रोशनी हो न सकी दिल भी जलाया मैंने ।

अमिता कुलकर्णी बैडमिंटन में एक जाना पहचाना नाम था । सैय्यद मोदी भी एक बहुचर्चित नाम थे बैण्डमिंटन में । सैय्यद मोदी ने बैण्डमिंटन के जाने माने नाम प्रकाश पादुकोण को हराकर राष्ट्रीय चैम्पियनशिप अपने नाम कर ली थी । अमिता कुलकर्णी और सैय्यद मोदी एक दूसरे से बैण्डमिंटन कोर्ट में हीं मिले थे । यहीं पर इनका प्यार पल्लवित व पुष्पित हुआ । बाद में दोनों ने शादी कर ली । चूंकि यह शादी अंतर्जातीय थी , इसलिए दोनों के परिवार वालों ने इसमें सहमति नहीं जताई थी । लिहाजा दोनों ने घर से भागकर शादी की । अब अमिता कुलकर्णी अमिता मोदी बन गयीं थीं । गौरतलब है कि सैय्यद मोदी को रेलवे में महज 18 साल की उम्र में स्पोर्ट कोटे से एक अच्छी नौकरी मिल गई थी ।

बेहतर खेल सुविधा के चाह में सैय्यद मोदी ने अपना तबादला अपने पैतृक शहर गोरखपुर से लखनऊ करा लिया । अमिता मोदी भी लखनऊ आ गयीं । अमिता मोदी की मुलाकात अमेठी के राजा संजय सिंह से एक टूर्नामेण्ट के दौरान हुई । अमिता राजा के धन दौलत और रुतबे से काफी प्रभावित हुईं थीं । दोनों के मिलने का सिलसिला चल पड़ा । अमिता मोदी अपनी डायरी रोजाना लिखतीं थीं । उस डायरी में राजा संजय सिंह और अमिता मोदी की रोमांस की बातें लिखीं होतीं थीं । अमिता मोदी की अनुपस्थिति में सैय्यद मोदी वह डायरी पढ़ते और दुःखी होते । अमिता मोदी अपने कैरियर के चलते अभी माँ नहीं बनना चाहतीं थीं । संजय सिंह से मिलने के उपरांत अमिता ने अपना इरादा बदला और वह एक बच्ची की माँ बन गयी । सैय्यद मोदी ने कुछ और ही सोचा । इसलिए वे बच्ची के होने की खुशी कत्तई हीं नहीं मना सके ।

दिनांक 28 जुलाई 1988 को सैय्यद मोदी के डी सिंह बाबू स्टेडियम से प्रेक्टिस के उपरांत घर जाने के लिए निकले । रास्ते में उन्हें रोका गया । उनके सीने में कई गोलियाँ उतार दी गयीं । सैय्यद मोदी वहीं ढेर हो गये । सैय्यद मोदी की मृत्यु के बाद काफी धर पकड़ हुई । राजा संजय सिंह और अमिता मोदी की भी गिरफ्तारियां हुईं अमिता मोदी की डायरी भी पकड़ी गयी । डायरी में लिखी बातों के बारे में अमिता मोदी ने कहा था कि उसके और संजय के बीच ऐसा कुछ नहीं है । उसने डायरी की बातें सैय्यद मोदी को जलाने के लिए लिखीं थीं । मामला सी बी आई को सौंपा गया । सैय्यद मोदी के मृत्यु के कुछ ही दिनों बाद संजय और अमिता ने शादी कर ली ।अमिता मोदी अब अमिता सिंह हो गयीं थीं । शायद अमिता ने अबकी बार यह कृत्य सैय्यद मोदी की आत्मा को जलाने के लिए किया था ।

1990 में संजय और अमिता सबूतों के अभाव में बरी हो गए । कानून हत्यारा नहीं पकड़ सका , लेकिन भगवान को पता था कि कौन हत्यारा है ? भगवान की लाठी बे आवाज होती है । आज संजय व अमिता अपने हीं बनाए हुए चक्रव्यूह में फंसे पड़े हैं । बेटा अनंत सिंह ,बेटी सब्या और पूर्व पत्नी गरिमा सिंह ने इनके नाक में दम कर रखा है । इनके महल पर कब्जा कर रखा है । संजय सिंह और अमिता सिंह की गति ” सांप छछूंदर ” की हो गयी है । अब इन्हें पता चल गया होगा कि किसी का दिल जलाकर कभी रोशनी नहीं मिलती ।

एस. डी. ओझा

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(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार है)

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