अलगोजा तेरे रूप अनेक

1-जब मेरा अलगोजा बोले अलगोजा एक वाद्य यंत्र है, जो बांसुरी की तरह होता है। इसका मुंह कलम की तरह कटा होता है। दो अलगोजों के कटे भाग को मुंह में रख फूंक के माध्यम से इन्हें बजाया जाता है। इसमें सात छिद्र होते हैं। अलगोजा बजाते समय इन छिद्रों पर अंगुलिया ऊपर नीचे की जाती हैं, जिससे मधुर धुन निकलती है। अलगोजा बजाना आसान नहीं होता। दो अलगोजों में…

Read More >>

दुनिया की सबसे करुण प्रेमकथा

इन दिनों खोज-खोजकर प्राचीन विश्व की कुछ मिथकीय प्रेम-कहानियों के बारे में पढ़ रहा हूं। इनमें से ज्यादातर कहानियों का अंत बहुत त्रासद हुआ है। दुनिया भर में कही-सुनी जानेवाली ऐसी त्रासद प्रेमकथाओं में आयरलैंड की एक प्राचीन कहानी का ज़िक्र प्रमुख रूप से होता है। इस प्रेमकथा का नायक प्राचीन आयरलैंड का एक योद्धा ओईसीन है। ओईसीन एक दिन शिकार की तलाश में जंगल की खाक छान रहा था…

Read More >>

ट्रेन में मिली थी वह

मैं अपने छोटे बेटे के साथ कलकत्ता जा रहा था। उन दिनों दुर्गा पूजा की काफी भीड़ थी। स्पेशल ट्रेन चलाई गयी थी। हमारी यात्रा का साधन भी विशेष ट्रेन ही थी। ट्रेन में पैण्ट्री नहीं थी। खाने—पीने की बड़ी किल्लत थी। हम वेंडर के आसरे ही थे। उनसे पानी लेकर पीते रहे। उनका खाना नहीं खाया। शाम को जब भूख ने ज्यादा जोर मारा तो वेंडर से गरम—गरम समोसे…

Read More >>

रसूल मियाँ-एक गुमनाम जिंदगी

भिखारी ठाकुर से बड़े व महेंदर मिसिर के समकालीन रहे रसूल मियाँ का जन्म गोपालगंज विहार के जिगना मजार टोला के एक मुस्लिम अंसारी परिवार में हुआ था. उनके पिता फतिंगा अंसारी अंग्रेजी सेना कोलकाता में बावर्ची हुआ करते थे. बड़े होने पर रसूल मियाँ भोजपुरी में गीत लिखने लगे थे. वे चौथी या पांचवीं जमात तक पढ़े थे, लेकिन भाषा पर उनकी पकड़ काफ़ी मजबूत थी. वे हिन्दू—मुस्लिम एकता…

Read More >>

कलम के जेहादी शायर हबीब जालिब

  पाकिस्तान के अजीम शायर हबीब जालिब ने हमेशा अपने मन की सुनी। जब एक मुशायरे में उन्होंने अपनी प्रसिद्ध नज्म ‘दस्तूर’ पढ़ी तो पूरे पाकिस्तान में हंगामा मच गया था। इस नज्म की शुरुआती पंक्तियाँ इस प्रकार हैं- दीप जिसका महल्लात ही में जले चंद लोगों की ख़ुशियों को लेकर चले वो जो साए में हर मसलहत के पले ऐसे दस्तूर को सुब्हे बेनूर को, मैं नहीं मानता, मैं…

Read More >>

संसार का सबसे चौड़ा बरगद का पेड़

हाबड़ा, पश्चिम बंगाल में स्थित आचार्य जगदीश चंद बसु बोटेनिक गार्डेन में विश्व का सबसे चौड़ा बरगद है. इस बरगद का जीवन लगभग 260 साल से ऊपर है. इसका कोई तथ्यात्मक प्रमाण नही है कि यह कब अस्तित्व में आया था, किन्तु 17वीं शताब्दी के यात्रा बृतान्तों में इसका जिक्र मिलता है. यह तकरीबन 4 एकड़ एरिया में फैला हुआ है. इस बरगद के पेड़ के चारों तरफ 330 मीटर…

Read More >>

बादलों के देश में कूड़ा !

मसूरी से करीब 22 किमी की चढ़ाई के बाद 400 एकड़ में फैला हुआ जॉर्ज एवरेस्ट का इलाका इस पूरी घाटी का सबसे खूबसूरत क्षेत्र है। बादलों का देश कही जाने वाली इस घाटी से गुजरना बादलों का सीना चीरकर रास्ता बनाने जैसा है। यहां बेहद खूबसूरत घाटी भी है, जंगल भी, कलात्मक चट्टानें भी और दूर हिमालय की हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखला का मनोरम दृश्य भी। जॉर्ज एवरेस्ट उन्नीसवीं सदी…

Read More >>

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा

यह बात पापा ने नहीं, चाचा ने कही थी। चाचा थे नासिर हुसैन। हुआ यह कि जावेद अख्तर नासिर हुसैन से मिलने उनके सेट पर पहुँचे थे। उन्होंने देखा कि एक लाल गालों वाला लड़का सेट पर काफी एक्टिव हो इधर—उधर निर्देश देता फिर रहा है। पता चला कि इस लड़के का नाम आमिर खान है। यह नासिर का भतीजा और उनका इस फिल्म में सहायक है। जावेद ने छूटते…

Read More >>

नीलकण्ठ तुम नीले ही रहियो

जब समुद्र मंथन हो रहा था तो उसमें से विष का पात्र भी निकला था। विष कोई पीना नहीं चाहता था। इसलिए विष पीने का जिम्मा भगवान शिव ने उठाया। वे हलाहल विष को पी गये। विष पीने से उनका कुछ नहीं बिगड़ा। सिर्फ उनका कण्ठ नीला पड़ गया था। इसीलिए शिव को नील कण्ठ भी कहा जाता है। मानवता के कल्याण के लिए शिव का विषपान जरूरी था। कहते…

Read More >>

छेना के रसगुल्ले..

दुनियाँ में मधुमेह एक महामारी की तरह फ़ैल रही है. अब तो चित्र में ही रसगुल्ले को देख कर मुँह में पानी लाना है. किसी कवि ने भी खूब कहा है- “उस रसगुल्ले की देहगन्ध इस कायनात में कहीं नहीं.” यह सोचकर बड़ी हैरानी होती है कि क्या रसगुल्ले की वजह से भी कोई नेता अलोकप्रिय हो सकता है? जी हाँ, बात सन् 1965 की है. पश्चिम बंगाल के मुख्य…

Read More >>
error: Content is protected !!