समाजवाद के अग्रदूत – महाराज अग्रसेन .

आज से तकरीबन 5 हज़ार वर्ष पूर्व सूर्यवंशीय क्षत्रिय राम की वंश परम्परा के 34 वीं पीढ़ी में महाराज अग्रसेन का जन्म हुआ था । इनके पिता का नाम बल्लभसेन और माता का नाम भगवती था । ये ज्येष्ठ पुत्र थे । इसलिए महाराज बल्लभ सेन इनको सत्ता सौंप स्वयं वानप्रस्थी हो गए थे । नागराज की कन्या माधवी के स्वयम्बर में महाराज अग्रसेन भी आमन्त्रित थे ।माधवी के रूप…

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आखिर क्यों देखे फिल्म “मणिकर्णिका”……

कंगना राणावत की फ़िल्म “मणिकर्णिका”!  सच कहें तो ‘महारानी झाँसी’ जैसे चरित्र को परदे पर उतारना बड़ा कठिन कार्य है। धन्यवाद के पात्र हैं वे लोग जिन्होंने यह फ़िल्म बनाने की सोची। देखी जानी चाहिए यह फ़िल्म, ताकि समझ सकें हम अपने इतिहास को… मणिकर्णिका देखिये, ताकि आप जान सकें कि भारत की पवित्र भूमि ने कैसी-कैसी बेटियों को जन्म दिया है। मणिकर्णिका देखिये, ताकि भविष्य में जब कोई मूर्ख…

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गणतंत्र दिवस काव्य-संध्या का सफल आयोजन

गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर ‘सर्व भाषा ट्रस्ट’ और हर्फ़ प्रकाशन द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस काव्य-संध्या का सफल आयोजन किया गया। काव्य-संध्या में देश-प्रेम पर रचनाकारों ने अपनी विविध भाव-भूमि पर रचनाएँ प्रस्तुत की। 26 जनवरी को अनुसन्धान अपार्टमेंट, से-6,  द्वारका, नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस काव्य-संध्या का सफल आयोजन किया गया। उक्त काव्य-संध्या की अध्यक्ष ‘सर्व भाषा ट्रस्ट’  अध्यक्ष श्री अशोक लव ने की जबकि कार्यक्रम में इलाहबाद से…

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टूटता बिखरता परिवार ।

लोग संयुक्त परिवार की महत्ता को भूलते जा रहे हैं । अब एकल परिवार का चलन शुरु हो गया है । पति पत्नी और बच्चे । यही आज के परिवार की गिनती है । एकल परिवार की संख्या पांच के आस पास रहती है । एकल परिवार में बुजुर्गों का कोई काॅलम नहीं होता । या तो बुजुर्ग इस एकल परिवार के लिए फिट नहीं बैठते या खुद उनको अपने…

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यूं भी तो आराम बहुत है ।

श्लोथ एक आराम तलब जानवर है । दिन भर पेड़ पर टंगा रहता है । बहुत कम नीचे उतरता है । जब जमीन पर उतरता है तो इसकी शामत आ जाती है । एक घंटे में मात्र साढ़े छः फीट हीं चल पाता है । इसी आलसीपने की वजह से यह मांसाहारी जानवरों का आसानी से ग्रास बन जाता है । अगर आप सोचते होंगे कि श्लोथ को आलसीपने की…

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सादगी का दीपक – महारानी अहिल्या बाई होल्कर

अहिल्या बाई होल्कर का जन्म 31मई सन् 1725 को चाउड़ी ( चांदवड़ ) अहमदनगर महाराष्ट्र में हुआ था । इनके पिता का नाम मानकोजी शिंदे था । मानकोजी शिंदे एक अति साधारण परिवार से थे , पर संस्कारी थे । उन्होंने अहिल्याबाई में अच्छे संस्कारों का बीजारोपण किया था । इंदौर राज्य के संस्थापक मल्हार राव होल्कर को अपने पुत्र खण्डे राव के लिए एक अच्छी संस्कारी बहु चाहिए थी…

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अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का ।

प्रमिला से मेरी मुलाकात फिल्मी स्टाइल में हुई थी । वह घग्घर नदी के किनारे पैरापेट पर अपनी सहेलियों के साथ बैठी हुई थी । अचानक सब ने धींगा मुश्ती शुरू कर दी । एक दूसरे को छेड़ने के उपक्रम में प्रमिला सीधे घग्घर नदी में जा गिरी । सहेलियां कुछ कर नहीं सकीं । वे ” बचाओ बचाओ ” की आवाजें लगाने लगीं थीं । मैंने आव ताव नहीं…

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प्लास्टिक का नर्क !

देश के कई राज्यों में प्लास्टिक या पोलीथिन कैरी बैग पर प्रतिबंध तो है, लेकिन जनजागृति के अभाव में जमीन पर इसका असर कम ही देखा जा रहा है। पृथ्वी के पर्यावरण को बिगाड़ने में इनकी बहुत बड़ी भूमिका है। एक पोलिथिन बैग तैयार करने के लिए सिर्फ चौदह सेकंड ही चाहिए, लेकिन इसे नष्ट होने में चौदह हजार साल तक लग सकते है। एक बार प्रयोग कर फेंके गए…

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तमिल भाषी रांगेय राघव बने हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार

रांगेय राघव का पूरा नाम तिरू मल्लई नम्बकम बीर राघव आचार्य था । इनके पूर्वज तिरुपति बाला जी मन्दिर में पुजारी थे , जिनकी विद्वता से प्रभावित हो राजस्थान राजघराने द्वारा इन्हें राजस्थान के मन्दिरों में पूजा के लिए आमन्त्रित किया गया था । कालांतर में रांगेय राघव के पिता आगरा चले गए थे । यहीं पर रांगेय राघव का जन्म 17 जनवरी सन् 1923 को हुआ । हिंदी साहित्य…

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मकर संक्रांति – स्नान और दान का पर्व .

मकर संक्रांति के दिन हीं सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और दक्षिणायन से यह उत्तरायण में होता है । सूर्य का उत्तरायण होना मोक्ष प्रदान करने वाला होता है । आज के दिन के इंतज़ार में हीं भीष्म छः माह तक शर सैय्या पर पड़े रहे और सूर्य के उत्तरायण होते हीं अपने प्राण त्याग दिए थे । कहा जाता है कि मकर संक्रांति के…

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