सीने में जलन आँखों में तूफान सा क्यूँ है ।

अगर आप नींद में हैं । सपना देख रहे हैं कोई राक्षस आपका पीछा कर रहा है । या आप किसी गहरे कुएँ में गिर रहे हैं । कभी अलौकिक शक्तियों का एहसास होता है तो कभी उड़ने जैसा भ्रम पैदा होता हो । तभी आपकी नींद खुल जाती है । नींद खुलने के बाद भी आप सपने से मुक्त नहीं हो पाते । आपके सीने में जकड़न होती है , शरीर हिलाना डुलाना मुश्किल होता है । ऐसी स्थिति को स्लीप पैरालाइसिस ( नींद लकवा) कहा जाता है । यह स्थिति कुछेक में मात्र चंद सेकण्ड तो कुछेक में दो तीन मिनट तक रहती है। इसके बाद स्थिति सामान्य हो जाती है।

ऐसा तनाव , चिंता , अवसाद के कारण हो सकता है । कई लोगों को ड्रग और शराब के सेवन से भी नींद में क्षणिक लकवा मार सकता है । नींद में कमी या अत्यधिक नींद भी इसका एक कारण हो सकता है । कुछ लोगों में ऐसा अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है । कुछ लोगों के अचेतन मन में बचपन की अवांछित घटनाएँ बहुत गहरे तक जड़ जमा चुकी होती हैं । ऐसै में उन्हें नींद का लकवा मार सकता है । अवचेतन मन की घटनाओं को किसी अपने आत्मीय जन से शेयर करें । गम घटेगा तो दर्द कम होगा । नींद के लकवा की आवृति कम होने लगेगी । नींद के लकवे के बाद आपको अपनी सोच बदलनी होगी । आपको सोचना होगा कि यह आपका निरा भ्रम है । ऐसा सोचने पर आपका अपने शरीर पर धीरे धीरे नियंत्रण होने लगेगा ।

आपको सोचना होगा कि नींद का यह लकवा किसी बीमारी के कारण नहीं है । यह क्षणिक है और कत्तई गम्भीर नहीं है । मैं अपने मनोबल से इसे दूर करने में कामयाब हो जाऊंगा / जाऊंगी । किसी खुले पार्क में मेडिटेशन , योगासन और प्राणायाम करें । मेडिटेशन 5-10 मिनट से शुरू कर इसे 25-30 मिनट तक ले जाएं ।एक दिन अचानक आपको पता चलेगा कि आपकी बीमारी स्वतः हीं दूर हो चुकी है । इसके बावजूद फर्क न पड़े तो चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए । ज्यादा दिन हो जाने पर आपके व्यवहार में बदलाव , चिड़चिड़ापन , गुस्सा और खड़े खड़े गिरने की भी सम्भावना भी हो सकती है ।

एस. डी. ओझा

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(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार है)

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