महिला बैंक लोन वसूली गैंग ।

जी हाँ , पुरुषों द्वारा किये जाने वाला यह काम महिलाएं अब बेहतर ढंग से कर रहीं हैं । रिकवरी एजेंट हट्टे कट्ठे लोग हुआ करते थे । लेकिन एक रिकवरी एजेंसी ने एजेंट के रूप में चन्द्र बदना मृगलोचना जैसी हसीन लड़कियों का एक ग्रुप तैयार किया है । इन नाजुक और खूबसूरत हसीनों के इरादे काफी सख्त होते हैं । सिर्फ बैंकों के लिए रिकवरी का काम करने वाली इस अधिकृत एजेंसी ने अब तक लाखों करोड़ों की वसूली कर ली है । मंजू भाटिया इस वसूली रिकवरी कंपनी की संयुक्त प्रबंध निदेशक हैं ।

मंजू भाटिया का यह वसूली गैंग अब देश के 26 इलाकों में फैल गया है । यह एजेन्सी 250 कर्मचारियों के साथ सालाना 500 करोड़ रुपये की वसूली कर रही हैं। इस कंपनी का सफर तकरीबन 8 साल पहले शुरू हुआ था । जब इस कंपनी की शुरुआत हुई थी तो इसकी मासिक आय 25,000 रुपये थी । उस समय आठ कर्मचारी और एक क्लाइंट था। आज इसके क्लाइंट्स की सूची में कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं ।

16 साल की उम्र में सुश्री भाटिया इंदौर के एक फार्मा कंपनी में रिसेप्शनिस्ट थीं । 12वीं की परीक्षा के बाद उन्होंने 2003 में कच्चे माल की ट्रेडिंग और अकाउंट का काम संभाला था । काम करते हुए उन्होंने बेचलर ऑफ लॉ भी कर लिया । उनके तत्कालीन बॉस और पारिवारिक मित्र पराख शाह ने उनसे वसूली में मदद करने के लिए कहा था । फिर वह इस लाइन में आ गयीं । वे लोन लेने वालों को लोन देने के लिए प्यार से समझाती हैं । ग्राहकों को उनकी बात जल्द ही समझ में आती है । ग्राहक लोन देने के लिए तैयार हो जातें हैं ।

मंजू भाटिया का मानना है कि बैंकों और ग्राहकों के बीच संवाद की कमी के कारण हीं गलतफहमी पैदा होती है। महिलाएं संवाद कायम करने में पीछे नहीं रहतीं हैं । वे बेहतर संवाद करतीं है ।

एस. डी. ओझा

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(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार है)

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