सर्व भाषा ट्रस्ट का प्रथम वार्षिकोत्सव सम्पन्न

भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए समर्पित संस्था सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में प्रथम वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया।अपने स्वागत भाषण में सर्व भाषा ट्रस्ट की परिकल्पना और उसकी योजनाओं पर अध्यक्ष अशोक लव ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आगामी योजनाओं की भी चर्चा की। सचिव रीता मिश्रा व समन्वयक केशव मोहन पाण्डेय ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि…

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भोजपुरी को आठवीं अनुसूची के साथ साथ मिले अल्पसंख्यक भाषा का दर्जा : भोजपुरी लिटरेचर फेस्टिवल

नई दिल्ली : न्यूज़ फीड ; भोजपुरी असोसीएशन ऑफ इंडिया’ (भाई) दिल्ली चैप्टर के साथ साथ मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार और मंगलायतन यूनिवर्सिटी के संयुक्त प्रयास से राजधानी में’भोजपुरी लिटरेचर फेस्टिवल 2018′ का आयोजन, हिन्दी भवन दिल्ली में हुआ। उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ पत्रकार ओंकारेश्वर पाण्डेय, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अध्यक्ष अजीत दुबे, संपादक प्रमोद कुमार, अभिनेता सत्यकाम आनंद ने दीप प्रज्ज्वलन किया और अपने अपने विचार रखे ।इस मौके पर ‘भोजपुरी एसोसिएशन आॅफ इंडिया, दिल्ली चैप्टर के…

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बैल कभी आदमी नहीं हो सकता ।

मेरे एक बरिष्ठ अधिकारी बैल की तरह मस्तमौला थे । राह चलते वे दाएं बाएं नहीं देखते थे । वे नाक की सीध में चलते थे । किसी ने उन्हें जयहिंद किया या नहीं इन बातों से बेपरवाह । जवान उन्हें बैल कहने लगे । बटालियन की फिजां में यह बात तैरने लगी । बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी । बात उन तक भी पहुंची । उन्होंने यह बात…

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घूम रहे विषधर बस्ती में , देखो कहीं सपेरा है क्या ?

श्याम सखा के इस शेर में सपेरे की ढूंढ तो आस्तीन के साँप को पकड़ने के लिए की जा रही है । आज तक आस्तीन के साँप को कोई सपेरा नहीं पकड़ सका है ।आस्तीन के साँप का काटा आदमी तो पानी भी नहीं माँगता । इसलिए हम न तो इस साँप की बात करेंगे और इनको न पकड़ पाने वाले सपेरों की बात करेंगें । आज हम उन सपेरों…

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कहां से आता है प्रकाश ?

कहते हैं कि अंधेरे के पास बहुत वक्त होता है, प्रकाश हमेशा जल्दी में होता है। अंधेरा हमारे आसपास हर कहीं बिखरा है। हमारे बाहर भी और हमारे भीतर भी। वह रात के अंधेरे में भी है और दिन के उजाले में भी। हम हर समय उसे महसूस करते हैं। उससे भयभीत होते हैं। उससे मुक्त भी होना चाहते हैं और बार-बार उसकी तरफ लौट भी जाना चाहते हैं। हमारे…

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मजाज लखनवी का मिजाज ।

मजाज लखनवी का असली नाम असरारुल हक था ।उनके पिता चौधरी सिराज उल हक एक जमींदार थे । वे चाहते थे कि असरारुल हक इंजीनियर बनें , इसके लिए मजाज को साईंस से 12 वीं पास करनी पड़ी । पर उनकी नजर शायरी पर थी । इसलिए 1931 में असरारुल हक ने आगरा से बीए की पढ़ाई की । इंजीनियरिंग से उनका मोह भंग हो गया था । आगरा की…

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बलराम – एक बहु आयामी उपेक्षित व्यक्तित्व

बलराम कृष्ण के सौतेले भाई और वासुदेव व रोहिणी के पुत्र थे । उनकी अपनी एक बहन थी , जिसका नाम सुभद्रा था । बलराम सुभद्रा का विवाह दुर्योधन से करना चाहते थे , पर कृष्ण जानते थे कि सुभद्रा अर्जुन को चाहती थी । अतः वही हुआ जो कृष्ण और अर्जुन चाहते थे ।सुभद्रा का अर्जुन से कृष्ण ने अपहरण करवा कर अपनी बात ऊपर रखी । जहाँ ज्यादा…

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जानें खत्री समाज के बारे में ।

बहुधा भारत के पश्चिमोत्तर प्रांतों में बसा हुआ है ये खत्री समाज । ये समाज अपने को सूर्यवंशीय क्षत्रिय मानता है । ये अपने को श्रीराम के पुत्र लव व कुश का वंशज बताते हैं । आज भी पश्चिमोत्तर में स्थित लाहौर और कसूर नगर लव और कुश द्वारा बसाए हुए माने जाते हैं । कहते हैं कि लव के वंशज सोढ़ी और कुश के वंशज बेदी के रुप में…

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मेलाघुमनी के गीत !

अभी कुछ दिनों पहले यात्रा के क्रम में रास्ते में एक छोटे-से ग्रामीण मेले को देखकर मेले के बचपन वाले तिलिस्म को जगाने की भरसक कोशिश की। थोड़ी देर मेले में घूमा। जलेबी और हवा मिठाई भी खाई। मगर वह जादू नदारद था। शायद मेला देखने के लिए अब न बचपन वाली आंखें थीं और न उसे महसूस करने के लिए बच्चों वाला दिल। बहुत याद आए मेरे शहर गोपालगंज…

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हिटलर व स्वस्तिक ।

हिटलर का मानना था कि आर्य जर्मनी के बाशिंदे थे और जर्मनी से जा कर हीं आर्यों ने भारत पर आक्रमण किया था । इसलिए हिटलर ने भारतीय आर्यों के शुभ चिन्ह स्वस्तिक को अपनी सेना के ध्वज पर लगाया था । उसका मानना था कि वह दिन दूर नहीं जब आर्यों के स्वस्तिक ध्वज के नीचे पूरी दुनियाँ आ जायेगी । स्वस्तिक का अर्थ मंगल होता है । सु…

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