सुपर 30 का जलवा

आनंद कुमार एक मेधावी गणितज्ञ थे। उन्होंने हर परीक्षा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इसी प्रतिभा के बल पर उनका प्रवेश कैम्ब्रीज विश्वविद्यालय में हुआ था, पर आर्थिक परिस्थितियाँ उनके प्रतिकूल थीं। मजबूर होकर उन्होंने अपने खुद का एक कोचिंग संस्थान खोला, जिसमें आरम्भ में केवल दो ही लड़के आए। आज इस संस्थान में 500 लड़के पढ़ते हैं। रामानुज स्कूल आॅफ मैथेमेटिक्स नाम के इस संस्थान में अधिकांश लड़कों का प्रवेश आई आई टी में होने लगा। इस संस्थान की कीर्ति पूरे भारत में फैल गयी। ऐसे में एक मेधावी छात्र का इस संस्थान में आगमन हुआ, जिसके पास संस्थान की फीस चुकाने भर का पैसा नहीं था। आनंद कुमार द्रवित हो गये। गरीबी उन्होंने भी देखी थी।
आनंद कुमार ने सुपर 30 की योजना चलाई। इस योजना के अंतर्गत उन 30 मेधावी छात्रों का चयन होता था, जो बेहद गरीब होते थे। रामानुज स्कूल आॅफ मैथेमेटिक्स से प्राप्त आय से सुपर 30 का खर्च चलता था। यहां तक कि इन छात्रों को भोजन भी मुफ्त मुहैया कराया जाता था। आनंद कुमार की माँ इन बच्चों के लिए खाना बनाया करतीं थीं। मां—बेटे ने गरीबी को बहुत नजदीक से देखा था। घर का खर्च चलाने के लिए मां—बेटे पटना में पापड़ बेचा करते थे। आनंद कुमार का मानना था कि शिक्षा पर सबका अधिकार है। इसलिए यह सबको मिलनी चाहिए।
आज लगभग 15 सालों से सुपर 30 प्रचलन में है। इसके लगभग 400 छात्रों का आई आई टी में प्रवेश मिला है। गरीबी इनके बीच में कभी नहीं आती। अब सुपर 30 में आने के लिए लोग आनंद कुमार पर दबाव बनाने लगे हैं। कम मेधावी छात्र की भी लोग सिफारिश करने लगे हैं। कई कोचिंग संस्थान भी उनके खिलाफ हो गये हैं। रामानुज स्कूल आॅफ मैथेमेटिक्स की चर्चा पूरे पटना में होने लगी है। हर कोई इसी संस्थान में कोचिंग करना चाहता है। इससे अन्य संस्थाओं की रोजी रोटी छिन गयी है। इसी कारण आनंद कुमार के भाई पर जान लेवा हमला भी हो चुका है। ईर्ष्या और द्वेष के कारण ये हमले हो रहे हैं, पर आनंद कुमार की नजर आज भी अपने उद्देश्य पर टिकी हुई है।
सुपर 30 की सफलता से प्रेरणा लेकर इसी नाम से एक फिल्म भी बनी है। निर्माता निर्देशक विकास बहल की इस फिल्म में आनंद कुमार का किरदार ऋतिक रोशन ने निभाया है। ऋतिक रोशन इस फिल्म में काम करने से पहले छः माह तक बिहार में रहे थे। वे यहां की सभ्यता और संस्कृति में जब रच बस गये तब कहीं जाकर उन्होंने इस फिल्म में काम करने के लिए हां कहा। वे पटना की स्पेशल डिश लिट्टी और चोखा के दीवाने हो गये थे। शिक्षा मंत्री श्रीराम सिंह का अभिनय पंकज त्रिपाठी ने किया है। पंकज त्रिपाठी टूटी फूटी अंग्रेजी बोलकर शिक्षा मंत्री के किरदार को बखूबी निभाया है। जब वे यह कहते हैं- Education is a way to Heaven तो बहुत अटक—अटक कर बोलते हैं। सारे बच्चों का चेहरा उस समय हंसता हुआ होता है।
बालक आनंद कुमार (ऋतिक रोशन) नहीं हंसता है। उसका उद्देश्य उसे हंसने से रोकता है। वह अपना मेडल लेकर घर आ जाता है। मृणाल ठाकुर ने भी टी वी की दुनिया को छोड़कर फिल्मी दुनिया में अभी पदार्पण किया है। उनका अभिनय भी मंझा हुआ है। सम्पूर्ण फिल्म में आनंद कुमार के संघर्ष को दिखाया गया है। फिल्म सुपर डुपर हिट रही है। इसने अब तक लगभग तीन सौ करोड़ के ऊपर का कारोबार किया है। फिल्म के हिट होने की खुशी में मुम्बई में एक पार्टी का आयोजन किया गया था, जिसमें आनंद कुमार को भी बुलाया गया था। इस पार्टी में खुद राकेश रोशन आनंद कुमार की प्लेट में भोजन परोस रहे थे।
ई. एस. डी. ओझा

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