गंगा दशहरा और मरती हुई गंगा !

June 12, 2019

आज गंगा दशहरा है। हमारे पूर्वज राजा भगीरथ की वर्षों की तपस्या के बाद गंगा के स्वर्ग यानी हिमालय से पृथ्वी पर अवतरण का दिन। राजा भगीरथ एक लोक कल्याणकारी शासक थे। उन्होंने संभवतः सूखे और पानी की कमी से मरती अपनी प्रजा के कल्याण के लिए हिमालय से गंगा के समतल भूमि पर आने का मार्ग खुलवाया और प्रशस्त किया होगा। इस विराट कार्य में कितना जनबल, कितना अभियांत्रिक…

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आर्टिकल 15 A के खिलाफ देश भर के ब्राह्मणों में रोष, कई शहरों में मुकदमा दर्ज

June 12, 2019

आर्टिकल 15 A का मतलब होता है :- “धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान या इनमें से किसी भी आधार पर राज्य अपने किसी भी नागरिक से कोई भेदभाव नहीं करेगा”। मौजूदा दौर में संविधान के इस आर्टिकल पर फ़िल्म के बहाने हो रही बहस को कुछ लोग ज़रूरी मान रहे हैं। इसी विषय पर आयुष्मान खुराना इन दिनों अपनी फिल्म ‘आर्टिकल 15’ में अपने दबंग पुलिस वाले रोल के…

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बिहार में एनडीए सरकार का बड़ा फैसला, अब माता-पिता की सेवा नहीं की, तो जाना होगा जेल

June 12, 2019

  बिहार कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया कि बिहार में रहने वाली संतान अगर अब मां-पिता की सेवा नहीं करेंगे तो उनको जेल की सजा हो सकती है। माता-पिता की शिकायत मिलते ही ऐसी संतान पर कार्रवाई होगी। माता पिता भगवन का स्वरूप होते है परन्तु आज के युग में बच्चे उनको, उनके ही घर से बेघर करने पर तुले हुए है ।

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वह खिलाडी जिसने खेल में मिडिल ऑर्डर के ढर्रे को ढहा दिया था

June 11, 2019

महेंद्र सिंह धोनी पर एक फ़िल्म बनी थी। उस फिल्म के एक दृश्य में धोनी बना नायक अपने एक मैच हारने पर कहता है – ‘हमारे टोटल इनिंग स्कोर से 1 रन ज्यादा। पूरा धागा खोल दिया।’- संवाद फिल्मी है पर इसे एंड्रयू फ्लिंटॉफ से बेहतर कौन समझेगा। जिन्होंने पिच पर नए आये युवराज को खोद दिया और फिर युवराज ने जो किया उसने न केवल फ्लिंटॉफ के धागे की…

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फिजी द्वीप पर हिंदी का अलख जगाते गिरमिटिया

June 6, 2019

बात उन दिनों की है , जब कहा जाता था कि ब्रिटिश – सूरज कभी अस्ताचल गामी नहीं होता । उसी क्रम में फिजी पर भी ब्रिटिश का अधिपत्य था । यहाँ की मुख्य फसल गन्ना के उत्पादन हेतु मजदूरों की समस्या विकट थी । फिजी की आदिम जातियों का रुझान गन्ने के उत्पादन की तरफ नहीं था . वे शिकार , जंगली फल व शहद के शौक़ीन थे ।…

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नवम्बर में होगा पहले चम्पारण शार्ट फ़िल्म फेस्टिवल का आयोजन

June 5, 2019

फिल्मेनिया एंटरटेनमेंट के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में फिल्मेनिया टीम व दिल्ली की मीडिया कंपनी हर्फ़ मीडिया और कंसेंट एलिवेटर्स के संयुक्त रूप से पहले चम्पारण शार्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करने जा रही है।ज्ञात हो कि फिल्मेनिया एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी शार्ट फिल्म्स पिछले चार सालों से नेशनल और अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में धूम मचा रही है. बैनर की पिछली शार्ट फिल्म ककक-किरण नाइजीरिया और लॉस…

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असली वाला “मौत का सौदागर” : “गांवों में भी बोतलबन्द पानी”

May 20, 2019

एक सरल सवाल है। अगर कोई देश अपनी आधी से अधिक आबादी को पीने का पानी मुहैय्या नहीं करा सकती, तो क्या वैसे देश को फेल्ड स्टेट मान लेना चाहिए? अगर जवाब नकारात्मक है तो भी ऐसा होना तय है। बस समय थोडा और अधिक लग जाए। ये अलग बात है कि हम शुतरमुर्ग बने हुए है। लेकिन, गढ्ढे में सिर धंसा लेने से शुतर्मुर्ग कहां बच पाता है? पिछले…

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नाथूराम गोडसे और हिन्दू आतंकवादी!!

May 18, 2019

हाँ तो पहले यह बता दूँ कि अपने असंख्य मित्रों से असहमति के बाद भी महात्मा गाँधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे को अपराधी मानता हूँ। यह मेरा व्यक्तिगत विचार है, और इसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा। पर रुकिये। आप जो नाथूराम गोडसे को पहला आतंकवादी कह रहे हैं न, तो आपकी औकात नहीं है यह कहने की… महात्मा गाँधी की हत्या के साल भर पहले भारत का विभाजन…

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समुद्र-मंथन : भारत का पहला श्रमिक विद्रोह !

March 7, 2019

ऐसा नहीं है कि हमारे देश में इतिहास लेखन की परंपरा नहीं रही है। हुआ यह है कि घटनाओं को चमत्कारिक रूप देने, अपने आश्रयदाता राजाओं या सामंतों को अतिमानव सिद्ध करने और शत्रुओं को निकृष्ट तथा अमानवीय दिखाने की कोशिश में इतिहास को तोड़ मरोड़कर ऐसे प्रस्तुत किया गया कि तर्क और विवेक की कसौटी पर वह कपोल कल्पनासे ज्यादा कुछ नहीं लगता। हमारे पुराण वस्तुतः इतिहास ही हैं।…

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देवी या शैतान की बेटी ?

March 7, 2019

‘महिला दिवस’ पर स्त्री सशक्तिकरण की तमाम चर्चाओं के बीच कुछ सवाल हमेशा से अनुत्तरित रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि समानता के संघर्ष में स्त्रियों ने लंबा रास्ता तय किया है। स्त्रियां अब मानसिक मजबूती के साथ आर्थिक स्वतंत्रता भी हासिल करने लगी हैं। उनके प्रति पुरुषों के दृष्टिकोण में बदलाव जरूर आया है, लेकिन यह बदलाव बहुत सीमित और बाहरी ज्यादा है। दरअसल स्त्रियों की असमानता की…

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