मातृ सदन की गंगा

February 20, 2020

गंगा की निर्मलता, अविरलता और खनन माफिया से उसकी मुक्ति के लिए स्वामी शिवानंद के नेतृत्व में हरिद्वार का मातृ सदन पिछले कई दशकों से संघर्षरत रहा है। इस सिलसिले में आश्रम ने कई कुर्बानियां दी हैं। गंगा को खनन माफियाओं से बचा लेने और उसकी सफाई के लिए एक कारगर नीति और क़ानून बनाने की मांग लेकर कुछ सालों पहले लगातार 114 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे आश्रम…

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गुरुजी! जो अकेला लड़ता रहा भारत में…

February 20, 2020

सन सैंतालीस, भारत विभाजन! तब संघचालक थे गुरुजी! जिन्ना के डायरेक्ट एक्शन के बाद से शुरू हुआ हिन्दुओं का कत्लेआम भारत विभाजन की घोषणा के बाद भी नहीं थम रहा था। गाँधी की कोई सुन नहीं रहा था और नेहरू सत्ता हस्तानांतरण की तैयारियों में व्यस्त थे। पाकिस्तान में हिन्दू भेड़-बकरियों की तरह काटे जा रहे थे। कठोर किन्तु सत्य है, तब पाकिस्तान के हिन्दुओं की सहायता के लिए केवल…

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तंजानिया की डाडा

February 20, 2020

तंजानिया 1964 में अस्तित्व में आया था। यह तंगानयिका व जंजीवार दो देशों को मिलाकर बना है। इसे संयुक्त गणराज्य कहते हैं। 1996 से इस गणराज्य की राजधानी देदोम है। यूं तो विदेशों में नौकरानी मिलना बहुत मुश्किल है, पर तंजानिया में यह सर्व सुलभ है। ये नौकरानियां सामान्य दरों पर काम करतीं हैं। इन्हें डाडा कहा जाता है। डाडा बहन को कहते हैं। डाडा बर्तन धोने से लेकर झाड़ू…

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ऐ मुहब्बत तेरे अंज़ाम पे रोना आया

February 19, 2020

डेढ़ दशक पहले प्रो. मटुकनाथ चौधरी और उनकी छात्रा जूली की प्रेमकथा देश की सर्वाधिक चर्चित प्रेमकथाओं में एक रही थी। तमाम सामाजिक, पारिवारिक और नैतिक विरोध झेलते हुए दोनों ने साथ रहना स्वीकार किया था। वह भी एक ऐसे वक्त में जब लिव इन रिलेशन प्रचलित नहीं हुआ था। हम सबने मीडिया में उदात्त प्रेम पर उनके सैकड़ों प्रवचन पढ़े-सुने थे। कुछ ही सालों में जाने क्या हुआ कि…

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सावधान! टिड्डी दल आन लाग रिया

February 19, 2020

ग्रीस की कहानी है ये। जरा ध्यान से सुनिए। बसंत का मौसम था। बहुत प्यारी गुनगुनी धूप खिली थी। टिड्डी आराम से धूप में पसरी थी। वह अपना कोई विशेष राग अलाप रही थी। चींटी काम कर रही थी। वह बुरे दिनों के वास्ते भोजन जुटा रही थी। टिड्डी ने उस पर फब्ती कसा था- “मौसी! तुम दिन भर केवल खाने की सोचती रहती हो! दुनिया में खाने के अलावा…

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जीवन और प्रेम का कवि

February 18, 2020

स्व. जीवनानंद दास (1899-1954) रवीन्द्रनाथ टैगोर के बाद बांग्ला के सबसे जनप्रिय कवियों में एक हैं। बांग्ला के वे पहले कवि हैं जिन्होंने टैगोर की कविता के रूमान और रहस्यवाद को अस्वीकार करने का साहस दिखाया और कविता की एक सर्वथा अलग शैली और काव्यभाषा को जन्म दिया। टैगोर की आलोचना के कारण उनकी कुछ कृतियों – झरा पालक, धूसर पांडुलिपि, बनलता सेन, महापृथिबी, रूपसी बांगला आदि को उनके जीवनकाल…

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बिल्लौरी आंखों वाली लड़की

February 18, 2020

उसकी आंखें बिल्लौरी थीं। मेरे क्लिनिक में उसके माता पिता लाए थे। उसके पिता ने बताया था कि उस लड़की ने एम बी ए किया है। एक मल्टी नेशनल कम्पनी में काम करती है। अच्छी खासी तनख्वाह है। इसके लिए बहुत से रिश्ते आ रहे हैं लेकिन यह हर रिश्ते को नकार रही है। हमने यहां तक पूछा कि इसकी नजर में कोई लड़का हो तो बताए। हम उसी से…

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‘प्रेम’ बोलो तो याद आयेगी कृष्ण की

February 17, 2020

वे कृष्ण, जो एक बार गोकुल छोड़ते हैं तो कभी मुड़ कर नहीं देखते भी गोकुल की ओर… न यमुना, न बृंदाबन, न कदम्ब, न राधा, कोई उन्हें दुबारा खींच नहीं पाता! मथुरा-गोकुल से अधिक दूर नहीं है हस्तिनापुर, कृष्ण सौ बार हस्तिनापुर गए पर गोकुल नहीं गए। क्यों? मुझे लगता है यदि कृष्ण दुबारा एक बार भी गोकुल चले गए होते तो उनके प्रेम की वह ऊंचाई नहीं रह…

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सरस्वती होने का अर्थ

February 17, 2020

सरस्वती हिन्दू धर्म की तीन पौराणिक महानायिकाओं या तीन प्रमुख देवियों-लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती में से एक हैं। लक्ष्मी जहां धन, वैभव और ऐश्वर्य की और दुर्गा शक्ति की देवी मानी जाती है, सरस्वती को विद्या और कलाओं की अधिष्ठात्री देवी का दर्ज़ा हासिल है। सरस्वती को शारदा, शतरूपा, वीणावादिनी, वीणापाणि, वाग्देवी, वागेश्वरी, भारती आदि कई नामों से भी पुकारा जाता है। वे शुक्लवर्ण, श्वेत वस्त्रधारिणी, वीणावादनतत्परा तथा श्वेतपद्मासना हैं।…

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30 साल तक लड़ता रहा हीरो ओंडा

February 17, 2020

उसका नाम हीरो ओण्डा था। 20 वर्ष की उम्र में ही वह सेना में भर्ती हो गया। उसे वहां Imperial Army Intelligence Officer के लिए चुना गया। हीरो ओण्डा को बताया गया कि विषम परिस्थितियों में कैसे जिंदा रहा जाता है! कैसे दुश्मन से सम्बंधित जानकारी एकत्र की जाती है! कैसे अकेले सुनसान बियाबान में जिंदा रहा जाता है! कैसे मौका मिलने पर दुश्मन को मारना है और कैसे भाग…

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