लंबी प्रतीक्षा का अंत

November 9, 2019

खुश होइये कि चार सौ सत्तासी वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा का अंत हुआ। यह हमारी या आपकी विजय नहीं, यह भारत की विजय है। राम तो यहाँ के कण-कण में हैं, आज भारत का स्वाभिमान लौटा है। यहाँ न कोई पक्ष हारा है न कोई पक्ष जीता है, आज भारतीय स्वाभिमान की गर्दन पर रखी गयी समरकन्द की तलवार टूटी है। गर्व कीजिये कि आपने आज का दिन देखा है।…

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मैं,  रावण !

October 7, 2019

सभी भारतवासियों को दशहरे की शुभकामनाएं। आज का दिन प्रभु राम के हाथों मेरी पराजय और मृत्यु का दिन है। यह मेरे लिए उत्सव का दिन है क्योंकि एक योद्धा के लिए विजय और पराजय से ज्यादा बड़ी बात उसका पराक्रम है। मुझे गर्व है कि अपने जीवन के अंतिम युद्ध में मैं एक योद्धा की तरह लड़ा और मरा। मेरे बारे में यह धारणा है कि मुझमें अहंकार था…

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नवरात्र : स्त्रीत्व का उत्सव

October 4, 2019

देवी दुर्गा की आराधना के नौ-दिवसीय आयोजन शारदीय नवरात्र का आरम्भ हो गया है। देवी दुर्गा के स्वरूप के संबंध में हमारे देश में अलग-अलग मान्यताएं हैं। पौराणिक साहित्य में उन्हें आदिशक्ति माना गया है। ऐसी दिव्य शक्ति जिसने कई बार असुर शक्ति के समक्ष कमजोर पड़े देवताओं की रक्षा की और असुरों का विनाश कर देवताओं के स्वर्ग को सुरक्षित किया। वे हिन्दुओं के शाक्त सम्प्रदाय की प्रमुख देवी…

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न जाने यह चाइनीज अफीम का नशा कब उतरेगा ?

September 7, 2019

हमारा चन्द्रयान मिशन अपने लक्ष्य से भटक गया है, तो हमारे ही देश के कुछ रहमान, फारुख, खान और बनर्जी इस बात का जश्न मना रहे हैं। हमारे देश के भीतर ही अघोषित रूप से एक दूसरा देश रहता है जो हमारी असफलताओं पर जश्न मनाता है, खुश होता है। ये वही लोग हैं जो देश के पूर्व प्रधानमंत्री की मृत्यु पर उन्हें गाली देते हैं, प्रधानमंत्री की मृत्यु के…

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गोकुल रोया कृष्ण के लिए लेकिन नंद…?

August 26, 2019

कृष्ण गोकुल से जा चुके थे, और साथ ही गोकुल से जा चुका था आनंद। लोगों की हँसी जा चुकी थी, आपसी चुहल जा चुकी थी, पर्व-त्योहार-उत्सव जा चुके थे। गोकुल में यदि कुछ बचा था तो केवल सिसकियां और आह बची थी। पूरे गोकुल में एक ही व्यक्ति था जो सबकुछ सामान्य करने का प्रयत्न करता फिरता था, वे थे नंद। किसी ने उन्हें उदास नहीं देखा, किसी ने…

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फिजी द्वीप पर हिंदी का अलख जगाते गिरमिटिया

June 6, 2019

बात उन दिनों की है , जब कहा जाता था कि ब्रिटिश – सूरज कभी अस्ताचल गामी नहीं होता । उसी क्रम में फिजी पर भी ब्रिटिश का अधिपत्य था । यहाँ की मुख्य फसल गन्ना के उत्पादन हेतु मजदूरों की समस्या विकट थी । फिजी की आदिम जातियों का रुझान गन्ने के उत्पादन की तरफ नहीं था . वे शिकार , जंगली फल व शहद के शौक़ीन थे ।…

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समुद्र-मंथन : भारत का पहला श्रमिक विद्रोह !

March 7, 2019

ऐसा नहीं है कि हमारे देश में इतिहास लेखन की परंपरा नहीं रही है। हुआ यह है कि घटनाओं को चमत्कारिक रूप देने, अपने आश्रयदाता राजाओं या सामंतों को अतिमानव सिद्ध करने और शत्रुओं को निकृष्ट तथा अमानवीय दिखाने की कोशिश में इतिहास को तोड़ मरोड़कर ऐसे प्रस्तुत किया गया कि तर्क और विवेक की कसौटी पर वह कपोल कल्पनासे ज्यादा कुछ नहीं लगता। हमारे पुराण वस्तुतः इतिहास ही हैं।…

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सतबहना ।

March 5, 2019

satbahnaसत बहना नाम तो इन्हें अंग्रेजी में दिया गया है, क्योंकि ग्रे रंग की ये चिड़िया हमेशा छः से ज्यादा के झुण्ड में रहती है । चंबल में इन्हें सतबहना के नाम से ही जाना जाता है। जबकि इनका जूलॉजिकल नाम ग्रे बेबलर है। इनकी चहचहाहट से चंबल की घाटी गूंजती है। इन सात चिड़ियों के झुंड चंबल के किनारे जल-किलोल भी करते देखे जाते हैं। जबकि देवरी के डॉल्फिन-घड़ियाल…

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महिला बैंक लोन वसूली गैंग ।

February 18, 2019

जी हाँ , पुरुषों द्वारा किये जाने वाला यह काम महिलाएं अब बेहतर ढंग से कर रहीं हैं । रिकवरी एजेंट हट्टे कट्ठे लोग हुआ करते थे । लेकिन एक रिकवरी एजेंसी ने एजेंट के रूप में चन्द्र बदना मृगलोचना जैसी हसीन लड़कियों का एक ग्रुप तैयार किया है । इन नाजुक और खूबसूरत हसीनों के इरादे काफी सख्त होते हैं । सिर्फ बैंकों के लिए रिकवरी का काम करने…

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रूखा-सूखा, फिर भी वसंत !

February 11, 2019

वसंत प्रेम और रूमान का मौसम है। यह वह मौसम है जब प्रकृति का सौन्दर्य अपने शबाब पर होता है। प्रकृति में जब नवयौवन उतर आए तो प्रकृति की संतानें वसंत के राग से कैसे बची रह सकती है ? मान्यता है कि वसंत में लगभग सभी जीवित प्राणियों में कुछ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं। यह परिवर्तन सबसे ज्यादा पक्षियों और मनुष्यों में होता है। शुरुआत करते…

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