पर्यावरण का लोकपर्व : सामा चकेवा

November 9, 2019

​हमारे देश में शास्त्रीय पर्वों और उत्सवों के अतिरिक्त रंग-विरंगे लोक पर्वों की एक लंबी श्रृंखला है। लोक आस्था के कुछ सबसे खूबसूरत त्योहारों में छठ के अलावा बिहार के मिथिला क्षेत्र में हर साल मनाए जाने वाले सामा चकेवा की गिनती होती है। भाई-बहन के कोमल और प्रगाढ़ रिश्ते के बहाने प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को बेहद मासूम अभिव्यक्ति देने वाला यह लोकपर्व समृद्ध मिथिला संस्कृति की पहचान…

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टीन के बाक्स के साथ सफर (2)

November 9, 2019

श्रीनगर से हमने जम्मू की बस पकड़ी। होल्डाल और टीन का बक्सा बस की छत पर रखे गये। मुझे टीन के बक्स की हर पल चिंता रहती। बनिहाल के आगे चेकिंग चल रही थी। हमारे बस की भी चेकिंग हुई। एक सिपाही बस की छत पर चढ़ा। उसने वहीं से आवाज दी। लोहे का ट्रंक किसका है? मैंने जिंदगी में पहली बार ट्रंक शब्द सुना। मैं चुप रहा। जब नीचे…

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वो अंदाज़ हमें दे दे, ठाकुर

November 8, 2019

हिन्दी सिनेमा के सौ साल से ज्यादा लम्बे इतिहास में जिन अभिनेताओं ने अभिनय की नई-नई परिभाषाएं गढ़ी, उनमें स्वर्गीय संजीव कुमार उर्फ़ हरिभाई जरीवाला एक प्रमुख नाम है। अपने भावप्रवण चेहरे, विलक्षण संवाद-शैली और अभिनय में विविधता के लिए विख्यात संजीव कुमार एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, अभिनय के एक स्कूल माने जाते हैं। जब भी हिंदी फिल्मों में उत्कृष्ट अभिनय के कुछ मीलस्तंभ गिने जाएंगे, ‘कोशिश’ का गूंगा-बहरा…

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अलगोजा तेरे रूप अनेक

October 22, 2019

1-जब मेरा अलगोजा बोले अलगोजा एक वाद्य यंत्र है, जो बांसुरी की तरह होता है। इसका मुंह कलम की तरह कटा होता है। दो अलगोजों के कटे भाग को मुंह में रख फूंक के माध्यम से इन्हें बजाया जाता है। इसमें सात छिद्र होते हैं। अलगोजा बजाते समय इन छिद्रों पर अंगुलिया ऊपर नीचे की जाती हैं, जिससे मधुर धुन निकलती है। अलगोजा बजाना आसान नहीं होता। दो अलगोजों में…

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दुनिया की सबसे करुण प्रेमकथा

October 21, 2019

इन दिनों खोज-खोजकर प्राचीन विश्व की कुछ मिथकीय प्रेम-कहानियों के बारे में पढ़ रहा हूं। इनमें से ज्यादातर कहानियों का अंत बहुत त्रासद हुआ है। दुनिया भर में कही-सुनी जानेवाली ऐसी त्रासद प्रेमकथाओं में आयरलैंड की एक प्राचीन कहानी का ज़िक्र प्रमुख रूप से होता है। इस प्रेमकथा का नायक प्राचीन आयरलैंड का एक योद्धा ओईसीन है। ओईसीन एक दिन शिकार की तलाश में जंगल की खाक छान रहा था…

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रसूल मियाँ-एक गुमनाम जिंदगी

October 19, 2019

भिखारी ठाकुर से बड़े व महेंदर मिसिर के समकालीन रहे रसूल मियाँ का जन्म गोपालगंज विहार के जिगना मजार टोला के एक मुस्लिम अंसारी परिवार में हुआ था. उनके पिता फतिंगा अंसारी अंग्रेजी सेना कोलकाता में बावर्ची हुआ करते थे. बड़े होने पर रसूल मियाँ भोजपुरी में गीत लिखने लगे थे. वे चौथी या पांचवीं जमात तक पढ़े थे, लेकिन भाषा पर उनकी पकड़ काफ़ी मजबूत थी. वे हिन्दू—मुस्लिम एकता…

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संसार का सबसे चौड़ा बरगद का पेड़

October 17, 2019

हाबड़ा, पश्चिम बंगाल में स्थित आचार्य जगदीश चंद बसु बोटेनिक गार्डेन में विश्व का सबसे चौड़ा बरगद है. इस बरगद का जीवन लगभग 260 साल से ऊपर है. इसका कोई तथ्यात्मक प्रमाण नही है कि यह कब अस्तित्व में आया था, किन्तु 17वीं शताब्दी के यात्रा बृतान्तों में इसका जिक्र मिलता है. यह तकरीबन 4 एकड़ एरिया में फैला हुआ है. इस बरगद के पेड़ के चारों तरफ 330 मीटर…

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नीलकण्ठ तुम नीले ही रहियो

October 16, 2019

जब समुद्र मंथन हो रहा था तो उसमें से विष का पात्र भी निकला था। विष कोई पीना नहीं चाहता था। इसलिए विष पीने का जिम्मा भगवान शिव ने उठाया। वे हलाहल विष को पी गये। विष पीने से उनका कुछ नहीं बिगड़ा। सिर्फ उनका कण्ठ नीला पड़ गया था। इसीलिए शिव को नील कण्ठ भी कहा जाता है। मानवता के कल्याण के लिए शिव का विषपान जरूरी था। कहते…

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भानुमती ने कुनबा जोड़ा…

October 14, 2019

भानुमती कम्बोज के राजा चन्द्रवर्मा की पुत्री थी। वह अत्यंत रुपवती थी। पिता ने इसके लिए योग्य वर की तलाश बहुत की। योग्य वर न मिलने पर चन्द्रवर्मा ने स्वय॔वर का आयोजन किया। इस आयोजन में शिशुपाल, दुर्योधन, जरासंध और कर्ण जैसे महारथी शामिल हुए थे। जब भानुमती दासियों से घिरी स्वयंवर सभा में पहुँची तो उसे देखकर सभा के लोग चकित रह गये। सबकी आंखों में उसके रूप लावण्य…

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बेगम ज़ीनत महल की विरासत

October 11, 2019

दिल्ली के तमाम ऐतिहासिक इमारतों में जिस एक इमारत की सबसे ज्यादा उपेक्षा हुई, वह है चांदनी चौक के लाल कुआं इलाके के फराशखाने में स्थित बेगम जीनत महल की हवेली। अपने भीतर 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम की बेशुमार यादें समेटे इस महल को आखिरी मुग़ल बादशाह, शायर और स्वतंत्रता सेनानी बहादुर शाह जफ़र की तीसरी और उनकी सबसे प्रिय बेगम जीनत महल ने 1846 में बनवाया था। लगभग…

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