गढ़ तो आया, पर सिंह चला गया…

चौड़ी छाती, शेर की तरह मजबूत भुजाएँ, हवा की तरह लहराती चौड़ी तलवार, आसमान में उड़ता लाल रक्त और नभ में लहराता भगवा… फिल्में जब अपनी मिट्टी के योद्धाओं की अतुल्य वीरता पर बनती हैं तो दर्शक केवल देखता ही नहीं, उस शौर्य को जीता है। तान्हाजी ऐसी ही फ़िल्म है, जिसमें हम मराठों के शौर्य को जीते हैं, ‘जय भवानी’ के उद्घोष को महसूस करते हैं। भारत के इतिहास…

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नागरिकता संशोधन कानून का विरोध क्यों ?

नागरिकता संशोधन कानून के देशव्यापी विरोध के बीच सरकार के समर्थक मित्र निरंतर यह सवाल कर रहे हैं कि जब देश के प्रधानमंत्री ने साफ़ कर दिया है कि सरकार की देश में एन.आर.सी लाने की कोई योजना नहीं है तो मानवीयता के हित में संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन कानून के विरोध का क्या औचित्य है ? उनकी सोच है कि इसके विरोध में खड़े लोगों ने इसे समझा…

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सावित्री बाई और फ़ातिमा शेख

देश में स्त्री शिक्षा की अलख जगाने वाली और स्त्रियों के अधिकारों की योद्धा सावित्री बाई फुले की जयंती पर आज देश उन्हें याद कर रहा है। हां, यह देखकर तकलीफ जरूर होती है कि स्त्री शिक्षा, विशेषकर मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा के लिए जीवन भर उनके साथ कदम से कदम मिलाकर काम करने वाली फ़ातिमा शेख को लोगों ने विस्मृत कर दिया। फ़ातिमा जी के बगैर सावित्री जी अधूरी…

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गर्भ के दौरान जब अखाद्य चीजें खाने का मन करे

मातृत्व प्रकृति की एक नैसर्गिक देन है। मां बनकर ही औरत सम्पूर्ण औरत बनती है। पेट में बच्चे की हलचल को महसूस करना माँ को एक अलग दुनिया में ले जाता है। इस दुनिया में आ जाने पर बच्चे की मुलायम अंगुलियों की छुअन से माँ रोमांचित हो जाती है। बच्चे का चुटुर चुटुर दूध पीने का अंदाज और लात फेंकना माँ को आनंद से परिपूर्ण कर देता है। मातृत्व…

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नये साल पर धर्मयोद्धाओं को नमन

नए वर्ष का स्वागत करने के साथ नमन उन योद्धाओं को, जिनकी कठिन तपस्या के फलस्वरूप पिछले वर्ष लगभग पाँच सौ वर्षों के बाद हमारी धर्मभूमि अयोध्या को मुस्कुराने का अवसर मिला था। मन्दिर के भव्य शिखर पर चमकते स्वर्ण कलश की आभा में खो जाने वाले श्रद्धालु सदैव भूल जाते हैं उन महान हाथों को, जिनके द्वारा नींव के पत्थर जोड़े गए थे। आज उन्ही महान हाथ वाले धर्मयोद्धाओं…

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फिर नया साल

हर साल नए साल की आहट के साथ ऐसा हंगामा खड़ा होता है कि लगने लगता है, आने वाला साल कुछ खास होने वाला है। पिछले साल से कुछ बेहतर, कुछ सुंदर, कुछ ज्यादा मानवीय। दरअसल होता-वोता कुछ नहीं। इस साल भी नया कुछ नहीं होने वाला है। सब वही रहेगा-वही समाज, वही रहनुमा, वही सियासत, वही महंगाई, वही सांप्रदायिकता, वही हिन्दू-मुस्लिम, वही हिंदुस्तान-पाकिस्तान। हां, इस बेमतलब के हंगामे में…

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झूठ बोले कौवा काटे

“झूठ बोले कौवा काटे” वाली कहावत श्री राजकपूर की देन है। फिल्म बाॅबी में ही इस कहावत का सर्वप्रथम प्रयोग किया गया, लेकिन लोग इस शिद्दत से इसका उपयोग करते हैं कि लगता है कि यह कहावत बहुते पुरानी है। वैसे यह कहावत न होकर एक जुमला है, जिसे राजकपूर ने किसी अभिनेत्री को फोन करते समय उछाला था। अभिनेत्री घुटी हुई थी। उसने दीन दुनिया देखी थी। वह इस…

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यशस्वी वर्ष रहा 2019

स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे यशस्वी वर्ष 2019 विदा हो रहा है। भारतीय स्वाभिमान के पुनरुत्थान का वर्ष, जिसमें भारत के माथे पर लगे ‘धारा तीन सौ सत्तर’ जैसे कोढ़ के दाग पोंछ दिए गए, और वर्ष के अंत में पाकिस्तान और बंग्लादेश के उन असँख्य हिन्दुओं को उनका वह अधिकार देने का प्रयास किया गया जो लापरवाह भारतीय राजनीतिज्ञों की अकर्मण्यता के कारण उन्हें अबतक नहीं मिल पाया…

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उगना रे मोर कतय गेलाह…

मैथिली भाषा के एक बहुत बड़े कवि हुए हैं-विद्यापति। विद्यापति शिव के अनन्य भक्त थे। कहा जाता है कि स्वयं शिव विद्यापति की भक्ति से खुश थे और वे भी विद्यापति के साथ रहना चाहते थे। अतः शिव ने नौकर का रूप धारण किया और विद्यापति के साथ रहने लगे। नाम रखा-उगना। एक दिन विद्यापति व उगना जंगल के रास्ते जा रहे थे। विद्यापति को प्यास लगी। उगना (भगवान शिव)…

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लाल इमली इतिहास बनने के कगार पर

कानपुर की शान लाल इमली को एक बीमार यूनिट घोषित किया जा चुका है। यह देश के 46 बीमार सरकारी उपक्रमों में शामिल है। इनमें से कुछ उपक्रमों को बंद करने और कुछ को निजी हाथों में देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। लाल इमली मिल में उत्पादन दिसंबर 2013 से बंद है। इस मिल की स्थापना वर्ष 1876 में हुई थी। उस समय इस मिल का नाम “कानपोरे वुलन मिल्स”…

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