न जाने यह चाइनीज अफीम का नशा कब उतरेगा ?

September 7, 2019

हमारा चन्द्रयान मिशन अपने लक्ष्य से भटक गया है, तो हमारे ही देश के कुछ रहमान, फारुख, खान और बनर्जी इस बात का जश्न मना रहे हैं। हमारे देश के भीतर ही अघोषित रूप से एक दूसरा देश रहता है जो हमारी असफलताओं पर जश्न मनाता है, खुश होता है। ये वही लोग हैं जो देश के पूर्व प्रधानमंत्री की मृत्यु पर उन्हें गाली देते हैं, प्रधानमंत्री की मृत्यु के…

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गोकुल रोया कृष्ण के लिए लेकिन नंद…?

August 26, 2019

कृष्ण गोकुल से जा चुके थे, और साथ ही गोकुल से जा चुका था आनंद। लोगों की हँसी जा चुकी थी, आपसी चुहल जा चुकी थी, पर्व-त्योहार-उत्सव जा चुके थे। गोकुल में यदि कुछ बचा था तो केवल सिसकियां और आह बची थी। पूरे गोकुल में एक ही व्यक्ति था जो सबकुछ सामान्य करने का प्रयत्न करता फिरता था, वे थे नंद। किसी ने उन्हें उदास नहीं देखा, किसी ने…

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फिजी द्वीप पर हिंदी का अलख जगाते गिरमिटिया

June 6, 2019

बात उन दिनों की है , जब कहा जाता था कि ब्रिटिश – सूरज कभी अस्ताचल गामी नहीं होता । उसी क्रम में फिजी पर भी ब्रिटिश का अधिपत्य था । यहाँ की मुख्य फसल गन्ना के उत्पादन हेतु मजदूरों की समस्या विकट थी । फिजी की आदिम जातियों का रुझान गन्ने के उत्पादन की तरफ नहीं था . वे शिकार , जंगली फल व शहद के शौक़ीन थे ।…

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समुद्र-मंथन : भारत का पहला श्रमिक विद्रोह !

March 7, 2019

ऐसा नहीं है कि हमारे देश में इतिहास लेखन की परंपरा नहीं रही है। हुआ यह है कि घटनाओं को चमत्कारिक रूप देने, अपने आश्रयदाता राजाओं या सामंतों को अतिमानव सिद्ध करने और शत्रुओं को निकृष्ट तथा अमानवीय दिखाने की कोशिश में इतिहास को तोड़ मरोड़कर ऐसे प्रस्तुत किया गया कि तर्क और विवेक की कसौटी पर वह कपोल कल्पनासे ज्यादा कुछ नहीं लगता। हमारे पुराण वस्तुतः इतिहास ही हैं।…

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सतबहना ।

March 5, 2019

satbahnaसत बहना नाम तो इन्हें अंग्रेजी में दिया गया है, क्योंकि ग्रे रंग की ये चिड़िया हमेशा छः से ज्यादा के झुण्ड में रहती है । चंबल में इन्हें सतबहना के नाम से ही जाना जाता है। जबकि इनका जूलॉजिकल नाम ग्रे बेबलर है। इनकी चहचहाहट से चंबल की घाटी गूंजती है। इन सात चिड़ियों के झुंड चंबल के किनारे जल-किलोल भी करते देखे जाते हैं। जबकि देवरी के डॉल्फिन-घड़ियाल…

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महिला बैंक लोन वसूली गैंग ।

February 18, 2019

जी हाँ , पुरुषों द्वारा किये जाने वाला यह काम महिलाएं अब बेहतर ढंग से कर रहीं हैं । रिकवरी एजेंट हट्टे कट्ठे लोग हुआ करते थे । लेकिन एक रिकवरी एजेंसी ने एजेंट के रूप में चन्द्र बदना मृगलोचना जैसी हसीन लड़कियों का एक ग्रुप तैयार किया है । इन नाजुक और खूबसूरत हसीनों के इरादे काफी सख्त होते हैं । सिर्फ बैंकों के लिए रिकवरी का काम करने…

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रूखा-सूखा, फिर भी वसंत !

February 11, 2019

वसंत प्रेम और रूमान का मौसम है। यह वह मौसम है जब प्रकृति का सौन्दर्य अपने शबाब पर होता है। प्रकृति में जब नवयौवन उतर आए तो प्रकृति की संतानें वसंत के राग से कैसे बची रह सकती है ? मान्यता है कि वसंत में लगभग सभी जीवित प्राणियों में कुछ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं। यह परिवर्तन सबसे ज्यादा पक्षियों और मनुष्यों में होता है। शुरुआत करते…

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बिरसा मुंडा : आदिवासियों और स्वतंत्रता के महानायक

January 11, 2019

‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’ यानि ‘हमारा देश, हमारा राज’ “मैं तुम्हें अपने शब्द दिये जा रहा हूं, उसे फेंक मत देना, अपने घर या आंगन में उसे संजोकर रखना। मेरा कहा कभी नहीं मरेगा। उलगुलान! उलगुलान! और ये शब्द मिटाए न जा सकेंगे। ये बढ़ते जाएंगे। बरसात में बढ़ने वाले घास की तरह बढ़ेंगे। तुम सब कभी हिम्मत मत हारना। उलगुलान जारी है।” ये पंक्तियां जेल जाते समय बिरसा ने…

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फितूर होता है हर उम्र में जुदा जुदा ।

January 10, 2019

फितूर अरबी का शब्द है । फितूर का शाब्दिक मतलब तो पागलपन होता है , पर फितूर रखने वाले को हम पागल नहीं कह सकते । वैसे फितूर रखने वाले लोग जुनूनी होते हैं । वे अपने फितूर के लिए पागलपन की हद तक जा सकते हैं , लेकिन वे पागलपन की हद को पार नहीं करते । वे अपनी हद में रहते हैं । पूरे होशो हवाश में रहते…

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लोग क्या कहेंगे ?

January 9, 2019

आजकल की सबसे बड़ी बीमारी है – लोग क्या कहेंगे ? यह वाक्य हमारे जेहन में इस तरह रच बस गया है कि इसे निकालना नितांत हीं मुश्किल है । आपने वह मशहूर कहानी जरुर सुनी होगी जिसमें बाप बेटे एक गधे के साथ सफर कर रहे होते हैं । लोगों के कहने पर कभी बाप गधे पर बैठा तो कभी बेटा । कभी दोनों एक साथ बैठे । फिर…

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