लंबी प्रतीक्षा का अंत

खुश होइये कि चार सौ सत्तासी वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा का अंत हुआ। यह हमारी या आपकी विजय नहीं, यह भारत की विजय है। राम तो यहाँ के कण-कण में हैं, आज भारत का स्वाभिमान लौटा है। यहाँ न कोई पक्ष हारा है न कोई पक्ष जीता है, आज भारतीय स्वाभिमान की गर्दन पर रखी गयी समरकन्द की तलवार टूटी है।
गर्व कीजिये कि आपने आज का दिन देखा है। हम पिछली पच्चीस पीढ़ियों में सबसे सौभाग्यशाली पीढ़ी में जन्मे हैं, जो हमने अयोध्या के माथे पर लगे कलंक को मिटते देखा है। हमने पच्चीस पीढ़ियों के अधूरे स्वप्न को पूरा होते देखा है। हमनें इतिहास को बनते देखा है…
स्वाभिमान का युद्ध शस्त्रों से नहीं, संयम और बलिदान से जीता जाता है। यह भारत के संयम और असंख्य गुमनाम योद्धाओं के बलिदान की विजय है। आज रात्रि को यदि छतों पर दीपक जलें तो दो दीपक कोठारी बन्धुओं के लिए, और एक उनकी पूज्य माताजी के लिए भी जलें।
गोगोई बाबू! सारा कहा-सुना माफ साहेब! आपको हम क्या, शताब्दियाँ याद रखेंगी। आज से हजार वर्ष बाद भी बच्चे पढ़ेंगे, “अयोध्या पुनरुत्थान का निर्णय श्रीमान रंजन गोगोई जी ने दिया था।”
सन् दो हजार उन्नीस, भारतीय इतिहास में उन्नीस सौ सैंतालीस के बाद का सबसे सुन्दर वर्ष है। केवल मनुष्य ही नहीं, समय भी कभी कभी अमर हो जाता है। यह वर्ष अमर हो गया है।
अयोध्या युद्ध के बाद प्रभु राम ने दोनों पक्ष के सारे सैनिकों को प्रणाम किया था। सबकी जय हो… हम सदैव ही विश्व का कल्याण मनाने वाले लोग हैं। कल जब प्रभु का मंदिर बनेगा तो उसमें भी यही अर्चना होगी कि विश्व का कल्याण हो… आज कोर्ट ने विश्व के कल्याण के लिए ही यह निर्णय दिया है।
मेरे गोपालगंज के ही थे रसूल चचा!कोई पूछता तो कहते थे कि राम जी का लड़का हूँ। आज होते तो झूम—झूम कर नाच उठते और गाते, “चमकता जगमगाता है अनोखे राम का सेहरा…”
भारत बना रहे, भारत का स्वाभिमान बना रहे, भारत की सुंदरता बनी रहे… धर्म की जय हो…

  • सर्वेश तिवारी श्रीमुख
    गोपालगंज, बिहार

 

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