दे गया घाव वो ऐसे कि जो भरते हीं नहीं ।

मध्य अफ्रीका में पाया जाने वाला यह जीव गोरिल्ला कहलाता है । 2014 तक गोरिल्ला भारत के मैसूर चिड़िया घर में था । अब यह भारत के किसी चिड़ियाघर में नहीं पाया जाता । इसे संकटग्रस्त प्राणियों की श्रेणी में रखा गया है । गोरिल्ला का 98% डी एन ए मानव से मिलता है । यही मानव इस गोरिल्ला के नाम पर गोरिल्ला फिदाइन बना रहा है । गोरिल्ला फिदाइन गोलियों की बौछार करते हैं , ग्रिनेड फेंकते हैं और बदले में हवा में तैरते हैं मानव मांस के टुकड़े , खून से सने हुए । समझ नहीं आता कि फिदाइन का नाम गोरिल्ला क्यों रखते हैं ये आतंकवादी ? गोरिल्ला तो किसी मानव की जान नहीं लेता । आज तक का इतिहास तो यही कहता है । किसी चिड़ियाघर में गिरे बच्चे को छू कर व जांच परख कर गोरिल्ला छोड़ देता है । बाद का काम चिड़ियाघर के कर्मचारी करते हैं । वे बच्चे को गोरिल्ला के बाड़े से निकाल लेते हैं। यही कारण है कि गोरिल्ला का डी एन ए मानव से शत प्रतिशत नहीं मिलता । 2% की कमी रह जाती है । गोरिल्ला मानव नहीं बन पाता ।

गोरिल्ला का वजन 200 किलो व खड़े होने पर इसकी ऊंचाई 6 फीट की होती है । इसके हाथ इसकी ऊंचाई के डेढ़ गुना होते हैं अर्थात् 9 फीट । आम तौर पर यह जीव शांत प्रकृति का होता है । इसका भोजन सात्विक होता है । कंद मूल खाने वाले इस जीव का गुस्सा बहुत हीं खतरनाक होता है । इसका एक घूसा(मुक्का ) किसी भी जीव की खोपड़ी चटकाने के लिए पर्याप्त होता है । यह बाघ व शेर से भी बलशाली होथा है । यह बाघ व शेर को भी उठाकर दूर फेंकने की कूवत रखता है । मानव की तरह गोरिल्ला के भी 32 दांत होते हैं , पर इसके दोनों बगल के दांत बड़े और नुकीले होते हैं । इन दोनों दातों की काटने की क्षमता शेर से भी ज्यादा होती है । शेर या बाघ इसे मार नहीं सकते , क्योंकि इसके पास गरदन हीं नहीं होती । आम तौर पर बाघ या शेर जानवरों की गरदन पर वार करते हैं , जिससे जानवरों का दम घुटने लगता है । उनका दिमाग सुन्न पड़ जाता है , जिससे ये जानवर आसानी से उनके काबू में आ जाते हैं ।

गोरिल्ला शाकाहारी होने के कारण किसी पर अकारण हमला नहीं करता । यदि यह मांसाहारी होता तो यह आसानी से शेर या बाघ का शिकार भी कर सकता था । उस हालत में गोरिल्ला हीं जंगल का राजा होता । शेर व बाघ की अन्य प्रजाति उसकी प्रजा कहलाती । लेकिन यह किसी से उलझना नहीं चाहता । इसीलिए यह जोर जोर से छाती पीटकर अपने दुश्मनों को चेतावनी देता है । लक्ष्मण ने भी कभी कहा था ” कन्दुक इव ब्रह्माण्ड उठाऊं ” । गोरिल्ला भी छाती पीटकर इसी तरह की धमकी देता है । कभी कभार खुश रहने पर भी यह छाती पिटता है । गोरिल्ला आम तौर पर पेड़ों पर अपना घर बनाते हैं । बच्चा 5 साल तक मां के साथ रहता है । उसके बाद वह अपना चूल्हा चौका अलग कर लेता है । वह अपने लिए अलग घर बनाता है । गोरिल्ला की औसत आयु 30-40 वर्ष होती है । अपवाद स्वरुप ये 60 साल भी जीते हैं । कैलीफोर्निया में 2017 में एक 60 साल की बुजुर्ग मादा गोरिल्ला ने अंतिम सांस ली थी । इस गोरिल्ला का जन्म 1957 में कांगों में हुआ था ।

