मेलाघुमनी के गीत !

October 12, 2018

अभी कुछ दिनों पहले यात्रा के क्रम में रास्ते में एक छोटे-से ग्रामीण मेले को देखकर मेले के बचपन वाले तिलिस्म को जगाने की भरसक कोशिश की। थोड़ी देर मेले में घूमा। जलेबी और हवा मिठाई भी खाई। मगर वह जादू नदारद था। शायद मेला देखने के लिए अब न बचपन वाली आंखें थीं और न उसे महसूस करने के लिए बच्चों वाला दिल। बहुत याद आए मेरे शहर गोपालगंज…

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परदेसियों से ना अंखिया मिलाना ।

October 11, 2018

जाड़ भोटिया उत्तरकाशी के नीलांग और जादूंग सीमांचल में बसे हुए थे । जब 1962 में चीन से लड़ाई लगी तो ये भागकर बोगारी और डुण्डा गांवों में बस गये । हांलाकि इनकी प्रकृति व शारीरिक बनावट तिब्बतियों से मिलती जुलती है , पर ये अपने को भारतीय राजपूत मानते हैं । बोगारी भी काफी ऊंचाई पर स्थित है । ऐसे में ठण्ड अधिक पड़ने पर बोगारी के लोग भी…

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स्त्रीत्व का उत्सव !

October 10, 2018

आज स्त्री-शक्ति के प्रति सम्मान के नौ दिवसीय आयोजन शारदीय नवरात्रि का आरम्भ हो रहा है। यह अवसर है नमन करने का उस सृजनात्मक शक्ति को जिसे ईश्वर ने स्त्रियों को सौंपा है। उस अथाह प्यार, ममता और करुणा को जो कभी मां के रूप में व्यक्त होता है, कभी बहन, कभी बेटी, कभी मित्र, कभी प्रिया और कभी पत्नी के रूप में। दुर्गा पूजा, गौरी पूजा और काली पूजा…

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खुशमिजाज लोगों की दुनियां ।

October 8, 2018

कभी अनिल कुम्बले ने कहा था , जो खुशमिजाजी का मेल धोनी और विराट में है वही मेल दोनों को टीम लीडर बनाती है । खुशमिजाजी भारत की भी कभी 2005 में चौथे पायदान पर थी । फिर 2013 में कूदता फांदता हमारा प्यारा भारत 113 वें पायदान पर पहुंच गया । अब जब कि 2018 का साल आया है तो हमारी यह खुशमिजाजी 133 वें पायदान पर जा पहुंची…

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हारे को हरि नाम !

October 6, 2018

अपने कार्यकाल के साढ़े चार वर्षों बाद भी देश की भाजपा सरकार के पास अगले चुनाव के पहले मतदाताओं को आकर्षित करने लायक कुछ भी नहीं है। अपने कार्यकाल में गरीबों और मध्यवर्ग को लूटकर कॉर्पोरेट घरानों की झोलियां भरने वाली यह सरकार आर्थिक, सामाजिक और कश्मीर नीति के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है। देश की अर्थव्यवस्था टूटन के कगार पर है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की कीमतें…

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धड़क जाए गीतों की दुनियां जो कोई शब्द सजा दे ।

October 4, 2018

बोल खूबसूरत हों तो गीतों में चार चांद लग जाते हैं । सबसे अहम चीज भाषा होती है । भाषा शब्दों से बनती है । शब्द गीतों के लिए उपहार होते हैं । कुछ शब्द ऐसे होते हैं , जिन्हें लाख जतन करें वे हटते नहीं हैं , वे डटे रहते हैं । उनके एवज में कोई दूसरा शब्द वहां फिट हीं नहीं बैठता । शब्दों की बाजीगरी में जिसको…

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जीते जी दूसरी दुनिया में प्रवेश !

October 3, 2018

कहा जाता है कि हमारी दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां से किसी दूसरी दुनिया में प्रवेश संभव है। दुनिया भर के आध्यात्मिक साहित्य ऐसे उल्लेखों से भरे पड़े हैं कि पृथ्वी पर कुछ ऐसी रहस्यमय, लेकिन अदृश्य गुफाएं हैं जिनमें प्रवेश करते ही कोई दूसरी दुनिया या लोक में पहुंच जा सकता है। इसी रहस्यमय रास्ते से दूसरी दुनिया के लोग भी कभी-कभी इस पृथ्वी पर आते…

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गली में फिर चांद निकला ।

September 28, 2018

आज से 450 करोड़ वर्ष पहले हमारी पृथ्वी से थैया नाम का एक उल्का पिण्ड टकराया था । इस टक्कर से पृथ्वी का एक टुकड़ा टूटकर अलग हो गया । यही टुकड़ा चांद कहलाया , जिससे कवियों ने सुदंरता का एक मानदण्ड बनाया । किसी रुपसी को देखकर चांद से उसकी तुलना करने पर उस रुपसी का मान बढ़ जाता है । एक प्यारी सी गजल है – कल चौदवीं…

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व्यंग्य-“जाति पूछो भगवान की”

August 7, 2018

गांव में रामचरित मानस कथा के दस-दिवसीय आयोजन का आज अंतिम दिन था। जवार के लगभग दो हजार लोग एकत्र थे। हरिद्वार के स्वामी नित्यानंद महाराज भगवान विष्णु के दशावतारों की आध्यात्मिक व्याख्या कर रहे थे। कलियुग में हो रहे पापों की संक्षिप्त सूची पढ़ने के बाद उन्होंने घोषित किया कि कलियुग अब अपने अंतिम चरण में है। किसी भी दिन भगवान का कल्कि अवतार संभावित है और शास्त्रों के…

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तुम मुझ पर नजर रखो (4)

July 30, 2018

सुरेन्द्र कौर के मरे दो हफ्ते बीत चुके थे । मेरी जिंदगी की नाव मझधार में हिचकोले खा रही थी । मैंने अपने दत्तक पुत्र को उसके मां बाप के पास भेज दिया । उसकी परवरिश व पढ़ाई वहीं होने लगी । मैंने सुरेन्द्र कौर के कहने पर एक फ्लैट जीरकपुर में बुक किया था । उसके जिंदा रहते इस फ्लैट का अधिग्रहण नहीं हुआ था । अब जाकर उसका…

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