व्यक्तिगत स्वार्थ से निहित था महागठबंधन

बिहार को युहीं राजनीती का लेबोरेटरी नहीं कहा जाता है| यहाँ से कई मर्तबा केंद्र की राजनीती तय हुई है|किरदार हमेशा बदलता रहता है| ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जो बिहार में हो रहा है वो भारतीय राजनीती बिलकुल नया या अजूबा हो रहा है| ऐसी घटनाएँ इतिहास में भी है|प्रकाश झा साहब की एक फिल्म है ‘राजनीती’| उसमे एक बढ़िया सा जुमला है कि ‘राजनीती में फैसले सही या…

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बाज़ार ही सेक्युलर है

अक्सर जब राजनीति का बवंडर आकार लेने लगता है तब कथित सेकुलरिज्म की हवा गर्म होने लगती है।ऐसे में वाजिब सेक्युलर ताक़तों पर भी संदेह होना लाज़िम है।कारण?इतना कुछ ब्लैक&वाइट है कि उसमें वास्तविक रंग का वजूद  नज़र नहीं आता।जितने भी वाजिब मुद्दे हैं और उन मुद्दों को लेकर जो भी आग्रह-पूर्वाग्रह है उनमें राजनीति ही सबसे प्रबल नज़र आती है। जिस तरह कोई एक मुसलमान हिन्दू समुदाय के समर्थन…

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वृद्धों की उपेक्षा और समय-चक्र

वृद्धावस्था उस अवस्था को कहा गया है जिस उम्र में मानव-जीवन काल के समीप हो जाता है। वृद्ध लोगों को विविध प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोग लगने की अधिक सम्भावना होती है। उनकी समस्याएँ भी अलग होती हैं। वृद्धावस्था एक धीरे-धीरे आने वाली अवस्था है जो कि स्वभाविक व प्राकृतिक घटना है। वृद्ध का शाब्दिक अर्थ है बढ़ा हुआ, पका हुआ, परिपक्व। वर्तमान सामाजिक जीवन-शैली में वृद्धों के कष्टों…

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