खाक हो जाएंगे हम तुमको खबर होने तक ।

मैना एक गिरोही पक्षी है , जिसे अपने वतन से प्यार है । वतन से प्यार होने के कारण यह कभी विदेश नहीं जाती । यह अपनी धुनी वहीं रमाती है , जहाँ यह पैदा होती है । यह इंसानों की आवाज की नकल करती है । वैसे तोता भी इंसानों की आवाज की नकल कर लेता है , पर अंतर इतना है कि तोता की आवाज अपनी होती है , जब कि मैंना हूबहू इंसानी आवाज में बात करती है । यदि कोई स्टाइलिश अंदाज में इससे बात करता है तो यह भी उस स्टाइल की नकल करती है । मैना की यही खासियत उसकी सबसे बड़ी दुश्मन हो गई है । लोग इसे कैद कर पिजड़े में रखने लगे हैं । यह उनसे बात करती है । उनका मनोरंजन करती है । लेकिन यह अपनी आजादी गंवा देती है ।

मैना छत्तीस गढ़ राज्य का राजकीय पक्षी माना गई है । इसके प्रजनन पर यहां प्रयोग चल रहा है । इसे पिजरे में बंद कर इसे प्रजनन के लिए मजबूर किया जा रहा है । सिर्फ एक को छोड़कर पिजरे की सारी मैना मर चुकी हैं । अब एक से प्रजनन क्या खाक होगा ? उसे बहुत दिनों तक मास्टर पीस के तौर पर रखा गया । एक दिन वह भी मर गई । अब नये सिरे से मैना पकड़ी जा रहीं हैं । उनका पिंजरा अब जंगल में रखा जा रहा है ताकि उन्हें प्रकृति के साथ रहने का आभास हो । लेकिन मेरा मानना है कि जब तक मैना को उन्मुक्त गगन और खुली धरती नहीं मिलेगी तब तक उनका प्रजनन कराना दूर की कौड़ी साबित होगी ।

मैना के प्रजनन का प्रयास सन् 1990 से किया जा रहा है । करोड़ों रुपए इस काम में खर्च हो चुके हैं । पर सफलता अभी नहीं मिली है । आगे भी सफलता मिलेगी इसमें संदेह है ।

हमने माना तगाफुल न करोगे लेकिन ,
खाक हो जाएंगे हम तुमको खबर होने तक ।

एस. डी. ओझा

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(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार है)

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