हिन्दी साहित्य और गधावाद

देश के घोषित और पोषित साहित्यकारों ने एक बार फिर गधे को विमर्श के केंद्र में ला दिया है। अब इसे स्वनामधन्य साहित्यकारों की बौद्धिकता समझें या गदहपन, पर विमर्श को ऊंची अट्टालिकाओं से खींच कर गधे के पांव में लाना उन्हें नमन के योग्य बनाता है। बहुत पहले हिन्दी के जनवादी शायर अदम गोंडवी ने कहा था- जो ग़ज़ल मासूक के जलवों से वाकिफ हो गयी, उसको अब बेवा…

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नेपाल में देखी गयी हनीप्रीत,तलाश में लगीं पुलिस, जगह जगह छापे

बलात्कार के आरोप में बीस साल की सजा पाकर जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम की मुहंबोली बेटी हनीप्रीत की तलाश नेपाल पुलिस ने तेज कर दी है। सूत्रों की माने तो हनीप्रीत नेपाल के विराटनगर में देखी गई है। वहीं हरियाणा पुलिस के अधिकारी भी हनीप्रीत की तलाश में नेपाल पुलिस के साथ मिलकर सर्च ऑपरेशन कर रही है।बताया ये भी जा रहा हैं कि…

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हम शांति के लिए प्रतिबद्ध,रोहिंग्या मुसलमान आतंकी वारदातों में शामिल:आंग सान सू की

रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर म्यांमार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि म्यांमार आतंकवाद से लड़ रहा था। रोहिंग्या ने बेगुनाह लोगों पर हमले किये। हमने शांति की हर संभव कोशिश की लेकिन पुलिसवालों पर हमले किये गये। उन्होंने कहा कि बेघर हुए लोगों का हमें दुख है। लेकिन देश की सुरक्षा के साथ कोई…

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अहमदाबाद : माया कोडनानी मामले में गवाही देने एस.आई.टी कोर्ट पहुंचे अमित शाह

2002 के नरोदा गाम केस में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह गवाही देने के लिए अहदाबाद में एसआईटी के विशेष कोर्ट पहुंच गए हैं। मामले की मुख्य आरोपी माया कोडनानी की अपील पर शाह गवाही देने के लिए कोर्ट में मौजूद हैं। बीजेपी की पूर्व मंत्री और गुजरात की पूर्व विधायक माया कोडनानी केस में मुख्य आरोपी मानी गई हैं। नरोदा पाटिया में दंगे के दौरान 11 मुस्लिमों की हत्या हुई…

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पंच तत्व में विलीन हुए वायुपुत्र अर्जन सिंह, पुरे राजकीय सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई

वायुसेना के एकमात्र मार्शल अर्जन सिंह को सोमवार सुबह अंतिम विदाई दी गई। दिल्ली के बरार स्क्वेयर में अर्जन सिंह का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मार्शल को 17 तोपों और फ्लाई पास्ट से सलामी दी गई।पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बरार स्क्वेयर पहुंचकर मार्शल अर्जन को श्रद्धांजलि दी। मार्शल अर्जन के सम्मान में आज सभी सरकारी इमारतों में राष्ट्रीय ध्वज…

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बांध का मतलब विकास है, आगे सोचना मना है

आज जब मेन स्ट्रीम मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सरदार सरोवर डैम को तोहफे के तौर पर दिए जाने की खबर चलती रही, सोशल मीडिया में छाती भर पानी में डूबे उन विस्थापितों की तस्वीर हमें झकझोर रही थी। हमसे बार-बार पूछ रही थी कि तोहफे की कीमत क्या यही है? खबर है कि कुछ लाख घरों को रोशन करने की कीमत 500 गांव के बाशिंदे चुका…

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एक आग का दरिया है

जब से मनुष्य को इस बात का इल्म हुआ कि वह नंगा है , वह उसी दिन से सभ्य होना शुरू कर दिया । उसे रोटी , कपड़ा और मकान की चिंता सताने लगी । “मैनू इश्क का लगिया रोग , मैनूं बचने की नहीं उम्मीद ” टाइप उसे रोग भी लगा । इस इश्क से दर्द का रिश्ता जुड़ा । उसे यह भी पता चला कि बिना दर्द के…

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शबाना आज़मी के जन्मदिन पर:”तुमको देखा तो ये ख़याल आया”

आधुनिक भारतीय सिनेमा की महानतम अभिनेत्रियों में से एक शबाना आज़मी ने भारतीय सिनेमा में संवेदनशील और यथार्थवादी अभिनय के जो नए आयाम जोड़े, उसकी मिसाल भारतीय सिनेमा में तो क्या, विश्व सिनेमा में भी कम ही मिलती है।अभिनय में गहराई ऐसी कि एक-एक ख़ामोशी सौ-सौ लफ़्ज़ों पर भारी। शालीनता ऐसी जो हज़ार अदाओं पर भारी। परदे पर उनकी ज़ुबान कम, आंखें ज्यादा संवाद करती हैं। महान शायर कैफ़ी आज़मी…

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अजी छोड़िए वामपंथ-दक्षिणपंथ, आइए एक ‘देवता’ से मिलते हैं

जिस दौर में लाशों को भी वेंटीलेटर पर रखकर बिल भुनाने से कई डॉक्टर नहीं चूकते, उस दौर में इस देवतुल्य चिकित्सक की कहानी दिल को गदगद कर देती है। जब तमाम डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ प्राइवेट प्रैक्टिस से करोड़ों का अस्पताल खोलना फायदेमंद समझते हैं, तब बीएचयू के प्रख्यात कार्डियोलाजिस्ट पद्मश्री प्रो. डॉ. टी के लहरी साहब अद्भुत हैं। आप हैरत में पड़ेंगे। मेडिकल कॉलेज में तीन दशक की…

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कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना

तब सरकार राजीव गांधी की थी। रेल मंत्री थे ग्वालियर के महाराजा माधवराव सिंधिया। 1986 से 1989 के बीच गजब का काम किया रेलवे में। हुलिया बदलकर रख दिया। उस समय भारतीय रेल का आधुनिकीकरण और कम्प्यूटराइजेशन संभव हुआ तो वह सिंधिया के विजन की बदौलत। सिंधिया सपने देखते थे। उसे धरातल पर उतारने के लिए बेचैन हो उठते थे। एक तो राजा थे, दूसरे रेल मंत्री। मगर, सफर करना…

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