स्वाधीन कलम का धनी एक कलमकार

..जब छोटा रामना के एक चावल व्यवसायी उधारी के एवज में मेरा घर नीलाम करवाना चाहते थे तब हर प्रकार के उपाय से थक हार कर मैंने अपने एक राजस्थान के कवि मित्र को ख़त लिखा था कि आप मेरा घर बचा सको तो बचा लो लेकिन वो मित्र भी मेरा घर नहीं बचा सके और मेरा मकान नीलाम हो गया..’’ उन चंद पन्नों पर ना ही किताब का नाम…

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जल-संकट

याद है वो दिन? क्या ताल, क्या नदी, सूखे की मार से सूख गया था लोगों के आँखों का भी पानी। पानी की एक बूँद के लिए गिड़गिड़ाते हुए, चेहरे पर असहायी पीड़ा लिए हुए चेहरे, अपनी आँखों से झरझरा रहे पानी को एक निर्झर का रूप देकर सदा के लिए उसमें डूब जाने को भी मजबूर दिख रहे थे। खैर उनकी आवाज मालिक के पास पहुँची। मालिक ने न्यूज…

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एक गाँव उपेक्षित सा

  राजस्धान का एक गांव धनूरी , जो झुंझनू जिला मुख्यालय से आधे घंटे की दूरी पर स्थित हे ,के हर घर में एक फौजी रहता है । कई परिवार ऐसे हैं जिनकी पांच पांच पीढ़ियों से लोग फौज में नौकरी करते आ रहे हैं । धनूरी मुस्लिम बहुल गांव है । इस गांव में कायमखानी मुस्लमान रहते हैं । तकरीबन 300 लोग सरहद पर तैनात हैं और 400 सेवा…

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कब मनाई जाए जन्माष्टमी ?

इसबार जन्माष्टमी को लेकर अधिक उलझन है।प्रायः सभी पंचांग 14 अगस्त (सोमवार) को स्मार्तों (गृहस्थों) के लिए तथा 15 अगस्त (मंगलवार) को वैष्णवों (साधु-सन्तों) के लिए श्रीकृष्णाष्टमी बता रहे हैं।प्रश्न यह है कि थोड़ा अन्तर के साथ सभी पंचांगों के अनुसार 14 अगस्त को सप्तमी तिथि शाम 5.40 तक है और अष्टमी तिथि अगले दिन (15 अगस्त को) अपराह्न 3.30 बजे तक है। सोमवार (14 अगस्त ) को रोहिणी नक्षत्र…

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रिश्तों के जंगल में एक कंकाल की व्यथा

सरसरी निगाह से देखें तो मुंबई के लोखंडवाला इलाके के एक पॉश कॉलोनी स्थित एक फ्लैट से एक बूढ़ी महिला आशा साहनी का कंकाल मिलने की घटना बहुत आम लगेगी, लेकिन अगर घटना की तह में जाएं महसूस होगा कि जो मिला है वह एक बूढ़ी औरत का कंकाल नहीं, मरते हुए पारिवारिक रिश्तों और छीजती मानवीय संवेदनाओं की स्तब्ध कर देने वाली दास्तान है। आशा साहनी कई कमरों के…

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श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग (मित्रता दिवस पर)

श्रीराम सुग्रीव से कहते हैं- जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी।। निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना।। जिन्ह कें असि मति सहज न आई। ते सठ कत हठि करत मिताई।। कुपथ निवारि सुपंथ चलावा। गुन प्रगटै अवगुनन्हि दुरावा।। देत लेत मन संक न धरई। बल अनुमान सदा हित करई। बिपति काल कर सत गुन नेहा। श्रुति कह संत मित्र गुन…

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मित्रता पर आचार्य रामचंद्र शुक्ल के विचार

आज जब पूरा सोशल मिडिया मित्रता दिवस मना रहा है तब आइए पढ़ते है मित्रता के बारे में हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार रहे के आचार्य रामचंद्र शुक्ल के विचार : जब कोई युवा पुरुष अपने घर से बाहर निकलकर बाहरी संसार में अपनी स्थिति जमाता है, तब पहली कठिनता उसे मित्र चुनने में पड़ती है। यदि उसकी स्थिति बिल्कुल एकान्त और निराली नहीं रहती तो उसकी जान-पहचान के लोग धड़ाधड़…

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प्रधानमंत्री मोदी का “प्रणब प्रेम” हुआ दुनिया को मालुम

  ऐसे तो की मौको पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सार्वजनिक मंचों से भूतपूर्व महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तारीफ करते रहे है । ३ अगस्त को प्रनब मुखर्जी ने अपने ट्वीटर हैड़ल से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लिखी हुई चिट्ठी को सार्वजनिक किया । यह चिट्ठी उनको अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम दिन प्राप्त हुई थी ‌। प्रनब मुखर्जी इस चिट्ठी को लेकर बहुत ही भावुक नजर आए । इस…

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शरद यादव चाहते क्या हैं ? कर क्या पायेंगे?

नीतीश कुमार समेत लालू प्रसाद यादव को बनाने में खुद की अहम भूमिका मानने वाले समाजवादी नेता शरद यादव द्वारा बिहार प्रकरण से नाराज होकर नयी पार्टी बनाने की बात कही जा रही है। लंबे समय में निरंतर प्रयास से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार द्वारा ही अप्रासंगिक बनाये जा चुके नयी पार्टी के जरिये कुछ कर पायेंगे या समाजवादियों के खंड—खंड में बंटे रहने वाली परंपरा का विस्तार…

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व्यक्तिगत स्वार्थ से निहित था महागठबंधन

बिहार को युहीं राजनीती का लेबोरेटरी नहीं कहा जाता है| यहाँ से कई मर्तबा केंद्र की राजनीती तय हुई है|किरदार हमेशा बदलता रहता है| ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जो बिहार में हो रहा है वो भारतीय राजनीती बिलकुल नया या अजूबा हो रहा है| ऐसी घटनाएँ इतिहास में भी है|प्रकाश झा साहब की एक फिल्म है ‘राजनीती’| उसमे एक बढ़िया सा जुमला है कि ‘राजनीती में फैसले सही या…

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