चोट ।

आई पी सी के सेक्सन 44 के अनुसार किसी भी व्यक्ति के शरीर , मन , प्रतिष्ठा या सम्पति में किसी वजह से अवैध रुप से किया गया नुकसान चोट कहलाता है । आम तौर पर चोट से अभिप्राय शरीर और मन पर लगे आघात से लगाया जाता है । शरीर पर चोट लगती है । दर्द दिल को होता है । आघात दिल पर लगता है तो भी दिल रोता है । दिल रोता है तो लोग कहते हैं दिल पे मत ले यार । दिल कड़ा करो । मत सोचो । खुश रहा करो । ठीक हो जाओगे । लेकिन यही बात शरीर पर लगे चोटों के लिए कोई क्यों नहीं कहता ? यहां भी यही कहना चाहिए कि तुम चोट पर मत ध्यान दो । लंगड़ा के मत चलो । ठीक हो जाओगे । जब शरीर पर लगे चोट के लिए इलाज जरुरी है तो मन के लिए भी इलाज जरुरी है । मन का इलाज मनोवैज्ञानिक करेगा । मन का रोग भी अपने आप ठीक नहीं होता । मन के रोगी के साथ भी आत्मीय व्यवहार बेहद जरुरी है ।

शरीर के चोट में सबसे खतरनाक चोट मस्तिष्क की होती है । दुनियां में हर साल पचास हजार लोग मस्तिष्क की चोट से मरते हैं । मस्तिष्क की चोट कोई दुर्घटना या मार पीट से लग सकती है । इसमें सबसे खतरनाक मस्तिष्क के स्टेम सेल का एरिया होता है । इस भाग में लगी चोट जानलेवा साबित हो सकती है । रोगी पर उल्टी , बेहोशी तारी होने लगती है । उसकी पुतलियों के आकार में परिवर्तन होने लगता है । ऐसे में रोगी की मस्तिष्क में आक्सीजन की कमी हो जाती है । उचित होगा कि रोगी को हाॅस्पिटल ले जाने से पहले उसके घाव के साथ छेड़खानी न की जाय । उसके सिर में फंसी कोई चीज स्वंय निकालने की भी कोशिश न की जाय । आम तौर पर गम्भीर मस्तिष्क चोट में शल्य चिकित्सा की जाती है , जो कि बहुत हीं संवेदनशील होती है । दिमागी चोट के सिद्धहस्त सर्जन भी बहुत कम हीं मिलते हैं । समय रहते हुए रोगी को बढ़िया चिकित्सक का साथ मिल जाए तो उसकी जान बच सकती है ।

दिल के चोट से प्रभावित रोगी को भी बहुत देख रेख की जरुरत होती है । यह चोट इश्क में असफल होने पर भी लगता है । “जब चोट लगी दिल में , ये इश्क समझ में आई ” की तर्ज पर आदमी तड़पता है । कुछ को इस तड़प में मजा आता है । महादेवी वर्मा लिखती हैं –

पर शेष नहीं होगी मेरे प्राणों की पीड़ा ,
तुमको पीड़ा में ढूंढा तुझमें ढूंढूगी पीड़ा ।

कुछ की दिल की चोट इतनी गहरी होती है कि उनका दिल टूट जाता है । गोया दिल शीशे का होता है , जिसे एक पत्थर मारा और चटाक से वह टूट गया ।

शीशे का दिल था मेरा ,
पत्थर का जमाना था ;
दिल टूट गया ।

एक वाजिब बात उन मोहतरमाओं के लिए , जिनके पतियों के काॅलर पर लाल निशान पाए जाते हैं । उन महिलाओं से गुजारिश है कि वे इसे चोट के निशान समझने की भूल कत्तई न करें । अच्छी तरह से जांच परख लें । यह लिपस्टिक का भी दाग हो सकता है । ऐसे में वे इलाज के रुप में बेलन का बखूबी इस्तेमाल कर सकतीं हैं । ऐसा हीं वाकया एक आंख सेंक रहे पति का हुआ था। उसकी पत्नी ने कहा –

घर चलकर मैं आपकी चोट पर मरहम लगा दूंगी ।

पति ने कहा –

लेकिन मुझे चोट लगी कहां है ?

पत्नी संयत होकर बोली –

अभी हम घर पहुंचे हीं कहां हैं ?

एस. डी. ओझा

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(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार है)

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