काबुल का एक रूप ऐसा भी

November 16, 2019

काबुल का प्राचीन वैदिक नाम कपिशा था। इसका इतिहास तकरीबन 3000 वर्ष पुराना है। यहीं पर दधीचि की हड्डियों का अस्त्र शस्त्र तैयार किया गया था। कनिष्क के समय में यहाँ पर बौद्ध धर्म को राज्याश्रय मिला था। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने अपना राज्य विस्तार इसी रास्ते से सोवियत रूस की सीमा तक किया था और खैबर के दर्रे से प्रवेश कर सिकन्दर महान काबुल होता हुआ भारत में प्रवेश…

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भागी हुई लड़कियों का बाप

July 15, 2019

वह इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है। पहले तो वह महीनों तक घर से निकलता नहीं है, और फिर जब निकलता है तो हमेशा सर झुका कर चलता है। अपने आस-पास मुस्कुराते हर चेहरों को देख कर उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हैं। वह जीवन भर किसी से तेज स्वर में बात नहीं करता, वह डरता है कि कहीं कोई…

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