सतबहना ।

satbahnaसत बहना नाम तो इन्हें अंग्रेजी में दिया गया है, क्योंकि ग्रे रंग की ये चिड़िया हमेशा छः से ज्यादा के झुण्ड में रहती है । चंबल में इन्हें सतबहना के नाम से ही जाना जाता है। जबकि इनका जूलॉजिकल नाम ग्रे बेबलर है। इनकी चहचहाहट से चंबल की घाटी गूंजती है। इन सात चिड़ियों के झुंड चंबल के किनारे जल-किलोल भी करते देखे जाते हैं। जबकि देवरी के डॉल्फिन-घड़ियाल ईको सेंटर पर इन सेवन सिस्टर बर्ड्स के 10 से अधिक समूह उड़ते व मस्ती करते देखे जा सकते हैं।

सतबहना यानी सेवन सिस्टर बर्ड्स की बहुतायत देश में कहीं नहीं हैं। जानकार मानते हैं कि ये दुर्लभ चिड़िया है। ग्रे रंग की, यानी कुछ मटमैली सी रंगत लिए ये चिड़िया चंबल में ही पाई जाती है। चंबल की आवोहवा इन चिड़ियों को ज्यादा पसंद हैं, इसलिए ये यहां ज्यादा रहती हैं। वैसे यह पूरे भारत में पाई जाने वाली चिड़िया है ।इस चिड़िया को भोजन के तुरंत बाद पानी की आवश्यकता होती है ।

सत बहना बहुत ही सामाजिक पक्षी है और ज्यादातर पूरे वर्ष झुंड में उड़ती है. एक झुंड 1.5-2 मील की दूरी तय करता है, लेकिन भोजन की तलाश में अकसर 2-5 मील भी उड़ लेती है. सत बहना का प्रमुख आहार अनाज के दाने तथा कीड़े-मकोड़े हैं. इसकी कीड़े खाने की आदत के चलते इसे किसानों की मित्र माना जाता है । इसके एक झुण्ड में 6- 10 की नफरी होती है । कहीं कहीं इसे सात भाई भी कहते हैं ।

एस. डी. ओझा

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(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार है)सतबहना ।

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