडु के पूमपुहार में बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है। सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच फैसला सुनाएगी।

दो दशक पुराने कावेरी जल विवाद पर 2007 में सीडब्ल्यूडीटी ने कावेरी बेसिन में जल की उपलब्धता को देखते हुए एकमत से निर्णय दिया था। फैसले में तमिलनाडु को 419 टीएमसी फुट (हजार मिलियन क्यूबिक फुट) पानी आवंटित किया गया, जबकि कर्नाटक को 270 टीएमसी फुट, केरल को 30 टीएमसी फुट और पुडुचेरी को सात टीएमसी फुट पानी आवंटित किया गया था। शीर्ष अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इसके फैसले के बाद ही कोई पक्ष कावेरी से जुड़े मामले पर गौर कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला दिए जाने की संभावना को देखते हुए बेंगलुरु में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस आयुक्त टी सुनील कुमार के मुताबिक, 15 हजार पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा। इसके अलावा कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस के कर्मी और अन्य सुरक्षा बलों को भी तैनात किया जाएगा। आयुक्त ने कहा कि ‘विशेष ध्यान संवेदनशील इलाकों पर दिया जाएगा, जहां पहले दंगे हो चुके हैं। कर्नाटक दावा करता रहा है कि कृष्णराज सागर बांध में सिर्फ उतना पानी है जो केवल बेंगलुरु की आवश्यकता को पूरी करता है।’

आपको बता दे कि तीनों राज्यों ने कावेरी जल विवाद अधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) के फैसले के खिलाफ कर्नाटक, तमिलनाडु, और केरल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 20 सितंबर 2017 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। खंडपीठ ने इस पूरे मामले में टिप्पणी की थी कि पिछले दो दशकों में काफा भम्र की स्थिति रही है।

केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों के बीच बढ़ते जल विवादों को देखते हुए अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक को संसद में फिर पेश करेगी। इसमें अधिकरणों के अध्यक्षों, उपअध्यक्षों की आयु और निर्णय देने की समय सीमा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। विधेयक को जल्द ही कैबिनेट में मंजूरीके लिए पेश किया जाएगा।

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