नज़र उनपर भी कुछ डालो

October 15, 2017

हमारे पूर्वजों ने दीवाली सहित किसी धार्मिक या लोकपर्व की परिकल्पना करते वक़्त अपने गांवों के कारीगरों, शिल्पियों और कृषकों की रोज़ी-रोटी और सम्मान का पूरा-पूरा ख्याल रखा था। उनके उत्पादों के बिना कोई भी पूजा सफल नहीं मानी जाती थी। औद्योगीकरण के आज के दौर ने बहुत कुछ बदल दिया है। हम भूलते जा रहे हैं कि उजालों के पर्व दीवाली में अपने देश के लाखों लोग ऐसे हैं…

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