इंडिया गेट पर शहीदों के नाम को लेकर भ्रांतियां…… क्या है सच्चाई ?

इंडिया गेट (वास्तविक रूप से इसे अखिल भारतीय युद्ध स्मारक भी कहा जाता है) एक युद्ध स्मारक है। जो राजपथ, नयी दिल्ली में बना हुआ है, राजपथ को प्राचीन समय में किंग्सवे भी कहा जाता था।दिल्ली शहर के मध्य में स्थित इंडिया गेट 42 मीटर ऊँचा है और भारत के प्रसिद्ध सैनिको का नाम इंडिया गेट की दीवारो पर उकेरा गया है। उस दीवार पर उन सैनिको के नाम लगे…

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लोग क्या कहेंगे ?

आजकल की सबसे बड़ी बीमारी है – लोग क्या कहेंगे ? यह वाक्य हमारे जेहन में इस तरह रच बस गया है कि इसे निकालना नितांत हीं मुश्किल है । आपने वह मशहूर कहानी जरुर सुनी होगी जिसमें बाप बेटे एक गधे के साथ सफर कर रहे होते हैं । लोगों के कहने पर कभी बाप गधे पर बैठा तो कभी बेटा । कभी दोनों एक साथ बैठे । फिर…

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गाँव उजड़ा – इज़्ज़त व सम्मान के वास्ते

बात सन् 1825 की है । जैसलमेर से 18 km दूर एक गाँव होता था । गाँव का नाम कुलधारा था । इस गाँव में पालीवाल ब्राह्मणों का निवास था । ये किसानी के साथ साथ भवन निर्माण की कला में भी पारंगत थे । जैसलमेर राजघराने को सबसे ज्यादा राजस्व इसी गाँव से मिलता था ।सब कुछ शांति से गुजर रहा था कि अचानक इस गाँव की शांति को…

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विकास की दौड़ में पीछे छूटी टमटम गाड़ी….

दो ऊंचे पहियों की एक खुली गाड़ी जिसे एक घोड़ा खींचता है , उसे तांगा या टमटम कहते हैं । इसे हांकने वाला आगे बैठता है और सवारियां पीछे । विश्व में जब पहिए का आविष्कार हुआ तो यातायात व सामान ढुलाई में सहूलियत हुई । पहिए की जानकारी के बाद हीं रथ ,तांगा , बैलगाड़ी, ट्रेन ,बस व कार बने । आकाश में उड़ने वाली जहाज भी उड़ने से…

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साथ जिएंगे , साथ मरेंगे (2)

शादी के दो दिन बाद पवन के परिवार वालों ने एक बड़ी पार्टी का आयोजन किया । उस पार्टी में पवन के परिवारी जन और उसके दफ्तर के लोग थे । शर्मिष्ठा के भाई ने भी उस पार्टी में शामिल होना था , लेकिन रात के दस बजे तक जब वह नहीं आया तो शर्मिष्ठा ने उसके आने की उम्मीद छोड़ दी । शायद वह इतने बेगाने लोगों में अपना…

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साथ जिएंगे , साथ मरेंगे ।

शर्मिष्ठा पहाड़ की हिरनी थी । पलक झपकते हीं वह कुलांचे भरती दूर तक निकल जाती । वह स्कूल जाती थी तो पढ़ती कम ऊधम ज्यादा मचाती थी । उसकी धमाचौकड़ी से सभी तंग रहते थे । जिस दिन वह शांत रहती घर वाले चिंतित हो जाते कि कहीं उसकी तवियत खराब तो नहीं हो गयी ? स्कूल नहीं जाती जिस दिन उस दिन स्कूल की टीचर पता करने आ…

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द्वितीय विश्व युद्ध की भारतीय मूल की महिला जासूस – नूर इनायत खान

नूर इनायत खान का जन्म 1 जनवरी सन् 1914 को मास्को में हुआ था । उनके पिता हज़रत इनायत खान टीपू सुल्तान के पड़पोते और माँ एक अमरीकी महिला थीं । पिता सूफी परम्परा के फ़क़ीर थे और विदेशों में सूफी सम्प्रदाय के प्रचार प्रसार के लिए गए थे । नूर इनायत खान का परिवार बाद में रूस छोड़ इग्लैंड होता हुआ फ़्रांस में जाकर बस गया था । नूर…

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रस्साकशी का खेल हमारे जीवन में अनवरत चल रहा है….

रस्साकशी का खेल कब दुनियां में आया , यह तो मुझे मालूम नहीं है , पर जब से होश सम्भाला है इसे देखता आ रहा हूं । पहले पहल रस्साकशी का यह खेल अपने स्कूल में देखा था । छात्रों के बीच की रस्साकशी देखी । फिर शिक्षक और शिष्यों के बीच रस्साकशी देखी । शिक्षक और शिष्यों की बीच की रस्साकशी में अक्सर शिक्षकों को जीतते देखा है ।…

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राफेल पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही है कठघरे में : ध्रुव गुप्त

दो दिनों तक लोकसभा में राफेल विवाद पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को सुनने के बाद समझ यह बनती है कि इस मामले में कमोबेश कांग्रेस और भाजपा दोनों ही कठघरे में हैं। वायुसेना की तत्काल मांग को देखते हुए 2004 में आई कांग्रेस सरकार ने 526 करोड़ प्रति विमान की दर तय कर फ्रांस से 126 राफेल विमान खरीदने का मसौदा तैयार किया। वायुसेना की तत्काल ज़रूरतों और…

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जल्द आ रही है सुशान्त कुमार शर्मा की भोजपुरी काव्यखंड “जटायु”

आज का साहित्यिक दौर विमर्शों का दौर है । ऐसे में जब स्त्री , दलित , आदिवासी आदि अस्मिताएं विमर्शों के केंद्र में आईं हैं वे अपनी जड़ें मध्यकालीन और प्राचीन स्रोतों के उपेक्षित पड़े पन्नो पर खोज रही हैं । आश्चर्य नहीं कि वहां तत्सामयिक मुख्य धारा से विलग ऐसे सन्दर्भ प्रभूत राशि के रूप में मिलते हैं जिनसे आज के नवीन विचार प्राणवायु ग्रहण कर रहे हैं ।…

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