मोटापे को कोसते हो बार बार किसलिए ?

एक खबर पढ़ रहा था । प्रशांत क्षेत्र में एक जगह है टोंगा । यहां की 40% आबादी को डायबिटीज है । वजह है मोटापा । लोग खूब खाते हैं । अपने वजन में खूब इजाफा करते हैं । कहते हैं कि वहां की सरकार इस वजह से बहुत परेशान है । सरकार के बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा मोटापा जनित रोगों के दवा दारु में चला जाता है । वैसे मोटापा एक वरदान है । जो जी में आए खा लो पी लो । जिंदगी में कोई मलाल न रह जाए । एक दिन तो सबको जाना है । मोटे लोगों को मौत भी कोई ज्यादा तकलीफ नहीं देती । वे मरते हैं तो चलते फिरते मरते हैं । औरों की तरह विस्तर पर पड़े पड़े नहीं । एक हिचकी आती है और वीमार -ए- गम का फैसला हो जाता है । ऐसी मौत शान की मौत कहलाती है । न खुद को होती है तकलीफ और न औरों को देते हैं वे तकलीफ । वे जिस शान से आए थे उसी शान से चल पड़ते हैं ।

कहते हैं प्रगति अच्छी होती है । जब एक शख्स प्रगति कर रहा है , अपना वजन बढ़ा रहा है तो किसी को बुरा क्यों लगता है ? वो खा रहा है अपने घर का । खर्च होते हैं उसके अपने दाम । फिर किसी और को जलन क्यों होती है ? ठीक हीं कहा गया है – तेली का तेल जले , मसालची का दिमाग फटे । लोगों को चैन नहीं मिलता । वे मानक बनाने लगते हैं । वे कहना शुरु कर देते हैं अमुक फलाने से मोटा है । ऐसा क्यों नहीं कहते कि अमुक फलाने से ज्यादा खाते पीते घर का है । इस से अमुक का नाम होता । उसकी कीर्ती फैलती । लेकिन लोग ऐसा नहीं कहते । उन्हें मोटे लोगों के खाने पीने से जलन होती है । कुछ लोग तो थोड़ा खाते हैं और बार बार मुंह पोंछते हैं । अरे भाई ! एक बार जम कर खा लो । एक लम्बा डकार ले लो । फिर मुंह पोंछते रहना । मुंह तो अपना है । कहां भागा जा रहा है । खाएंगे थोड़ा । मुंह पोछेंगे ज्यादा । ऐसे लोगों के लिए बाबा तुलसी दास ने ठीक हीं कहा है –

सकल पदारथ ऐही जगमाहीं ।
करम हीन नर पावत नाहीं ।।

मोटे को देखकर कोई उस पर वार करने की भूल नहीं कर सकता । उसे डर रहता है कि एक बार मोटा उसके शरीर पर गिर जाएगा तो उसकी कचमूर निकल जाएगी । उसकी हड्डियां कीर्तन करने लगेंगी । मोटापा वह मेहमान है जो चुपके से आता है और आपके शरीर पर स्थायी रुप से अड्डा जमा लेता है । आपको उस अनागत का स्वागत करना हीं पड़ता है । मोटापा बहुत उदार होता है । इसलिए यह पहले उदर पर पदार्पण करता है । सब खाया पिया उदर को लगने लगता है । पहले आपकी तोंद प्रकट होती है । फिर कमर कमरा बनने लगती है । जांघ होते हुए यह सारे शरीर पर कब्जा करने लगता है । आपके कपड़े छोटे होने लगते हैं । नये कपड़े बनते हैं । कपड़े वाले की विक्री होती है । दर्जी को रोजगार मिलता है । सबका साथ सबका विकास होता है ।

मोटापे की वजह से कई फिटनेस सेंटर खुल गये हैं । चिकित्सा विज्ञान इसके लिए दवा ईजाद कर रहा है । यदि मोटे न होते तो चिकित्सा विज्ञान निठल्ला रहता । यह पृथ्वी भी मोटे लोगों की वजह से हीं बची हुई है अन्यथा यह कब की शून्य में विलीन हो जाती । झूठ मूठ का किसी ने हवा उड़ा दी कि इसे शेषनाग ने सम्भाल रखा है । मोटापे के कारण हीं बाबा रामदेव का करोबार कहां से कहां पहुंच गया है । इसलिए मोटे लोगों को निराश नहीं होना चाहिए । उन्हें अपने मोटापे पर गर्व करना चाहिए ।

एस. डी. ओझा

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(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार है)

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