नवम्बर में होगा पहले चम्पारण शार्ट फ़िल्म फेस्टिवल का आयोजन

June 5, 2019

फिल्मेनिया एंटरटेनमेंट के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में फिल्मेनिया टीम व दिल्ली की मीडिया कंपनी हर्फ़ मीडिया और कंसेंट एलिवेटर्स के संयुक्त रूप से पहले चम्पारण शार्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करने जा रही है।ज्ञात हो कि फिल्मेनिया एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी शार्ट फिल्म्स पिछले चार सालों से नेशनल और अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में धूम मचा रही है. बैनर की पिछली शार्ट फिल्म ककक-किरण नाइजीरिया और लॉस…

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नाथूराम गोडसे और हिन्दू आतंकवादी!!

May 18, 2019

हाँ तो पहले यह बता दूँ कि अपने असंख्य मित्रों से असहमति के बाद भी महात्मा गाँधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे को अपराधी मानता हूँ। यह मेरा व्यक्तिगत विचार है, और इसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा। पर रुकिये। आप जो नाथूराम गोडसे को पहला आतंकवादी कह रहे हैं न, तो आपकी औकात नहीं है यह कहने की… महात्मा गाँधी की हत्या के साल भर पहले भारत का विभाजन…

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आखिर क्यों देखे फिल्म “मणिकर्णिका”……

January 28, 2019

कंगना राणावत की फ़िल्म “मणिकर्णिका”!  सच कहें तो ‘महारानी झाँसी’ जैसे चरित्र को परदे पर उतारना बड़ा कठिन कार्य है। धन्यवाद के पात्र हैं वे लोग जिन्होंने यह फ़िल्म बनाने की सोची। देखी जानी चाहिए यह फ़िल्म, ताकि समझ सकें हम अपने इतिहास को… मणिकर्णिका देखिये, ताकि आप जान सकें कि भारत की पवित्र भूमि ने कैसी-कैसी बेटियों को जन्म दिया है। मणिकर्णिका देखिये, ताकि भविष्य में जब कोई मूर्ख…

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सर्व भाषा ट्रस्ट का प्रथम वार्षिकोत्सव सम्पन्न

December 27, 2018

भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए समर्पित संस्था सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में प्रथम वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया।अपने स्वागत भाषण में सर्व भाषा ट्रस्ट की परिकल्पना और उसकी योजनाओं पर अध्यक्ष अशोक लव ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आगामी योजनाओं की भी चर्चा की। सचिव रीता मिश्रा व समन्वयक केशव मोहन पाण्डेय ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि…

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फाहित्य…

July 28, 2018

राहुल जी ने सदन में आँख मार कर भारतीय लोकतंत्र को एक नई दिशा दी है। वैसे यह भी एक सच्चाई है कि भारत की संसद में मारने के लिए केवल यही एक “आँख’ ही बची थी, सदन ने देश का शेष सब कुछ तो बहुत पहले ही मार दिया था। कुछ दिन पूर्व एक नवोदित अभिनेत्री ने आँख मार कर देश का दिल लूटा था, आज राहुल जी ने आँख…

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फिर एक कहानी और श्रीमुख “रहस्य”

July 20, 2018

27 जनवरी सन 1556 ई. लगभग एक तिहाई भारत पर शासन कर रहा हुमायूँ अपने सबसे विश्वासपात्र सेवक बैरम खाँ की बलिष्ठ जंघा पर सर रखे अंतिम साँसे गिन रहा था। हुमायूँ और बैरम दोनों की आँखों में जल भर आया था। अपनी अनियंत्रित उल्टी साँसों से लड़ते हुए हुमायूँ ने बैरम खाँ की ओर एक निरीह दृष्टि डाल कर कहा- कुछ कहूँ तो मानोगे बैरम? बैरम खाँ ने रोते…

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गरीब लोगों का अमीर देश बनता भारत

January 20, 2018

कहा यह जाता है कि इंग्लैंड में शुरू हुई पहली औद्योगिक क्रांति के दौरान कोयले और स्टीम की शक्ति का इस्तेमाल किया गया और इस क्रांति के कारण शक्ति का केंद्र यूरोप की तरफ झुक रहा| इतिहास से यह भी ज्ञात होता है कि इससे पहले 17वीं शताब्दी तक भारत और चीन को सबसे धनी देशों में गिना जाता था| दूसरी औद्योगिक क्रांति के दौरान बिजली और ईंधन का इस्तेमाल…

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अश्लीलता के खिलाफ हो रहे विरोध ब्राम्हणवादी एप्रोच नहीं बल्कि एक संघर्ष है

January 16, 2018

वैसे तो भोजपुरी में फ़ैल रहे अश्लीलता के विरोध में काफी लम्बे समय से संघर्ष चल रहा है| लेकिन हाल के दिनों में यह मामला काफी जोर पकड़ चुका है| तमाम लोग खुल के सामने आ रहे है और अपने-अपने पक्ष को लिख रहे है| इसका एक माध्यम लल्लनटॉप बना है| लेख और विडियो के माध्यम से पक्ष और विपक्ष काफी जोरों पर है| इस बार केंद्र में भोजपुरी गायिका…

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भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का भविष्य

December 18, 2017

भारत सरकार द्वारा एक दिशा-निर्देश दिया गया है जिसमे यह कहा गया है कि 2030 के बाद सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ ही बेचीं जाएंगी| ऑटोमोटिव इंडस्ट्रीज में एकदम से खलबली मची है| सब अपने अपने रास्ते अख्तियार कर रहे है जिससे वो आगे की रोड मैप तैयार कर सके| ऑटोमोटिव इंडस्ट्रीज का ध्यान सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जा टिका है| ऐसे में बहुत सारे सवाल खड़े हो…

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हिन्दी साहित्य और गधावाद

September 19, 2017

देश के घोषित और पोषित साहित्यकारों ने एक बार फिर गधे को विमर्श के केंद्र में ला दिया है। अब इसे स्वनामधन्य साहित्यकारों की बौद्धिकता समझें या गदहपन, पर विमर्श को ऊंची अट्टालिकाओं से खींच कर गधे के पांव में लाना उन्हें नमन के योग्य बनाता है। बहुत पहले हिन्दी के जनवादी शायर अदम गोंडवी ने कहा था- जो ग़ज़ल मासूक के जलवों से वाकिफ हो गयी, उसको अब बेवा…

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