जब औरत के जीवन में कोई दूसरा आ जाए

January 22, 2020

समाचार पत्रों में अक्सर खबरें छपती रहतीं हैं दो बच्चों की मां एक युवक के साथ फरार। ऐसा कई कारणों से होता है। बहुधा इस तरह के मामलों में जिस्मानी ताल्लुक हाॅवी रहता है। कलकत्ता में हमारे पड़ोस में एक औरत अपने बच्चों के साथ किसी नशेड़ी युवक के साथ भाग गयी। बात जब जिस्म से पेट पर आई तो आटे—दाल का भाव मालूम हुआ और उस औरत को अपने…

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बदहाल मिर्ज़ापुर का किला चुनार

January 21, 2020

56 साल ईसा पूर्व उज्जैन के शासक विक्रमादित्य ने अपने बैरागी बड़े भाई भर्तृहरि के लिए यह एकांत तपस्थली बनवाई थी। इस किले में आज भी भर्तृहरि की समाधि मौजूद है। यहाँ एक गुफ़ा है जो भर्तृहरि की गुफा के नाम से मशहूर है। पहले इस किले का नाम चरणादृगढ़ था, जो कालांतर में अपभ्रंशित हो चुनार हो गया। 18 अप्रैल सन् 1924 को चुनार के किले में एक शिलालेख…

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मरे हुए लोग भी होंगे जिंदा!

January 20, 2020

आए दिन ऐसा सुनने को मिलता है कि मरा हुआ व्यक्ति जिंदा हो गया। इसे ईश्वर का चमत्कार कहेंगे। इन मरे हुए लोगों ने जिंदा होकर अपना अनुभव भी साझा किया है। मृत शरीर को छोड़ रही आत्मा बहुत सुकून महसूस कर रही होती है। परिवार के लोग रो रहे होते हैं। आत्मा शरीर छोड़कर किसी अंधेरे संकरे मार्ग से प्रकाश की ओर बढ़ रही होती है। तभी उस आत्मा…

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चींटी चढ़ी पहाड़ पर

January 18, 2020

बचपन में मैंने एक बड़े कीड़े को खेल—खेल में मार दिया था। उसके मृत शरीर के पास एक चींटी आयी। उसे सूंघा और एक दिशा में चल पड़ी। मैंने उसका पीछा किया। वह एक बिल में जा घुसी। एक सेकण्ड बाद ही वह फिर बाहर निकली। उसके पीछे चींटियों का काफिला आ रहा था। चींटियां कतार में चल रहीं थीं। आगे चलने वाली चींटी एक तरह का रसायन छोड़ती है,…

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सावित्री बाई और फ़ातिमा शेख

January 3, 2020

देश में स्त्री शिक्षा की अलख जगाने वाली और स्त्रियों के अधिकारों की योद्धा सावित्री बाई फुले की जयंती पर आज देश उन्हें याद कर रहा है। हां, यह देखकर तकलीफ जरूर होती है कि स्त्री शिक्षा, विशेषकर मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा के लिए जीवन भर उनके साथ कदम से कदम मिलाकर काम करने वाली फ़ातिमा शेख को लोगों ने विस्मृत कर दिया। फ़ातिमा जी के बगैर सावित्री जी अधूरी…

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गर्भ के दौरान जब अखाद्य चीजें खाने का मन करे

January 3, 2020

मातृत्व प्रकृति की एक नैसर्गिक देन है। मां बनकर ही औरत सम्पूर्ण औरत बनती है। पेट में बच्चे की हलचल को महसूस करना माँ को एक अलग दुनिया में ले जाता है। इस दुनिया में आ जाने पर बच्चे की मुलायम अंगुलियों की छुअन से माँ रोमांचित हो जाती है। बच्चे का चुटुर चुटुर दूध पीने का अंदाज और लात फेंकना माँ को आनंद से परिपूर्ण कर देता है। मातृत्व…

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फिर नया साल

January 2, 2020

हर साल नए साल की आहट के साथ ऐसा हंगामा खड़ा होता है कि लगने लगता है, आने वाला साल कुछ खास होने वाला है। पिछले साल से कुछ बेहतर, कुछ सुंदर, कुछ ज्यादा मानवीय। दरअसल होता-वोता कुछ नहीं। इस साल भी नया कुछ नहीं होने वाला है। सब वही रहेगा-वही समाज, वही रहनुमा, वही सियासत, वही महंगाई, वही सांप्रदायिकता, वही हिन्दू-मुस्लिम, वही हिंदुस्तान-पाकिस्तान। हां, इस बेमतलब के हंगामे में…

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लाल इमली इतिहास बनने के कगार पर

December 30, 2019

कानपुर की शान लाल इमली को एक बीमार यूनिट घोषित किया जा चुका है। यह देश के 46 बीमार सरकारी उपक्रमों में शामिल है। इनमें से कुछ उपक्रमों को बंद करने और कुछ को निजी हाथों में देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। लाल इमली मिल में उत्पादन दिसंबर 2013 से बंद है। इस मिल की स्थापना वर्ष 1876 में हुई थी। उस समय इस मिल का नाम “कानपोरे वुलन मिल्स”…

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जयपुरी रजाइयां

December 27, 2019

बहुत पहले एक कहानी पढ़ी थी, जिसमें एक बेटा अपनी मां को जयपुरी रजाई आने वाली सर्दियों में दिलाने का वादा करता है, लेकिन दुर्योग से माँ सर्दियों से पहले गुजर जाती है। बेटा दुःखी हो जाता है। जयपुरी रजाई मिलने से मां को जो अवर्चनीय खुशी मिलती उसे देखने से बेटा बंचित रह गया। जब बात रजाईयों की आती है तो सबके जहन में सिर्फ जयपुरी रजाइयां ही आती…

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अनचाहे उगती हैं बेटियाँ…

December 13, 2019

मेरी प्रिय कवयत्रियों में से एक रूपम मिश्र जी ने लिखा है, “बेटों की चाह में अनचाहे उग आती हैं बेटियाँ…” क्या सचमुच? शहरों के झूठ से पीछा छुड़ा कर गाँव को निहारने पर दिखता है, इस प्रश्न के उत्तर में ‘हाँ’ का प्रतिशत ‘नहीं’ से बहुत अधिक है। पर तनिक सोचिये न! बेटियाँ न हों तो जीवन में क्या बचेगा? बाहर की दुनिया से रोज पराजित हो कर थका-हारा…

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