मरे हुए लोग भी होंगे जिंदा!

आए दिन ऐसा सुनने को मिलता है कि मरा हुआ व्यक्ति जिंदा हो गया। इसे ईश्वर का चमत्कार कहेंगे। इन मरे हुए लोगों ने जिंदा होकर अपना अनुभव भी साझा किया है। मृत शरीर को छोड़ रही आत्मा बहुत सुकून महसूस कर रही होती है। परिवार के लोग रो रहे होते हैं। आत्मा शरीर छोड़कर किसी अंधेरे संकरे मार्ग से प्रकाश की ओर बढ़ रही होती है। तभी उस आत्मा को बल पूर्वक उसी शरीर में वापस किया जाता है। मृत शरीर में हलचल होती है। रोते हुए लोग खुश हो जाते हैं।
भारत के विश्वम्भर बजाज ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा था कि वे मृत शरीर को छोड़कर स्वर्ग द्वार तक पहुँच गये थे। वहां उनकी मुलाकात यमराज से हुई। यमराज ने अपना खाता बही देखकर बताया कि उनकी अभी मृत्यु तय नहीं हुई है। उन्हें गलती से लाया गया है। उन्हें अपने शरीर में वापस लौटना होगा। विश्वम्भर बजाज का शरीर चिता पर लिटा दिया गया था। अग्नि संस्कार की कार्यवाही शुरु होने वाली थी। तभी उनके शरीर में हलचल हुई। वे उठ बैठे। घर के लोग व बन्धु बांधव खुश हो गये। उसी दिन उसी गांव के ग्यासी राम की हृदय गति रुकने से मौत हो गयी। उनकी मृत्यु तय हो गयी थी।
डा रेमण्ड मूडी ने बहुत से ऐसे लोगों से बातचीत की थी जो मरकर भी जिंदा हो गये थे। ऐसे लोगों के अनुभव को उन्होंने कलमबद्ध किया। वे पेशे से मनःचिकित्सक थे। डा मूडी ने अंततः निष्कर्ष निकाला कि ऐसे अनुभव मनुष्य के परवरिश के समय स्वर्ग नरक पर हुई चर्चा के कारण होती है। एक ईसाई धर्मावलम्बी कभी भी अपने अनुभव में यमराज का जिक्र नहीं करेगा। कारण उसे यमराज की जानकारी नहीं है। यदि जानकारी होगी भी तो उसे यमराज का कंसेप्ट स्वीकार्य नहीं होगा।
आदमी के मरने के आधे घंटे बाद भी उसके लीवर, किडनी और दिल ताजा रहते हैं। इन्हें किसी जरुरत मंद को छः घंटे के भीतर लगाया जा सकता है। अब तो विज्ञान मरे हुए व्यक्ति को भी जिंदा करने में लगा है। प्रोफेसर जेम्स बेडफोर्ड किडनी के कैंसर से पीड़ित थे। उस समय तक इस बीमारी का इलाज सम्भव नहीं था। उनका मरना तय था। “लाइफ एक्सटेंशन सोसाइटी” के सदस्यों ने उनसे सम्पर्क किया। वे उनके मरने के बाद उनके शरीर को (-)535 डिग्री सेंटीग्रेट पर फ्रीज करके रखना चाहते थे। जेम्स रेडफोर्ड ने हामी भर दी। हाँ कहने के बाद रेडफोर्ड ने अपनी पूरी सम्पति इस संस्था को दान कर दी थी।
1967 में जेम्स रेडफोर्ड के मरणोपरांत उनके शरीर को फ्रीज किया गया। उनके शरीर को फ्रीज किए हुए आज 53 वर्ष हो चुके हैं। वैज्ञानिक दिन रात एक किए हुए हैं। वे मृत्यु को जीतना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे जेम्स रेडफोर्ड को जिंदा कराने के बहुत करीब पहुँच चुके हैं। वहीं कुछ वैज्ञानिक इसे प्रकृति के खिलाफ मानते हैं। वे कहते हैं कि यह पागलपन है। वे इसका मजाक बनाते हैं। उनका कहना है कि इस धरती पर जनसंख्या का विस्फोट पहले ही हो चुका है। आदमी मरते हैं तो कुछ स्थिति नियंत्रण में आती है। जब आदमी मरना ही बंद कर देंगे तो इस धरती पर पांव धरने की भी जगह नहीं बचेगी।
यदि जेम्स रेडफोर्ड को जिंदा कर दिया जाता है तो उनका स्वागत केवल उनके पोते पोती ही कर पाएंगे। उनके बेटे—बेटी, दोस्त सभी मर चुके होंगे। उनके पोते—पोती भी बूढ़े हो चुके होंगे। ऐसे में क्या वे उनसे भावनात्मक लगाव महसूस कर पाएंगे ? वैसे भी जब किसी को मरना ही नहीं होगा तो इस धरती पर बूढ़ों की फौज खड़ी हो जाएगी। हमें किसी और ग्रह पर जाने की तैयारी करनी होगी। हाल फिलहाल विश्व बड़ी बेसब्री से जेम्स रेडफोर्ड के जिंदा होने का इंतजार कर रहा है।

ई. एस. डी. ओझा

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