जीवन शिक्षा के नाम करने वाले शिक्षकों को ‘शिक्षाश्री’ सम्मान


गोपालगंज,बिहार।
खुद अभाव में रहकर पूरा जीवन शिक्षा के नाम करने वाले जिले के करीब 15 शिक्षकों को ‘शिक्षाश्री’ सम्मान से नवाजा गया। शिक्षा के क्षेत्र में ‘ऑउट ऑफ द बॉक्स’ योगदान देने के लिए इन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। गुरुवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर ‘शिक्षाश्री’ सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में कमला राय कॉलेज की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रूखसाना खातून, प्रो. (डॉ.) एके पांडेय, (डॉ.) संदीप कुमार, वरिष्ठ शिक्षक वृंदा सिंह व शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता कुंज बिहारी श्रीवास्तव शामिल थे। कार्यक्रम में चार पीढ़ी के शिक्षकों को एक साथ सम्मानित किया गया। बिपीन बिहारी फाउंडेशन और जिंदगी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में समारोह का आयोजन किया गया था। संचालन जय प्रकाश मिश्र ने किया।

शिक्षकों को शॉल, सम्मान पत्र, पेड एवं पुस्तक देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वाले में सेवानिवृत शिक्षक वृंदा सिंह, श्रीमती किशोरी देवी, कमला राय कालेज के प्रो.एके पांडेय, डिम्सलैंड पब्लिक स्कूल की प्राचार्या सुश्री मीनू सिंह, एएस पब्लिक स्कूल की प्राचार्या सुश्री अर्चना सिंह, बापू आदर्श जूनियर चिल्ड्रेंस एकेडमी की वरिष्ठ शिक्षिका सुश्री माया पूरी, बचपन प्ले स्कूल, थावे के प्राचार्य राजीव कुमार, होली चाइल्ड सीनियर सेकेंड्री स्कूल प्राचार्य इंद्रजीत कुमार, गोपलामठ राजकीय विद्यालय के नवनीत कुमार मिश्र, कुचायकोर्ट के प्रखंड शिक्षक लालदेव यादव, खेल शिक्षक विनित कुमार शर्मा, डीएन सिंह पब्लिक स्कूल के प्रार्चाय धनंजय सिंह, वृंदावन के राजकीय स्कूल के प्राचार्य रविकुमार वर्मा, सर्वोदय आईटीआई के प्राचार्य संजीत कुमार, ज्ञान दर्शन पब्लिक स्कूल के बिरेंद्र शर्मा, ज्ञान निधि पब्लिक स्कूल के परमेश्वर प्रसाद, न्यू शांति निकेतन पब्लिक स्कूल के प्राचार्य राजीव रंजन सिंह, एनपीएस पब्लिक स्कूल के डीएन प्रसाद आदि शामिल थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमला राय की प्राचार्या प्रो. रूखसाना खातून ने जीवन में गुरु के महत्व को विस्तार से रखा और कहा गुरु के बिना किसी बेहतर जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती है। एक शिक्षक ज्ञान के आधार पर किसी जीवन को प्रकाशमय कर सकता है। शिक्षक में इतनी ताकत होती है कि वह एक शिष्य ही नहीं बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए अपने आपको झोंक देता है। तमाम आधुनिक संसधानों के बाद भी शिक्षक की महिमा में कमी नहीं आयी है और न ही आएगी। आज के दिन शिक्षकों के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेवारी है कि वह एक सुंदर समाज की स्थापना करे।

प्रो. एके पांडेय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन के मूल में गुरु का स्थान होता है। एक माता पुत्र को जन्म देती है। पिता नाम देता है। मगर एक गुरु उसको एक नया जीवन देकर राष्ट्र को समर्पित कर देता है। गुरु के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि गुरु के स्मरण मात्र से ही शिष्य जिंदगी का अंधियार छटने लगता है। उन्होंने तमाम शिक्षकों एवं अभिभावकों को सजग करते हुए कहा कि बच्चों भविष्य की रचना में आप सभी का अमूल्य योगदान है। आप जैसा करेंगे उसका अनुशरण आपके बच्चें करेंगे। आपके आचार, विचार, व्यवहार एवं वाणी का प्रभाव पड़ेगा। यही जीवन का मूल तत्व है।

प्रो. संदीप कुमार ने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध इस दुनिया में अद्वितीय है। इतना अटूट बंधन होता है कि शिष्य के बिना बताए गुरु उसकी हर एक इच्छा को जानता और समझता है। किसी बच्चे का भविष्य कोई माता-पिता तय नहीं कर पाते हैं उसका भविष्य उसके गुरु तय करते हैं। एक गुरु ही है जो जीवन के पग-पग पर रास्ता दिखा सकता है।

कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के पार्टी जोन हॉल में किया गया था। जिसमें ओम प्रकाश मिश्र, अजेंद्र पांडेय, अश्विनी गर्ग, समीर तिवारी, सुमन कुमार, राजू प्रसाद सहित अलग-अलग हिस्सों से शिक्षक, प्राचार्य, शिक्षाविद्, सिविलसेवा से जुड़े लोग, पत्रकार, समाजसेवी, अभिभावक एवं छात्र शामिल हुए। इसके साथ ही जीवन में गुरू की महिमा एवं उनके महत्व पर एक बातचीत की गई।

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