10-12 साल में गोरिल्ला को पहला बच्चा हो जाना चाहिए , वरना कई तरह की विसंगतियां पैदा हो जाती हैं । 17 साल की कीरा को फिलाडेल्फिया के चिड़ियाघर में ऐसी हीं विसंगतियों को सामना करना पड़ा । उसे पूरे डेढ़ दिन तक प्रसव पीड़ा से गुजरना पड़ा । पशु चिकित्सक न होने के कारण चिड़िया घर के अधिकारियों को मानव चिकित्सकों को इस नेक कार्य हेतु बुलाना पड़ा । अपने अपने फन के माहिर दर्जनों डाक्टर पहुंचे । बच्चा सिजेरियन से हुआ । एक दिन बच्चा गहन चिकित्सा केन्द्र में रखा गया । दुसरे दिन बच्चा मां को मिला । मां बच्चे का मधुर मिलन देख सबकी आंखों में खुशी के आंसू झिल मिल कर उठे –

मुझे खुशी मिली इतनी कि मन में न समाय ,
पलक बंद कर लूं कहीं छलक हीं न जाय ।

कुछ गोरिल्ला , जिन्हें बचपन में प्यार न मिला हो वे अजीबोगरीब हरकत करते हैं । ऐसे हीं एक गोरिल्ला पैट्रिक की कहानी इतिहास में दर्ज हो चुकी है । पैट्रिक की मां ने उसे बचपन में हीं छोड़ दिया था । वह 5 साल की उम्र में चिड़िया घर में लाया गया था । वह नर गोरिल्लाओं से हिल मिल के नहीं रहता । उनसे कटा कटा रहता । मादा गोरिल्लाओं को देख उन्हें काटने दौड़ता । उसे किसी मादा में दिलचस्पी नहीं थी । ऐसा गोरिल्ला किसी काम का नहीं था । वह प्रजनन नहीं कर सकता था । उसे अपनी मां पर गुस्सा था । मां का गुस्सा सभी मादाओं पर उतार रहा था । बाद में उसे डलाज जू से दक्षिण कैरोलीना भेज दिया गया , जहां उस जैसे बिगड़ैल शाहजादों का इलाज होता था । हो सकता है अभी तक वह वहां इश्क का ककहरा हीं सीख रहा होगा ।

जरा नादां हैं हम अभी इश्क में सनम ,
यूं सबक इश्क के हमें पढ़ाया न कीजिए ।

इंसानों के साथ रहकर गोरिल्ला उनकी आदतें व रवायतें जल्दी सीख जाते हैं । ऐसा हीं एक गोरिल्ला था । वह एलिस नाम की लड़की का दोस्त था । वह गोरिल्ला स्वीच ऑन ऑफ कर लेता था । बाथ रुम में जाकर नहा लेता था । घर का बर्तन भी धो लेता था । यही नहीं वह डायनिंग टेबल पर बैठकर बड़े मजे से खाना भी खा लेता था । उसे डायनिंग टेबल के मैनर की अच्छी समझ थी । वह चाय व सेब के शराब का भी शौकीन था । एलिस उससे से एक पल भी अलग नहीं रहना चाहती थी । उस गोरिल्ला को घर वालों ने किसी सर्कस कम्पनी को बेंच दिया। वह गोरिल्ला एलिस से अलग रहकर बहुत दुःखी हुआ । उसने खाना पीना छोड़ दिया । सर्कस कम्पनी वाले बहुत परेशान हो गये । उन्होंने एलिस को न्यूयार्क बुलवाया । एलिस अपने प्यारे गोरिल्ला से मिलने चल पड़ी । एलिस जब रास्ते में हीं थी कि गोरिल्ला के प्राण पखेरू उड़ गये । एलिस न्यूयार्क पहुंच बहुत फुट फुठकर रोई थी । गोरिल्ला को उसकी वफा की सजा मिल गयी थी ।

देखा तुझे , सोचा तुझे , चाहा तुझे , पूजा तुझे ,
मेरी खता मेरी वफा , तेरी खता कुछ भी नहीं ।

फ्रैंकफुर्ट जू में मां की ममता के दर्शन मिले थे । एक मादा गोरिल्ला अपने मरे हुए बच्चे को एक सप्ताह तक अपने कलेजे से लगाकर रखी थी । उसे विश्वास हीं नहीं हो रहा था कि उसका बच्चा मर चुका है । वह चीखती थी , चिल्लाती थी , बच्चे को झिझोड़ती थी । उसे जगाने की कोशिश करती । लेकिन ” जो जो गए , बहुरि नहीं आए , नहीं पठवत संदेश “। जाने वाले कभी नहीं आते । चाहे आदमी हो या जानवर । चिड़िया घर के कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी उससे वह बच्चा लेने में । आखिर बच्चे को दफनाया गया । वह मां के लिए कभी न भरने वाला एक घाव देकर चला गया था ।

दे गया घाव वो ऐसे कि जो भरते हीं नहीं ,
अपने सीने से कभी मैंने लगाया था जिसे ।

एस. डी. ओझा

https://www.facebook.com/sd.ojha.3

(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार है)

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